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Agra Nagar Nigam, Mayor Election Result 2023: कौन हैं BSP की लता वाल्मीकि? जिन्‍होंने BJP को दी कड़ी टक्‍कर, 34 साल में कोई नहीं दे पाया शिकस्त

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 13, 2023, 02:52 PM IST

Agra Nagar Nigam, Mayor Election Chunav Result 2023: अभी तक सामने आए चुनावी रुझानों में डॉ. लता वाल्मीकि ने 22 हजार वोट की निर्णायक बढ़त बना ली है। वह वाल्मीकि समाज से आती हैं और पार्टी की एक सामान्य कार्यकर्ता हैं।

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लता वाल्मीकि

Photo : Twitter

Agra Nagar Nigam, Mayor Election Chunav Result 2023: उत्तर प्रदेश नगर निकाय चुनाव में सीएम योगी आदित्यनाथ का जलवा बरकरार है। अब तक सामने आए चुनावी रुझानों में 17 महापौर प्रत्याशियों में भाजपा ने 16 सीटों पर बढ़त हासिल कर ली है। हालांकि, आगरा मेयर की एकमात्र सीट ऐसी है, जहां भाजपा पीछे चल रही थी। हालांकि पहले यहां से बसपा प्रत्याशी डॉ. लता वाल्मीकि आगे चल रही थीं, लेकिन अब भाजपा की हेमलता दिवाकर ने बढ़त बना ली है। अभी तक सामने आए चुनावी रुझानों में हेमलता दिवाकर बसपा की लता वाल्मीकि से 10 हजार वोटों से आगे निकलते हुए दिख रही हैं। 11 वें राउंड की मतगणना के बाद ये परिणाम सामने आए हैं। बता दें कि अब तक भाजपा को कोई भी कड़ी टक्‍कर नहीं दे पाया है। ये पहली बार है जब बसपा प्रत्‍याशी ने भाजपा को टक्‍कर दी है। आइए जानते हैं बसपा प्रत्‍याशी डॉ. लता वाल्मीकि के बारे में...

पार्टी की सामान्य कार्यकर्ता

डॉ. लता वाल्मीकि आगरा के कालिंदी विहार की रहने वाली हैं। उन्होंने राजनीति शास्त्र से परास्नातक करने के बाद डॉक्टरेट की। बसपा प्रत्याशी लता वाल्मीकि के अशोक कुमार सिंचाई विभाग में एक्सईएन हैं। वह लंबे समय से बसपा से जुड़ी हुई हैं, और एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम कर रही हैं।

वाल्मीकि समाज से रखती हैं ताल्लुक

बसपा ने आगरा में मेयर प्रत्याशी घोषित करते समय सोशल इंजीनियरिंग का बखूबी ध्यान रखा। दरअसल, इस सीट पर वाल्मीकि समाज के एक लाख से अधिक वोटर्स हैं। ऐसे में भाजपा को इस वोटबैंक की गोलबंदी में फंसाते हुए बसपा ने वाल्मीकि समाज से आने वाली लता वाल्मीकि को टिकट दिया। बसपा की यह गोलबंदी भाजपा के लिए चुनौती बन गई।

1989 के बाद मिल सकता था गैर भाजपाई मेयर

साल 1989 में आगरा के नगर निगम बनने के बाद पहली बार बीजेपी (BJP) के रमेशकांत वालिया (Rameshkant Walia) मेयर बने थे। इसके बाद से यह सीट भाजपा के ही खाते में रही है। हालांकि, यहां गैर भाजपाई मेयर बनता दिख रहा था, लेकिन दोपहर में 11 वें राउंड की मतगणना के दौरान सभी समीकरण बदल गए। बता दें, 2012 के निकाय चुनाव में भाजपा ने वाल्मीकि समाज से आने वाले इंद्रजीत आर्य को मैदान में उतारा था। उन्होंने बसपा के करतार सिंह भारतीय को हराया था।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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