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Rupauli Assembly Seat: बीमा भारती और निर्दलीय उम्मीदवार शंकर सिंह में कांटे की टक्कर! क्या है इस बार चुनावी समीकरण?

Bihar Election 2025: रूपौली विधानसभा सीट पर 2025 में मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है। राजद से बीमा भारती दोबारा मैदान में हैं, जबकि जदयू के कलाधर प्रसाद मंडल और निर्दलीय शंकर सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं। बाढ़, सड़क और रोजगार यहां के प्रमुख मुद्दे हैं। इस बार मतदाता जाति नहीं, बल्कि विकास और कामकाज को तरजीह देते दिख रहे हैं।

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पढ़ें रूपौली विधानसभा सीट की क्या है राजनीतक समीकरण।(फोटो सोर्स: टाइम्स नाउ डिजिटल)

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Bihar Election 2025: रूपौली विधानसभा सीट पूर्णिया जिले में आती है और यह सामान्य श्रेणी की सीट है। यहां मंडल समाज (यादव, कुर्मी, कोइरी आदि) की आबादी करीब 25 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम वोटरों की संख्या भी अच्छी-खासी है। ब्राह्मण, बनिया और दलित वोटर भी इस इलाके में असर रखते हैं। यही वजह है कि यहां हर चुनाव जातीय जोड़-घटाव के साथ-साथ स्थानीय नेता की पकड़ पर भी निर्भर करता है।

क्या है इस सीट पर राजनीतिक समीकरण?

रूपौली सीट पर बीमा भारती का नाम लंबे समय से जुड़ा रहा है। 2010 से लेकर 2020 तक उन्होंने लगातार तीन बार जीत दर्ज की और इलाके में मजबूत पकड़ बनाई। लेकिन 2024 के उपचुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार शंकर सिंह ने बीमा भारती को हराकर सबको चौंका दिया। इस जीत ने स्थानीय राजनीति का पूरा संतुलन हिला दिया और अब 2025 का चुनाव एक बार फिर रोमांचक होने जा रहा है।

इस बार के उम्मीदवार और मुकाबला

2025 में राजद ने बीमा भारती पर दोबारा भरोसा जताया है। वे इस बार अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए पूरी ताकत से मैदान में हैं। जदयू ने कलाधर प्रसाद मंडल को उतारा है, जो इलाके में अपनी साफ छवि और संगठन से जुड़े कामों के लिए जाने जाते हैं। इस बार भी शंकर सिंह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

विकास और स्थानीय मुद्दे

रूपौली में हर साल बाढ़ और सड़क की खराब हालत लोगों के लिए बड़ी समस्या है। पलायन, बेरोजगारी और शिक्षा जैसे मुद्दे भी इस बार चुनावी बहस के केंद्र में हैं। राजद बीमा भारती के पुराने कामों और महिला सशक्तिकरण की बात कर रही है, जबकि जदयू अपनी ‘विकास की राजनीति’ और मुख्यमंत्री की योजनाओं को आगे रख रही है। मतदाता अब नेता से सिर्फ वादे नहीं, काम की उम्मीद कर रहे हैं।

बीमा भारती के लिए यह चुनाव साख बचाने का है, वहीं जदयू और शंकर सिंह जैसे उम्मीदवारों के लिए यह मौका है अपनी पकड़ और मजबूत करने का। मुकाबला इस बार त्रिकोणीय दिख रहा है। जातीय वोटों का बिखराव और मुस्लिम वोटों का झुकाव, दोनों ही नतीजे तय कर सकते हैं। रूपौली की लड़ाई इस बार सीधी नहीं है। बीमा भारती वापसी की कोशिश में हैं, लेकिन जदयू और निर्दलीय उम्मीदवारों की चुनौती कम नहीं। यहां की जनता अब जाति से ज्यादा विकास और भरोसे पर फैसला लेती दिख रही है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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