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Gaighat Chunav 2025: RJD सीट बचाने में रहेगी कामयाब? या NDA पलटेगी बाजी; क्या है गायघाट सीट का राजनीतिक समीकरण

Bihar Assembly Election 2025: मुजफ्फरपुर की गायघाट विधानसभा क्षेत्र में लगभग 3.20 लाख मतदाता हैं, जो जिले के किसी भी विधानसभा में सर्वाधिक हैं। गायघाट एक बार फिर बहुकोणीय मुकाबले के लिए तैयार है, जहां राजद सीट बरकरार रखने की कोशिश करेगा, वहीं भाजपा-जदयू-लोजपा गठबंधन इसे वापस पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाएगी। वहीं, आम आदमी पार्टी और जन सुराज पार्टी भी मुकाबले को रोचक बना सकते हैं। यहां कांटे की टक्कर के आसार हैं।

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गायघाट विधानसभा चुनाव तारीख

Gaighat Assembly Election 2025 Date: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखें नजदीक हैं, लिहाजा चुनाव प्रचार चरम पर है। 243 विधानसभा सीटों में एक मुजफ्फरपुर जिले की गायघाट विधानसभा सीट (सामान्य वर्ग) भी शामिल है, जिसके राजनीतिक समीकरण को समझने की कोशिश करेंगे। जानकारी के मुताबिक, इसी सीट की स्थापना साल 1967 में हुई थी और तब से अब तक यहां 14 बार चुनाव हो चुके हैं। यह सीट मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र का भी हिस्सा है। हालांकि, 2008 के परिसीमन के अनुसार, यह विधानसभा क्षेत्र गायघाट और बंदरा प्रखंडों के साथ-साथ कटरा प्रखंड के छह ग्राम पंचायतों को मिलाकर बना है। इस बार एनडीए ने अपना प्रत्याशी कोमल सिंह को बनाया है। वहीं, महागठबंधन की ओर से आरजेडी ने निरंजन राय को मुकाबले में दोबारा उतारा है। मुजफ्फरपुर जिले की 11 विधानसभा सीटों पर 2025 में चुनाव 6 नवंबर को होंगे. जबकि वोटों की गिनती 14 नवंबर को होगी।

गायघाट सीट में कितने वोटर

गायघाट सीट पूर्णतया ग्रामीण है, यहां शहरी मतदाता का कोई रोल नहीं है। साल 2020 के विधानसभा चुनावों में गायघाट विधानसभा में कुल 3,16,108 रजिस्टर्ड वोटर थे, जो 2024 के लोकसभा चुनावों में बढ़कर 3,30,371 हो गए। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2020 की वोटर लिस्ट में शामिल 3,550 मतदाता 2024 तक यहां से पलायन कर चुके थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में यहां 57.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। गायघाट क्षेत्र में अनुसूचित जाति (SC) के लगभग 51,842 मतदाता हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 16.4% हैं। हालांकि, मुस्लिम मतदाताओं की सटीक संख्या का पता नहीं है, लेकिन इनकी हिस्सेदारी 12 से 15 प्रतिशत के बीच मानी जा रही है। अगर जेंडर वाइज लिस्ट पर नजर डालें तो यहां पुरुष मतदाताओं की संख्या जहां 1.68 लाख है, वहीं महिला मतदाताओं की संख्या 1.51 लाख जो सर्वाधिक है। पिछले चुनाव में यहां महज 57.75 प्रतिशत मतदान हुआ था लेकिन यहां की 64.77 प्रतिशत महिलाओं ने मतदान किया था।

गायघाट की राजनीति सफर कैसा रहा

गायघाट की राजनीति में काफी दिलचस्प रही है। नीतीश्वर प्रसाद सिंह ने 1952, 1957, 1962, 1967, 1969 एवं 1972 में जीत हासिल की। वहीं, इसी सीट से महेश्वर प्रसाद यादव ने कई बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने 1990 में निर्दलीय, 1995 में जनता दल, फिर 2005 और 2015 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर विधायक बने। हालांकि, साल 2010 में भाजपा की वीणा देवी ने उन्हें हराया, लेकिन 2015 में यादव ने करीबी मुकाबले में उन्हें शिकस्त दी। 1980 के विधानसभा चुनाव में पहली बार जीतेंद्र प्रसाद सिंह ने जिले में भाजपा का खाता खोला था।

कैसा रहा पिछला चुनाव

2020 के चुनावों में राजद ने निरंजन राय को मैदान में उतारा, जिन्होंने जदयू के महेश्वर यादव को 7,566 वोटों से हराया था। इस चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) की कोमल सिंह ने 36,851 वोट हासिल किए, जिससे वोटों का बंटवारा हुआ और राजद को फायदा मिला। माना जा रहा है कि गायघाट उन 25 सीटों में से एक रही, जहां लोजपा के वोट काटने की रणनीति के चलते जदयू को हार का सामना करना पड़ा।

2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए के साथ लोजपा के दोबारा गठबंधन में लौटने के बाद, भाजपा के मुजफ्फरपुर लोकसभा प्रत्याशी ने गायघाट विधानसभा क्षेत्र में 50,291 वोटों की बढ़त हासिल की।

गायघाट, मुजफ्फरपुर जिले के उत्तर भाग में स्थित है, जिसकी सीमाएं औराई, कटरा और मीनापुर प्रखंडों से लगती हैं. यह इलाका गंडक और बागमती नदियों की वजह से समतल और उपजाऊ है. बंदरा प्रखंड के कुछ हिस्से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आते हैं. यहां का प्रमुख रेलवे स्टेशन गायघाट है, जो समस्तीपुर-मुजफ्फरपुर रेल मार्ग पर स्थित है. यह सड़क मार्ग से मुजफ्फरपुर (35 किमी), दरभंगा (55 किमी) और सीतामढ़ी (60 किमी) से जुड़ा हुआ है.

यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। क्षेत्र में मुख्यत: धान, गेहूं, मक्का और दालें बहुतायत मात्रा में उपजती हैं। बंदरा क्षेत्र में लीची और आम के बागान अधिक हैं। छोटे स्तर पर चावल मिलें और कृषि व्यापार केंद्र भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में सहयोग करते हैं। हालांकि, रोजगार का टोटा होने के कारण युवा अन्य शहरों में पलायन करते रहे हैं। गायघाट एक बार फिर बहुकोणीय मुकाबले के लिए तैयार है, जहां राजद सीट बरकरार रखने की कोशिश करेगा, वहीं भाजपा-जदयू-लोजपा गठबंधन इसे वापस पाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाएगी। वहीं, आम आदमी पार्टी और जन सुराज पार्टी भी मुकाबले को रोचक बना सकते हैं। यहां कांटे की टक्कर के आसार हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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