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Winter Solstice 2022: आज साल की सबसे लंबी रात, क्या होती है शीतकालीन संक्रांति?

  • Written by: प्रभाष रावत
  • Updated Dec 22, 2022, 07:52 PM IST

Winter Solstice 2022, Longest Night of the Year in India: साल का सबसे छोटा दिन 22 दिसंबर 2022 को होने वाला है यानी आज हम साल की सबसे लंबी रात मनाएंगे। अयनांत या संक्रांति क्या होती है? सबसे लंबे दिन और सबसे लंबी रात की घटना क्यों होती है? आइए जानते हैं इसके कारण और धरती पर इसके असर के बारे में।

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Winter Solstice 2022: आज साल की सबसे लंबी रात, क्या होती है शीतकालीन संक्रांति?

What is Winter Solstice: शीतकालीन संक्रांति साल का सबसे छोटा दिन होता है जोकि उत्तरी गोलार्ध में हर साल 21 या 22 दिसंबर को पड़ता है। इस साल शीतकालीन संक्रांति 22 दिसंबर 2022 को पड़ रही है। शीतकालीन संक्रांति इसलिए होती है क्योंकि पृथ्वी सूर्य के सापेक्ष लगभग 23.5 डिग्री के कोण पर झुकी हुई है। सूर्य सीधे मकर रेखा पर है। झुकाव का मतलब है कि उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध को पूरे साल अलग-अलग मात्रा में सूर्य का प्रकाश प्राप्त होता है क्योंकि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है। यही कारण है कि हमारे यहां चार ऋतुएं होती हैं।

भारत में कब है शीतकालीन संक्रांति?

भारत में 22 दिसंबर को दिन के उजाले के घंटे सबसे कम होंगे। दिन साल की सबसे लंबी रात होगी।

शीतकालीन संक्रांति क्या है?

उत्तरी गोलार्ध को साल के अंत में कम धूप मिलती है जबकि दक्षिणी गोलार्ध में इन महीनों के दौरान गर्मी का अनुभव होता है। इसका मतलब यह है कि 22 दिसंबर को दक्षिणी गोलार्ध में ग्रीष्म अयनांत या संक्रांति होगा क्योंकि दक्षिणी ध्रुव सूर्य की ओर झुका होगा और वहां पर ही अधिक धूप होगी।

शीतकालीन संक्रांति, सबसे छोटे दिन के समय, उत्तरी गोलार्ध में लगभग 22 दिसंबर और दक्षिणी गोलार्ध में 21 जून को सर्दियों की शुरुआत का प्रतीक है। 22 दिसंबर के बाद दिन बड़े और रातें छोटी होने लगेंगी।

विंटर सोलस्टाइस (शीतकालीन संक्रांति) का अर्थ:

शब्द 'सॉलिसिस' लैटिन वैज्ञानिक शब्द 'सोलस्टिटियम' से लिया गया है, जिसका मोटे तौर पर अर्थ है 'सूरज स्थिर है'। NASA के अनुसार, संक्रांति के समय, सूर्य का मार्ग सबसे दूर उत्तर या दक्षिण में दिखाई देता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप ग्रह के किस आधे हिस्से पर हैं। ग्रह का दक्षिणी गोलार्ध उस दिन ग्रीष्म संक्रांति का अनुभव करता है। 2022 शीतकालीन संक्रांति शाम 4:48 बजे से शुरू हो रही है।

संक्रांति साल में दो बार आती है। उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म संक्रांति जून में आती है, शीतकालीन संक्रांति को सूर्य द्वारा आकाश में अपनी दक्षिणी स्थिति में पहुंचने के रूप में पहचाना जाता है, चाहे आप पृथ्वी पर कहीं भी हों। नासा ने कहा, 'पूरे साल आकाश में सूर्य की बदलती ऊंचाई पृथ्वी के झुकाव के कारण होती है क्योंकि यह हमारे इसकी परिक्रमा करती है।'

प्रभाष रावत
प्रभाष रावतauthor

रक्षा और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक विषयों में विशेष रुचि रखने वाले प्रभाष रावत कुछ-ना-कुछ नया सीखते रहने में विश्वास करते हैं। बीते 5 साल से ज्यादा समय में पत्रकारिता की कई बीट पर काम करने का अनुभव। साथ ही संवाद और लेखन से खुद को व्यक्त करने के अलावा आध्यात्म भी इनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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