Ujiarpur Assembly Election 2025: समस्तीपुर जिले की उजियारपुर विधानसभा सीट जातीय समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है। यहां यादव, कोइरी, भूमिहार और ब्राह्मण समुदाय के मतदाताओं का प्रभाव प्रमुख रूप से देखा जाता है। वर्ष 2020 के चुनाव में आरजेडी ने इस सीट पर जीत हासिल की थी, हालांकि एनडीए ने कड़ी टक्कर दी थी। स्थानीय स्तर पर लोगों की प्रमुख परेशानियों में सिंचाई की कमी, जर्जर सड़कों की स्थिति और युवाओं का लगातार पलायन शामिल है। औद्योगिक विकास लगभग न के बराबर है, जिसके कारण बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार की तलाश में बाहर जाना पड़ता है।
यदि आरजेडी यादव-कोइरी समीकरण को मजबूत बनाए रखने में सफल होती है, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है। दूसरी ओर, भाजपा और जदयू अपने पारंपरिक ब्राह्मण-भूमिहार मतदाताओं को एकजुट रखने की रणनीति में जुटी हैं। जन सुराज की बढ़ती गतिविधियां भी इस क्षेत्र की राजनीति में नई चर्चा का विषय बनी हुई हैं। उजियारपुर सीट की सबसे खास बात यह है कि यहां के मतदाता विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाते हैं। दलसिंहसराय अनुमंडल के अंतर्गत आने वाला यह क्षेत्र मिथिला की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है, लेकिन राजनीतिक समीकरणों की दृष्टि से यह हमेशा से एक रहस्यपूर्ण पहेली रहा है, जहां स्थानीय मुद्दे और राष्ट्रीय राजनीति अक्सर आमने-सामने आ खड़े होते हैं।
उजियारपुर विधानसभा क्षेत्र का गठन कब हुआ था?
उजियारपुर विधानसभा क्षेत्र का गठन 2008 में हुए परिसीमन के बाद हुआ था, जिससे यह अपेक्षाकृत नई सीटों में गिनी जाती है। हालांकि नई होने के बावजूद, यहां की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने शुरू से ही मजबूत पकड़ बनाए रखी है। पिछले तीनों विधानसभा चुनावों में मतदाताओं ने लगातार राजद पर अपना विश्वास जताया है। इस सीट पर हुए पहले चुनाव में राजद उम्मीदवार दुर्गा प्रसाद सिंह विजयी रहे थे। उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रत्याशी राम लखन महतो को मात दी थी।
आलोक कुमार मेहता ने रखी अपनी जीत बरकरार
इसके बाद आलोक कुमार मेहता ने क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में भी आलोक कुमार मेहता ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी जीत बरकरार रखी। इस बार उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार शील कुमार रॉय को बड़े अंतर से हराया। उस चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा ने मायावती और असदुद्दीन ओवैसी के साथ गठबंधन बनाकर प्रशांत पंकज को मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें बेहद कम समर्थन मिला और वे प्रभाव नहीं छोड़ सके। यह लगातार तीसरा अवसर था जब उजीयारपुर की जनता ने राजद को अपना जनादेश सौंपा।
क्या है उजियारपुर विधानसभा का समीकरण?
उजियारपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति पर जातीय समीकरणों का गहरा प्रभाव देखा जाता है। उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र में यादव और कुशवाहा समुदाय के मतदाता बड़ी संख्या में हैं, जबकि विधानसभा क्षेत्र में इनके साथ ब्राह्मण और राजपूत मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यहां शहरी मतदाताओं की हिस्सेदारी मात्र 5.34 प्रतिशत है। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में कुल 2,99,159 मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें अनुसूचित जाति (एससी) की हिस्सेदारी 19.23 प्रतिशत और मुस्लिम मतदाताओं की लगभग 10 प्रतिशत थी। इस क्षेत्र की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां के मतदाता विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का समर्थन करते हैं, जबकि लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को प्राथमिकता देते हैं।
2014 से लेकर 2024 तक के चुनाव का हाल
उजियारपुर विधानसभा क्षेत्र, उजीयारपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। 2024 के आम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी नित्यानंद राय ने राजद के आलोक कुमार मेहता को बड़े अंतर से पराजित कर संसद में जगह बनाई। 2014 से लेकर 2024 तक के सभी लोकसभा चुनावों में यहां की जनता ने लगातार भाजपा पर भरोसा जताया है। भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र दलसिंहसराय अनुमंडल मुख्यालय से लगभग 14 किलोमीटर, समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर और राज्य की राजधानी पटना से लगभग 95 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां के अधिकांश लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं, जबकि हथकरघा जैसे छोटे पैमाने के उद्योग भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं।
किस फेज में होगा उजियारपुर विधानसभा पर मतदान?
उजियारपुर विधानसभा क्षेत्र में उजीयारपुर प्रखंड के अलावा दलसिंहसराय प्रखंड की 10 ग्राम पंचायतें और दलसिंहसराय नगर परिषद क्षेत्र शामिल हैं। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और पिछले रुझानों को देखते हुए माना जा रहा है कि यदि कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव नहीं होता, तो 2025 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) इस सीट पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए रख सकती है, क्योंकि पार्टी यहां लगातार जीत दर्ज करती रही है। हालांकि, भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन भी इस बार कड़ा मुकाबला देने की तैयारी में है। इसके साथ ही, बिहार की नई राजनीतिक पार्टी जन सुराज ने भी उजीयारपुर से अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को और रोचक बना दिया है। जन सुराज ने इस सीट से दुर्गा प्रसाद सिंह को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में संभावना है कि इस बार मुकाबला मुख्य रूप से राजद, जदयू और जन सुराज के बीच त्रिकोणीय हो सकता है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 दो चरणों में संपन्न होंगे। पहले चरण की मतदान तिथि 6 नवंबर तय की गई है, जबकि दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा। दोनों चरणों के मतगणना परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
