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Partition Horrors Remembrance Day: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस क्यों मनाया जाता है, जानें कब हुई इसकी शुरुआत

Partition Horrors Remembrance Day: 1947 में आजादी मिलने के साथ ही भारत का बंटवारा भी हुआ। यह बंटवारा लाखों लोगों के लिए दर्द और परेशानी लेकर आया। उसी दर्द को याद रखने और उससे सीख लेने के लिए हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाता है।

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Partition Horrors Remembrance Day (Photo Credit: Twitter)

Partition Horrors Remembrance Day: हमारे देश का इतिहास बहुत बड़ा और गौरवशाली है, लेकिन इसमें कुछ दुख भरे अध्याय भी हैं। 1947 में आजादी मिलने के साथ ही भारत का बंटवारा भी हुआ। यह बंटवारा लाखों लोगों के लिए दर्द और परेशानी लेकर आया। उसी दर्द को याद रखने और उससे सीख लेने के लिए हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाता है। विभाजन का दर्द कभी पूरी तरह नहीं मिट सकता लेकिन इसे याद रखना जरूरी है ताकि हम दोबारा वैसी गलती न करें। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें इंसानियत, भाईचारे और एकजुटता की अहमियत समझाता है।

भारत और पाकिस्तान का बंटवारा

1947 में भारत और पाकिस्तान दो अलग अलग देश बने। इस दौरान करोड़ों लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हुए। बहुत से लोग मारे गए, कितने परिवार बिखर गए और कई लोग हमेशा के लिए अपने गांव शहर छोड़कर चले गए। धर्म और जाति के नाम पर हिंसा इतनी बढ़ी कि इंसानियत घायल हो गई।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस

साल 2021 में भारत सरकार ने यह तय किया कि हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य विभाजन के समय लोगों ने जो दर्द और तकलीफ झेली, उसे याद रखना है। देश में एकता और भाईचारे का संदेश फैलाने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाना कि नफरत और हिंसा से केवल नुकसान होता है।

देश की असली ताकत

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर स्कूल और कॉलेजों में विभाजन और उससे जुड़ी बातें बताई जाती हैं। साथ ही पुराने फोटो, दस्तावेज और पीड़ितों की कहानियां दिखाई जाती हैं। इसके अलावा नाटक, कविता और गीतों के जरिए उस दौर की झलक पेश की जाती है। यह दिवस हमें सिखाता है कि हमें एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए। शांति, प्यार और एकता ही देश की असली ताकत है।

Ankita Pandey
अंकिता पाण्डेयauthor

अंकिता पाण्डेय टाइम्स नाऊ नवभारत डिजिटल में तीन साल से काम कर रही हैं। वह उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से ताल्लुक रखती हैं। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही फील्ड रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत हुई। फिर जनसत्ता के डिजिटल प्लैटफॉर्म में लगभग 1.5 साल तक काम किया। 2022 में टाइम्स नाउ नवभारत के एजुकेशन टीम का हिस्सा बनीं। करीब चार साल के छोटे से करियर में स्कूली शिक्षा से लेकर रोजगार तक के सभी पहलुओं पर पकड़ बनाई। नए और रोचक विषयों पर स्टोरी बनाने के साथ ही सक्सेस स्टोरी के जरिए युवाओं को प्रोत्साहन देना भी काम का हिस्सा है। जॉब वैकेंसी, स्कूल-कॉलेज, करियर ऑप्शन, एग्जाम टिप्स, करंट अफेयर्स से जड़ी तमाम खबरों को लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत रहती हैं।

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