Alamnagar Vidhan Sabha Polling Date : मधेपुरा जिले की आलमनगर विधानसभा सीट चुनाव के लिए तैयार है। साल 1951 में स्थापित आलमनगर विधानसभा क्षेत्र अब तक 17 बार चुनाव हो चुके हैं। यहां के मतदाताओं ने कुछ चुनिंदा नेताओं पर लगातार भरोसा जताया है। आंकड़ों के मुताबिक, 1952 में पहले चुनाव में सोशलिस्ट पार्टी के तनुक लाल यादव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 1957 से 1972 तक कांग्रेस के यदुनंदन झा और विद्याकर कवि ने पांच बार इस सीट पर दबदबा कायम रखा, जिसमें यदुनंदन झा ने दो बार और विद्याकर कवि ने तीन बार जीत हासिल की। इस सीट पर पहले चरण में 6 नवंबर को मतदान होना और 14 नवंबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे। 2020 के चुनाव में जदयू के नरेंद्र नारायण यादव ने RJD के नबीन कुमार को 26 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। इस बार ई नवीन कुमार ने में RJD और VIP दोनों की तरफ से नामांकन दाखिल किया है। वहीं, NDA प्रत्याशी नरेंद्र नारायण यादव ने आठवीं बार नॉमिनेशन किया।
आलमनगर विधानसभा में कितने मतदाता हैं।
साल 2020 के विधानसभा चुनावों में आलमनगर में कुल 3,44,616 रजिस्टर्ड वोटर थे। इनमें लगभग 60,214 अनुसूचित जाति (17.47%) और 43,421 मुस्लिम मतदाता (12.60%) शामिल थे। 2024 के लोकसभा चुनाव तक यह संख्या बढ़कर 3,72,591 हो गई, हालांकि 2020 की सूची से 3,914 मतदाता पलायन कर चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, यहां यादव समुदाय के मतदाताओं की संख्या लगभग 1,03,200 है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 29.9% है। 2024 के लोकसभा चुनाव में जदयू के दिनेश चंद्र यादव ने आलमनगर विधानसभा क्षेत्र में राजद के कुमार चरणदीप पर 73,275 मतों की बढ़त बनाई, जो 2020 के विधानसभा चुनाव की तुलना में कहीं अधिक थी। इससे क्षेत्र में जदयू की पकड़ और मजबूत होती दिख रही है।
आलमनगर विधानसभा सीट चुनाव 2020
यहां के मतदाता साल 2020 के चुनाव में जदयू के नरेंद्र नारायण यादव को विधायक बनाया था। उन्होंने राजद के नबीन कुमार को 26 हजार से ज्यादा वोटों से करारी शिकस्त दी थी, जदयू प्रत्याशी को 102517 वोट मिले थे। नरेंद्र नारायण यादव 1995 से लगातार यहां से जीतते आ रहे हैं। उनसे पहले वीरेंद्र कुमार सिंह साल 1990 में राजद के टिकट पर विधायक चुने गए थे। तब से अब तक चुनाव में लगातार सातवीं बार जीत दर्ज की है। 2015 विधानसभा चुनाव में उन्होंने लोजपा के चंदन सिंह को लगभग 44 हजार वोटों से हराया था। नरेंद्र नारायण यादव का नाम साल 2014 में नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री पद की रेस में भी था, लेकिन आखिरी में नीतीश ने जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बना दिया था।
2015 के विधानसभा चुनाव में नरेंद्र नारायण यादव को 45.74 % वोट शेयर के साथ 87,962 वोट मिले थे। LJP उम्मीदवार चंदन सिंह को 44,086 वोट (22.93 %) मिले। नरेंद्र यादव ने चंदन सिंह को 43,876 वोटों के अंतर से परास्त किया था।
