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Delhi Chunav 2025: मतदान के दिन बंद रहेंगे दिल्ली के बाजार, जान लीजिए कहां-कहां रहेगी छुट्टी

Delhi Assembly Election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए वोटिंग वाले दिन राजधानी में क्या-क्या बंद रहेगा, कहां-कहां छुट्टी रहेगी? इस सवाल का जवाब सामने आ चुका है। जानकारी के अनुसार पांच फरवरी को मतदान के दिन दिल्ली के बाजार बंद रहेंगे। आपको इस रिपोर्ट में सबकुछ बताते हैं।

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मतदान वाले दिन दिल्ली में क्या-क्या बंद रहेगा?

Delhi Election 2025: चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव मतदान के दिन पांच फरवरी को राष्ट्रीय राजधानी में सभी 700 बाजार बंद रहेंगे। सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि व्यापारियों को चुनाव आयोग और श्रम विभाग के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए।

मतदान करने के बाद शाम को खोल सकते हैं अपनी दुकानें

उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में खुदरा क्षेत्र के दुकानदार मतदान करने के बाद शाम को अपनी दुकानें खोल सकते हैं। हालांकि, गोयल ने कहा कि यदि कोई दुकान या कारखाना खोला जाता है तो कर्मचारियों को सवेतन अवकाश दिया जाना चाहिए और वेतन में कोई कटौती नहीं की जानी चाहिए। दिल्ली विधानसभा की सभी 70 सीट के लिए पांच फरवरी को मतदान होगा और मतगणना आठ फरवरी को होगी।

कर्मचारियों को बिना किसी वेतन कटौती के छुट्टी देनी होगी

एक बयान में सीटीआई ने सभी बाजार संघों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पांच फरवरी को अपनी दुकानें बंद रखने का निर्देश दिया। औद्योगिक क्षेत्रों में भी अवकाश रहेगा। सीटीआई महासचिव गुरमीत अरोड़ा ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली सरकार ने पहले ही निर्देश जारी कर दिया है कि दुकानों, होटल, रेस्तरां, रिसॉर्ट और औद्योगिक इकाइयों सहित सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मतदान के दिन कर्मचारियों को बिना किसी वेतन कटौती के छुट्टी देनी होगी।

श्रम विभाग ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135बी के तहत एक आदेश भी जारी किया है, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी पेशे, व्यापार या औद्योगिक उपक्रम में लगे प्रत्येक कर्मचारी को मतदान के लिए अवकाश का अधिकार है। इसके अतिरिक्त आपातकालीन सेवा कर्मचारियों को मतदान के बाद काम पर आने की सलाह दी गई है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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