Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में पिछले दो-तीन सालों में हुए उथल-पुथल के बाद सियासी समीकरण बदल चुके हैं। ऐसे में यहां आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारा काफी पेचीदा होता जा रहा है। यही कारण है कि शनिवार को बीजेपी की पहली सूची में महाराष्ट्र की एक भी सीट शामिल नहीं थी। राज्य में शिवसेना और एनसीपी में टूट के बाद सीट बंटवारे पर बातचीत अभी तक जारी है।
सूत्रों की मानें तो बीजेपी के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन एवं विपक्षी गठबंधन दोनों का मानना है कि लोकसभा में उत्तर प्रदेश के बाद सर्वाधिक संख्या में सांसद भेजने वाले महाराष्ट्र में सीट आवंटन का एक मात्र फार्मूला जीत की संभावना है। बता दें, उत्तर प्रदेश से 80 लोकसभा सदस्य और महाराष्ट्र से 48 लोकसभा सदस्य चुने जाते हैं।
2019 के बाद से कई बार हुई राजनीतिक उथल-पुथल
महाराष्ट्र में 2019 के बाद से कई बार राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली है। 2019 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भाजपा के साथ अपने पुराने गठबंधन को तोड़ दिया था फिर शिवसेना और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को भी दलों में विभाजन का सामना करना पड़ा। शिवसेना के अधिकतर विधायक अब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ हैं जिन्होंने भाजपा के साथ हाथ मिला लिया हैं। इसके अलावा अजित पवार भी अपने समर्थक पार्टी विधायकों के साथ पिछले साल शरद पवार नीत राकांपा से अलग होकर सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल हो गए। सत्तारूढ़ एवं विपक्षी दलों के नेताओं ने बताया कि दलों के विभाजन के बाद समीकरण बदलने के कारण सीटों का बंटवारा एक मुश्किल काम हो गया है।
बीजेपी की चलेगी मनमानी
शिवसेना और एनसीपी में टूट के बाद महाराष्ट्र में सीट बंटवारे में बीजेपी की मनमानी चलती दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा के 30 से अधिक सीट पर चुनाव लड़ने की संभावना है, जबकि अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा ने 10 सीट मांगी हैं लेकिन उसे चार सीट मिलने की संभावना है। वहीं, शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी 18 सीट पर चुनाव लड़ना चाहती है। वर्ष 2019 के चुनावों में अविभाजित शिवसेना ने 18 सीट पर ही जीत हासिल की थी। अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के प्रवक्ता अमोल मिटकरी ने कहा कि उनकी पार्टी पुणे की बारामती सहित 10 सीट पर चुनाव लड़ना चाहती है।
