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भबानीपुर में प्रतिष्ठा की जंग, ममता के गढ़ में सुवेंदु की हुंकार, सियासत को नया मोड़ देगा चुनाव नतीजा

Bhabanipur Seat: पश्चिम बंगाल के 2026 विधानसभा चुनाव में अगर कोई एक निर्वाचन क्षेत्र है जो गणितीय गणना से ऊपर उठकर विशुद्ध राजनीतिक प्रतीक बन गया है, तो वह दक्षिण कोलकाता की भबानीपुर सीट है।

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भबानीपुर में कौन पड़ेगा भारी? (AI Image)

Bhabanipur Prestige War: पश्चिम बंगाल में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित राजनीतिक गढ़ और भाजपा का सबसे चुनौतीपूर्ण चुनावी मैदान है भबानीपुर। इस सीट पर पूरे देश की नजरे हैं। यहा मुकाबला सबसे हाई प्रोफाइल रहा और भारी मतदान ने हर किसी के मन में उत्सुकता जगा दी है। मुख्यमंत्री ममता और उनके प्रतिद्वंद्वी सुवेंदु अधिकारी राज्य की सबसे तीखी सत्ता की लड़ाई में आमने-सामने हैं। 4 मई को जब नतीजा आएगा तो सियासत में एक नया मोड़ भी आ सकता है। अगर ममता को मात मिली तो उनके करियर का अंत भी हो सकता है। बंगाल की सियासत में ये सबसे बड़ा मोड़ होगा।

विशुद्ध राजनीतिक प्रतीक बना भबानीपुर

पश्चिम बंगाल के 2026 विधानसभा चुनाव में अगर कोई एक निर्वाचन क्षेत्र है जो गणितीय गणना से ऊपर उठकर विशुद्ध राजनीतिक प्रतीक बन गया है, तो वह दक्षिण कोलकाता की भबानीपुर सीट है। यहां से तीन बार की विधायक ममता बनर्जी का सीधा मुकाबला विपक्ष के नेता और भाजपा के दिग्गज नेता अधिकारी से है, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर 2021 में नंदीग्राम में ममता को हराकर सनसनी फैला दी थी। पांच साल बाद, वैसा ही मुकाबला अब ममता बनर्जी के गढ़ में हो रहा है। टीएमसी के लिए भबानीपुर को बरकरार रखना मुख्यमंत्री के अपने ही गढ़ में उनके अधिकार की रक्षा करने जैसा है। भाजपा के लिए, इस सीट को पार करना बंगाल की सबसे शक्तिशाली नेता के इर्द-गिर्द मंडरा रहे अजेय भाव को भंग करने और नंदीग्राम को एक बड़े राजनीतिक परिदृश्य में बदलने जैसा होगा।

सभी चुनावी लड़ाइयों की जननी भबानीपुर

यही कारण है कि विभिन्न दलों के नेताओं ने इसे सभी चुनावी लड़ाइयों की जननी बताया है। इस बार भबानीपुर में 90 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई है। यह 2021 के विधानसभा चुनाव में लगभग 61 प्रतिशत और 2021 के उपचुनाव में हुए 57 प्रतिशत मतदान से भी कहीं अधिक था, जिसके माध्यम से ममता बनर्जी नंदीग्राम में अपनी हार के बाद विधानसभा में वापस लौटी थीं। मतदान में इस बढ़ोतरी ने कई कयासों को जन्म दिया है। टीएमसी ने इसे अपनी मजबूत संगठनात्मक पकड़ और ममता बनर्जी की इस निर्वाचन क्षेत्र पर अटूट पकड़ का प्रमाण माना। भाजपा ने इसे सत्ताधारी दल के खिलाफ मौन आक्रोश और विभिन्न समुदायों में टीएमसी विरोधी वोटों के एकीकरण के रूप में देखा।

कहलाता है मिनी इंडिया

भबानीपुर की सियासी जंग यहां की अनोखी राजनीतिक भौगोलिक स्थिति को दर्शाती है। कोलकाता नगर निगम के आठ वार्डों में फैला यह क्षेत्र अक्सर “मिनी इंडिया” कहलाता है, जहां बंगाली भद्रलोक मोहल्ले गुजराती व्यापारियों, मारवाड़ी और जैन व्यवसायियों, पंजाबी और सिख परिवारों, बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाताओं और बिहार, ओडिशा और झारखंड से आए प्रवासियों के साथ रहते हैं। लगभग 42 प्रतिशत मतदाता बंगाली हिंदू, 34 प्रतिशत गैर-बंगाली हिंदू और लगभग 24 प्रतिशत मुस्लिम हैं।

बीजेपी महीनों से बूथ-दर-बूथ क्षेत्र का नक्शा बना रही है, ताकि जातिगत समीकरण, हिंदू एकजुटता और विशुद्ध प्रतीकात्मकता के बल पर भाबानीपुर को बनर्जी के गढ़ में एक और नंदीग्राम बना सके।

टीएमसी का नारा, घर की बेटी ममता

दूसरी ओर, टीएमसी ने "घोरर मेये" (घर की बेटी) के भावनात्मक नारे को पुनर्जीवित किया है, और ममता बनर्जी को न सिर्फ मुख्यमंत्री के रूप में, बल्कि पड़ोस की अपनी दीदी के रूप में पेश किया, जिनका कालीघाट निवास इसी निर्वाचन क्षेत्र में स्थित है। मतदान सूचियों के एसआईआर के बाद मुकाबला और भी तीखा हो गया, जिससे मतदाताओं की संख्या घटकर लगभग 1.55 लाख रह गई, जिसमें 51,000 से अधिक नाम हटा दिए गए।

सियासत को नया मोड़ देगा चुनाव नतीजा

भाबानीपुर अब बीजेपी का सबसे महत्वाकांक्षी युद्धक्षेत्र है, जहां सत्ता की रक्षा की जा रही है और महत्वाकांक्षा अपनी सबसे बड़ी जीत हासिल करना चाहती है। यह किला कायम रहेगा या चुनौती देने वाला इसे तोड़ देगा, इसका पता 4 मई को चलेगा, जब मतपत्र यह तय करेंगे कि भाबानीपुर दीदी का गढ़ बना रहेगा या अधिकारी का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक बयान बन जाएगा। बहरहाल, इस बार हो रही भबानीपुर की सियासी जंग कई मायनों में अलग है। अगर ममता को हार मिली तो यह उनके सियासी सफर का अंत साबित हो सकता है। वहीं, सुवेंदु की जीत उन्हें बंगाल और बीजेपी का नया हीरो बना देगी। वह बंगाल में बीजेपी के सबसे मजबूत नेता बन जाएंगे। अगर वह हार भी गए तो एक पहचान बना जाएंगे। एक ऐसा नेता जिसने नंदीग्रम ममता को पटखनी और भबानीपुर में भी खुलकर मोर्चा लिया।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडल author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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