West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले सियासी हलचल बढ़ गई है। 'आम जनता उन्नयन पार्टी' (AJUP) के चेयरपर्सन हुमायूं कबीर के कथित स्टिंग वीडियो ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को बैकफुट पर धकेल दिया है। सूत्रों के मुताबिक, ओवैसी को आज बहरामपुर पहुंचना था और कल हुमायूं कबीर के साथ एक बड़ी साझा जनसभा होनी थी, लेकिन कबीर की भाजपा नेताओं के साथ कथित नजदीकियों और 1000 करोड़ की डील की खबरों ने गठबंधन की नींव हिला दी।
देर रात हुआ गठबंधन तोड़ने का फैसला
विवादास्पद कथित स्टिंग वीडियो सामने आने के बाद AIMIM के गलियारों में हड़कंप मच गया। सूत्रों की मानें तो कल देर रात तक पार्टी के बंगाल ऑब्जर्वर और प्रदेश अध्यक्ष इमरान सोलंकी के साथ असदुद्दीन ओवैसी की लंबी चर्चा हुई। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि हुमायूं कबीर की भाजपा के साथ जुड़ी 'छवि' का खामियाजा AIMIM को भविष्य में भुगतना पड़ सकता है। अपनी साख बचाने के लिए पार्टी ने कबीर के साथ गठबंधन खत्म करने का सख्त फैसला लिया।
पार्टी ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि वे मुसलमानों की एकजुटता और ईमानदारी पर सवाल उठाने वाले किसी भी कृत्य का समर्थन नहीं करते। अब AIMIM बंगाल की सभी सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
क्या बोले हुमायूं कबीर
गठबंधन टूटने और आरोपों की बौछार के बीच हुमायूं कबीर ने आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वीडियो में कही गई बातें उनकी नहीं हैं। AIMIM ने गठबंधन क्यों तोड़ा ये उनसे पूछिए। कबीर ने चुनौती देते हुए कहा, "अगर मैंने ऐसा कुछ कहा है तो कोई सामने आए और सबूत दिखाए। मैं अपनी जाति और समाज के लिए हमेशा से काम करता आया हूं और करता रहूंगा।" उन्होंने खुद को एक फकीर के तौर पर पेश करते हुए कहा कि वे खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाएंगे, लेकिन झुकेंगे नहीं।
क्या ओवैसी आएंगे बंगाल?
दौरा रद्द होने के बावजूद बंगाल के मैदान से AIMIM पूरी तरह बाहर नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि असदुद्दीन ओवैसी आने वाले दिनों में बंगाल जरूर आएंगे, लेकिन अब उनकी प्राथमिकता केवल अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करना होगा। वे रघुनाथगंज में पार्टी उम्मीदवार इमरान सोलंकी के पक्ष में रैली कर सकते हैं, हालांकि इसकी नई तारीख अभी तय नहीं हुई है।
सियासी मायने: किसे होगा फायदा?
23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले इस बिखराव ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को हमलावर होने का मौका दे दिया है। 118 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा करने वाली कबीर की पार्टी अब बिना ओवैसी के समर्थन के मैदान में है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि बाबरी मस्जिद की नींव रखने का दावा कर चर्चा बटोरने वाले कबीर अपनी जमीन बचा पाते हैं या यह विवाद उनकी राजनीतिक पारी के लिए अंत साबित होगा।
