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विपक्षी गठबंधन में सीट बंटवारे पर कब होगा फाइनल फैसला? अखिलेश यादव ने बता दिया वक्त

Lok Sabha Chunav: अखिलेश यादव ने दावा किया है कि सूर्य के उत्तरायण में आते ही सीटों के संबंध में विपक्षी गुट के सभी फैसले हो जाएंगे। विपक्षी गठबंधन INDIA खेमे में शामिल दलों की चार राउंड की बैठकें हो चुकी हैं, मगर अब तक सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा तक नहीं हुई।

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कब सेट होगा सीट शेयरिंग का फॉर्मूला?

Photo : Times Now Digital

Akhilesh Yadav On Opposition Alliance Seat Sharing: विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस (INDIA) में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला कब सेट होगा? इस सवाल का जवाब हर कोई जानना चाहता है। लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी खेमे का सबसे बड़ा सिरदर्द यही है। ऐसे में सभी पार्टियां अपनी-अपनी ताकत झोंकने में जुटी हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी बड़ा दावा किया है।

गठबंधन में सीट शेयरिंग पर कब बनेगी बात?

अखिलेश यादव ने कहा कि विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' में सीटों के बंटवारे पर सभी फैसले सूर्य के उत्तरायण में आते ही हो जाएंगे। जब मीडिया ने अखिलेश से इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस में सीट बंटवारे सहित अन्य फैसलों को लेकर सवाल पूछा तो उसके जवाब में उन्होंने कहा कि 'सपा अन्य दलों के साथ मिलकर बहुत जल्द फैसला ले लेगी। सूर्य को उत्तरायण में आने दो। सूर्य के उत्तरायण में आते ही सभी फैसले हो जायेंगे।' बता दें, मकर संक्रांति (14 जनवरी) से सूर्य उत्तरायण होते हैं।

सीट शेयरिंग पर विपक्षी दलों के बीच आपसी तकरार

साल 2024 आ चुका है, इसी साल देश में आम चुनाव होने हैं। विपक्षी पार्टियों का गठबंधन एकजुटता के तमाम दावे कर रहा है, मगर हकीकत किसी से नहीं छिपी है। कई दलों के बीच माथापच्ची का दौर जारी है। कांग्रेस बनाम टीएमसी, कांग्रेस बनाम सपा, कांग्रेस बनाम आप... ऐसे में विपक्षी गठबंधन INDIA कितनी एकजुट है, समझाने और बताने की जरूरत नहीं है। लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी जोरों पर है, मगर सीट शेयरिंग को लेकर सभी पार्टियां आपस में उलझी हुई है। कई राज्यों में कांग्रेस के साथ उसकी सहयोगी पार्टियों से ठनी हुई है। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा शामिल है।

अखिलेश यादव को मायावती पर नहीं है भरोसा

सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने बसपा अध्यक्ष मायावती के ‘इंडिया’ गठबंधन में शामिल होने पर गठबंधन के मजबूत होने को लेकर पूछे जाने पर मायावती पर भरोसे के संकट की बात कही। यादव ने पलटकर पत्रकारों से सवाल किया कि 'उसके बाद का भरोसा आप दिलाएंगे। बाद का भरोसा आप में से कौन दिलायेगा।'

क्या पीएम बनना चाहते हैं अखिलेश यादव?

प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के सवाल पर यादव ने कहा 'कभी कभी कम (सीटों) वाले भी प्रधानमंत्री बनते हैं पर, हमारे लिए मुख्य यह है कि भाजपा हारे।' उन्होंने कहा, 'सवाल यह नहीं है कि कौन किस पद पर बैठेगा। यहां के प्रधानमंत्री (चंद्रशेखर) रहे हैं। आप इन बातों को समझते हो और परिस्थितियों को भी समझते हो...।' चंद्रशेखर 1990 में अपनी पार्टी के कम सांसदों के बावजूद कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने थे।

अखिलेश यादव ने राम मंदिर पर भाजपा को कोसा

राम मंदिर को लेकर चुनावी लाभ उठाने की चर्चा पर उन्होंने कहा, 'धर्म, राजनीति का हिस्सा नहीं हो सकता। भाजपा को आय दोगुनी (किसानों) हुई कि नहीं, युवाओं को रोजगार मिला कि नहीं, इन सवालों का जवाब देना पड़ेगा।' सपा प्रमुख ने कहा, 'भाजपा के पास इन सवालों का जवाब नहीं है, इसलिए वह धर्म के पीछे छिप जाती है।' राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'भाजपा के लोग कह रहे हैं कि जिसके पास निमंत्रण पत्र होगा, वही जायेगा। हमारा पक्ष ये है कि भगवान जब बुलाएंगे तो भाजपा भी नहीं रोक पाएगी।'

केंद्र की मोदी सरकार को अखिलेश ने दी ये नसीहत

अखिलेश यादव ने सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए सरकार को नसीहत दी कि जिस किसी भी सरकार ने जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया है, वह सत्ता से हमेशा बाहर हुए हैं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की न्याय यात्रा में शामिल होने को लेकर पूछे जाने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। यादव ने कहा, 'यात्रा हो अच्छी बात है, लेकिन सभी दल चाहते हैं कि यात्रा से पहले टिकट और सीटों का बंटवारा हो। जब सीट बंटवारा हो जायेगा तो बहुत से लोग अपने आप सहयोग करने निकल पड़ेंगे, क्योंकि जो प्रत्याशी चुनाव लड़ने वाला होगा पूरी जिम्मेदारी से दिखाई देगा।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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