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'एक ध्वज, एक संविधान के तहत पहली बार होगा चुनाव...' जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस पर गरजे अमित शाह

Amit Shah in Jammu Rally: अमित शाह ने कहा, कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस मिलकर यहां फिर से अलग झंडा लाने वाले हैं, वे 370 फिर से लाना चाहते हैं। 370 हटने से जम्मू-कश्मीर की माताओं-बहनों को अधिकार मिला है। कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ये अधिकार छीनना चाहती थी। पत्थरबाजों को जेल से छोड़ना चाहती है और उनका मकसद फिर से आतकंवाद फैलाने का है।

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जम्मू में चुनावी जनसभा को संबोधित करते अमित शाह।

Photo : Twitter

Amit Shah in Jammu Rally: जम्मू-कश्मीर में होने वाले विधानसाभा चुनाव के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को भाजपा के चुनावी अभियान की शुरुआत की। जम्मू में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, यह संयोग ही है कि भाजपा की पहली चुनावी रैली गणेश चतुर्थी के दिन शुरू हो रही है। मैं सभी देशवासियों को गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं देता हूं। उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर के चुनाव महत्वपूण हैं, क्योंकि देश की आजादी के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर के मतदाता दो झंड नहीं, बल्कि तिरंगे के नीचे अपना वोट डालेंगे। पहली बार यहां एक संविधान, जिसको बाबा साहेब आंबडेकर ने बनाया, इसके नीचे वोटिंग होने जा रहा है।

अमित शाह ने कहा, जम्मू-कश्मीर में कभी प्रधानमंत्री नहीं बैठ सकता था। प्रधानमंत्री एक ही होता है, जिसे कश्मीर से कन्याकुमारी की जनता जिसे चुनकर भेजती है, वो हमारे प्रिय नेता नरेंद्र मोदी हैं। उन्होंने कहा, पहली बार यह चुनाव 370 की परछाई से बाहर निकल रहा है। इसका चमत्कार हमने लोकसभा चुनाव में देखा है। पहले यहां 10 प्रतिशत वोटिंग में खुशी मनाई जाती थी, आज बेरोकटोक मतदान के कारण 58 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग हुई, जो लोकतंत्र की सबसे बड़ी विजय है।

कांग्रेस ओर एनसी अलग झंडा लाने वाले हैं

अमित शाह ने कहा, कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस मिलकर यहां फिर से अलग झंडा लाने वाले हैं, वे 370 फिर से लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी, गुर्जर, बकरवाल, पहाड़ी और दलित भाईयों का आरक्षण छीनना चाहती है। राहुल गांधी कान खोलकर सुन लें मैं उनके रिजर्वेशन को हाथ नहीं लगाने दूंगा। उन्होंने कहा, 370 हटने से जम्मू-कश्मीर की माताओं-बहनों को अधिकार मिला है। कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ये अधिकार छीनना चाहती थी। कांग्रेस और एनसी पत्थरबाजी व आतंकवाद में लिप्त लोगों को जेल से छोड़ना चाहती है ताकि जम्मू, पुंछ, राजौरी जैसे क्षेत्र जहां शांति है, वहां फिर से आतंकवाद आए। क्या आप इन क्षत्रों में आतंकवाद को फिर से आने दोगे? शाह ने कहा, वो (कांग्रेस) कहते हैं कि हम फिर से एलओसी का ट्रेड शुरू करेंगे, पाकिस्तान से बात करेंगे। आज मैं कहकर जाता हूं जब तक शांति नहीं होगी, पाकिस्तान से कोई बात नहीं होगी।

क्या कांग्रेस दे सकती है स्टेट का दर्जा

अमित शाह ने कहा, नेशनल कांफ्रेंस व कांग्रेस पार्टी कहती है कि हम जम्मू कश्मीर को स्टेट का दर्जा देंगे। मैं अब्दुल्ला साहब और राहुल बाबा से पूछना चाहता हूं कि आप जम्मू कश्मीर को स्टेट का दर्जा कैसे वापस देंगे? जनता को मूर्ख बना रहे हो आप क्योंकि जम्मू कश्मीर को स्टेट का दर्जा तो सिर्फ भारत सरकार ही दे सकती है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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