Bachhwara Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव समय के साथ और भी रोचक मोड़ पर पहुंच चुके हैं। इस बार चुनाव में एनडीए गठबंधन की एकता लगातार मजबूत दिखी, जबकि महागठबंधन में विभाजन की झलक साफ नजर आई। यह स्थिति उस समय स्पष्ट हो गई जब लंबे समय तक सीटों के बंटवारे का मसला सुलझ नहीं पाया। टिकट वितरण में जारी खींचतान ने भी संकेत दे दिया कि महागठबंधन इस बार पूरी तरह एकजुट नहीं रह पाएगा। सबसे पहले इसका असर बिहार के बेगूसराय जिले में देखा गया, जहां बछवाड़ा सीट पर कांग्रेस और सीपीआई के प्रत्याशी सीधे आमने-सामने आ गए। इसके बाद अन्य सीटों पर भी महागठबंधन के भीतर फ्रेंडली फाइट का सिलसिला शुरू हो गया।
कब होगी बछवाड़ा विधानसभा के लिए वोटिंग?
जानकारी के मुताबिक, इस बार महागठबंधन कुल 13 सीटों पर अपने ही गठबंधन के उम्मीदवारों के बीच चुनाव लड़ रही है। खास बात यह है कि यह विवाद बछवाड़ा सीट से शुरू हुआ और इसे पूरे देश में सुर्खियों में ला दिया। कुल मिलाकर, महागठबंधन इस बार बिहार की 255 सीटों पर अपना भाग्य आजमा रही है। यहां पर फेज 1 में वोटिंग 6 नवंबर को होगी, जिसकी मतगणना 14 नवंबर को होगी। बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,10,463 वोटर हैं। जातीय वितरण के अनुसार, भूमिहार 12%, ब्राह्मण 3.5%, राजपूत 3.5%, ओबीसी 56%, दलित 14%, मुस्लिम 9% और अन्य समुदाय 2% हैं। ओबीसी समुदाय में यादव 15%, कुर्मी 5% और मांझी 2% वोटर हैं।
बछवाड़ा सीट का चुनावी इतिहास
बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास बेहद रोचक रहा है। यह क्षेत्र अब तक किसी एक राजनीतिक दल का स्थायी गढ़ नहीं बन पाया है। आजादी के बाद 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव से ही यहां विधायक चुनने की प्रक्रिया शुरू हुई। पिछले कई दशकों पर नजर डालें तो इस सीट पर किसी भी पार्टी को लगातार दो बार जीत हासिल नहीं हुई है। यह विधानसभा क्षेत्र 24-बेगूसराय लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है और इसमें चेरिया बरियारपुर, बछवाड़ा, तेघरा, मटिहानी, साहबपुर कमल, बेगूसराय और बखरी (एससी) जैसे सात विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। अब तक बछवाड़ा सीट पर कुल 17 चुनाव हुए हैं, जिनमें लगभग 60 साल तक कांग्रेस और सीपीआई का कब्जा रहा।
1952 से 2020 तक के विधायकों की सूची
| 1952 | मिट्ठन चौधरी | कांग्रेस |
| 1957 | राम बहादुर शर्मा | प्रजा सोशलिस्ट पार्टी |
| 1962 | गिरीश कुमारी | कांग्रेस |
| 1967 | राम बहादुर शर्मा | संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी |
| 1969 | भुवनेश्वर राय | कांग्रेस |
| 1972 | रामदेव राय | कांग्रेस |
| 1977 | रामदेव राय | कांग्रेस |
| 1980 | रामदेव राय | कांग्रेस |
| 1985 | अयोध्या प्रसाद महतो | सीपीआई |
| 1990 | अवधेश राय | सीपीआई |
| 1995 | अवधेश राय | सीपीआई |
| 2000 | उत्तम यादव | राजद |
| 2005 (फरवरी) | रामदेव राय | निर्दलीय |
| 2005 (अक्टूबर) | रामदेव राय | कांग्रेस |
| 2010 | अवधेश राय | सीपीआई |
| 2015 | रामदेव राय | कांग्रेस |
| 2020 | सुरेंद्र कुमार मेहता | भाजपा |
कांग्रेस ने 8 बार दर्ज की जीत
कांग्रेस ने यहां 8 बार जीत दर्ज की, जबकि सीपीआई ने 4 बार सफलता पाई। खास बात यह है कि दोनों ही दलों से केवल दो नेता ही लंबे समय तक विधायक बने। कांग्रेस से रामदेव राय और सीपीआई से अवधेश राय ने इस सीट पर लगातार अपनी पकड़ बनाई। दोनों ही नेता यादव जाति से आते हैं। शुरुआती चुनावों में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने एक-एक बार जीत दर्ज की थी। इसके अलावा, रामदेव राय ने एक बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी विजय हासिल की। राष्ट्रीय जनता दल और भारतीय जनता पार्टी ने भी इस सीट पर एक-एक बार जीत दर्ज की है।
3 सीटों पर कांग्रेस और सीपीआई आमने-सामने
महागठबंधन के उम्मीदवार और सीपीआई के जिला मंत्री अवधेश राय ने कहा कि महागठबंधन में कांग्रेस हठधर्मिता दिखा रही है। उनका कहना है कि बछवाड़ा सीट पर वह महागठबंधन के असली उम्मीदवार हैं और उन्हें राजद, वामदलों और वीआईपी का समर्थन प्राप्त है। जबकि कांग्रेस का उम्मीदवार पिछली बार भी निर्दलीय के रूप में चुनाव में उतरा था, इस बार महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है और वे मानते हैं कि बिहार में तेजस्वी यादव की सरकार दो-तिहाई से अधिक सीटें जीतकर बनेगी। अवधेश राय ने बताया कि बछवाड़ा में कांग्रेस उनके खिलाफ चुनाव लड़ रही है। जब उनसे बेगूसराय में कांग्रेस उम्मीदवार पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सातों सीटों पर महागठबंधन उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करना है। लेकिन यदि बछवाड़ा में कांग्रेस अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ती है, तो इसका परिणाम वहां की जनता तय करेगी। सीपीआई इस बार बिहार में कुल 9 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिनमें 3 सीटों पर कांग्रेस और सीपीआई आमने-सामने हैं। अवधेश राय ने यह भी कहा कि बछवाड़ा में उन्होंने पहले विधायक रहते हुए कई विकास कार्य किए थे। उनका मुख्य एजेंडा शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन रोकना है, जो तेजस्वी यादव के लक्ष्य के साथ मेल खाता है। उन्होंने कांग्रेस के कुछ नेताओं से अपील की कि इस मामले को बैठकर हल किया जाए, नहीं तो इसका असर अन्य जगहों पर भी पड़ सकता है।
महागठबंधन के असली उम्मीदवार
कांग्रेस के उम्मीदवार शिव प्रकाश गरीबदास का कहना है कि बछवाड़ा सीट पर महागठबंधन के असली उम्मीदवार वही हैं और उन्हें राजद समेत अन्य घटक दलों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने बताया कि तेजस्वी यादव ने भी उनका समर्थन किया है। उनका आरोप है कि सीपीआई के उम्मीदवार बीजेपी की ‘बी टीम’ की तरह काम कर रहे हैं और लोकसभा, विधानसभा या जिला परिषद के हर चुनाव में भाग लेते हैं। गरीबदास के अनुसार, पिछले सात चुनावों में सीपीआई उम्मीदवार केवल एक बार ही जीत हासिल कर पाए हैं। शिव प्रकाश गरीबदास ने कहा कि बिहार में तेजस्वी यादव अपने चाचा नीतीश से परेशान हैं, वहीं बछवाड़ा में भी उन्हें अपने चाचा से ही संघर्ष करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अवधेश राय हमेशा बीजेपी की मदद करने वाले रूप में काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बछवाड़ा में उनके पिता के समय काफी विकास हुआ था, लेकिन पिछले कुछ सालों में बीजेपी के विधायक होने के बावजूद काम नहीं हुआ। उनका फोकस युवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर है। गरीबदास ने यह भी बताया कि कांग्रेस इस बार तीन जगहों पर अपने उम्मीदवार उतार रही है, जो महागठबंधन की नीति के विपरीत है, लेकिन बछवाड़ा की जनता ने तय कर लिया है कि इस बार उन्हें विजयी बनाएगी और वह जनता की आवाज बन चुके हैं।
