Masaurhi Assembly Election 2025: बिहार की राजधानी पटना के दक्षिण में बसा मसौढ़ी इतिहास और राजनीति दोनों ही दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। कभी इसे ‘तारेगना’ कहा जाता था, जिसका अर्थ है तारों की गणना करने का स्थान। माना जाता है कि छठी शताब्दी में महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट ने यहीं अपनी खगोल वेधशाला की स्थापना की थी। आज भी मसौढ़ी में स्थित मणिचक सूर्य मंदिर उस गौरवशाली अतीत की याद दिलाता है। हालांकि समय के साथ यह इलाका तारों की गणना से आगे बढ़कर अब वोटों की गिनती और राजनीतिक समीकरणों के लिए प्रसिद्ध हो चुका है।
बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से एक मसौढ़ी विधानसभा क्षेत्र पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और पटना जिले का एक अहम उप-मंडल माना जाता है। इस सीट पर 6 नवंबर को मतदान और 14 नवंबर 2025 को मतगणना निर्धारित है। पिछले दस वर्षों में इस क्षेत्र पर राजद (RJD) का मजबूत वर्चस्व बना हुआ है। यह सीट अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए आरक्षित है और वर्तमान में रेखा देवी यहां से लगातार दूसरी बार विधायक हैं। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में मसौढ़ी ने एकतरफा परिणाम दिया था जहां राजद की रेखा देवी ने जदयू की नूतन पासवान को बड़े अंतर से पराजित किया। उस चुनाव में रेखा देवी को कुल 98,696 मत प्राप्त हुए थे, जिससे उनकी जीत बेहद निर्णायक रही थी।
स्विंग सीट से प्रसिद्ध है मसौढ़ी
कभी ‘स्विंग सीट’ के रूप में जानी जाने वाली मसौढ़ी विधानसभा सीट का राजनीतिक स्वरूप 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद पूरी तरह बदल गया, जब इसे अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित कर दिया गया। इसके बाद से यह इलाका मुख्यतः राजद और जदयू के बीच सीधी टक्कर का मैदान बन गया। राजद की लगातार बढ़त के पीछे यहां के यादव और दलित मतदाताओं का मजबूत गठजोड़ अहम भूमिका निभाता रहा है। हालांकि राजनीतिक रूप से मसौढ़ी को एक सशक्त गढ़ माना जाता है, लेकिन स्थानीय समस्याओं की जमीनी हकीकत अब भी गंभीर है। मसौढ़ी मुख्य रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र है, परंतु यहां के लोगों को स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी झेलनी पड़ रही है। इलाके में कुछ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तो हैं, लेकिन बड़े अस्पताल या विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं। इसी तरह, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए पटना या अन्य शहरों की ओर भेजने को मजबूर हैं।
मसौढ़ी क्षेत्र की कुल जनसंख्या
मसौढ़ी अनुमंडल दो विकासखंडों मसौढ़ी और धनरुआ से मिलकर बना है। यह इलाका प्राचीन पुनपुन नदी के तट पर बसा है, जबकि इसके आसपास दरधा और मोरहर नदियां भी बहती हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, मसौढ़ी अनुमंडल की कुल जनसंख्या 2,41,216 थी। उस समय यहां की साक्षरता दर 53.04% और लिंगानुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर 916 महिलाएं दर्ज किया गया था। पटना से नज़दीकी होने के कारण इस क्षेत्र में शहरीकरण और आबादी दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं। राजनीतिक रूप से मसौढ़ी का सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1957 में सीट के गठन के बाद यहां का प्रतिनिधित्व कई दलों के हाथों में गया कभी कांग्रेस, तो कभी सीपीआई और जनता दल ने यहां जीत दर्ज की। आरक्षण लागू होने से पहले कांग्रेस तीन बार, जबकि सीपीआई और जेडीयू दो-दो बार विजयी रही थीं। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद से राजद ने इस क्षेत्र में अपना प्रभाव लगातार मजबूत करते हुए यहां की राजनीति में गहरी जड़ें जमा ली हैं।
(इनपुट - आईएएनएस)
