जब भी छात्र कॉलेज, यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूट में प्रवेश प्राप्त करने के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा यानी एंट्रेंस एग्जाम को पास करते हैं, तो उसके बाद एडमिशन के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया की शुरुआत की जाती है। जैसे सीयूईटी यूजी रिजल्ट के बाद अब काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें शामिल होने पर छात्रों के सामने कई तकनीकी शब्द आएंगे जैसे चॉइस फिलिंग' और 'सीट अलॉटमेंट'। इनमें छात्रों को उलझन में डालने वाले दो ऑप्शन हैं, 'फ्रिज' (Freeze) और 'फ्लोट' (Float)। अक्सर सही जानकारी न होने के कारण छात्र गलत विकल्प चुन लेते हैं, जिससे या तो उन्हें मनपसंद कॉलेज नहीं मिल पाता या फिर वे काउंसलिंग प्रक्रिया से ही बाहर हो जाते हैं। आपसे ऐसी कोई गलती न हो, इसलिए पहले ही जान लें कि फ्रिज और फ्लोट होता क्या है?
क्या होता है 'फ्रिज' का मतलब?
'फ्रिज' शब्द का अर्थ यहां जमा देना नहीं है, बल्कि 'लॉक कर देना' है। काउंसलिंग की भाषा में इसका मतलब यह है कि आप आपको आवंटित की गई सीट से पूरी तरह संतुष्ट हैं। जब सीट अलॉटमेंट रिजल्ट में आपको आपकी पहली पसंद का कॉलेज और कोर्स मिल जाए और आप आगे के राउंड में किसी अन्य कॉलेज की तलाश नहीं करना चाहते है, तो उस स्थिति में उम्मीदवारों को 'Freeze' का विकल्प चुनना चाहिए। इस विकल्प को चुनते ही आपकी सीट पक्की हो जाएगी। इसके बाद आप काउंसलिंग के अगले किसी भी राउंड में भाग नहीं ले सकेंगे। आपको सीधे निर्धारित केंद्र पर जाकर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराना होगा और फीस जमा करके एडमिशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
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क्या होता है 'फ्लोट' का मतलब?
अब बात आती है 'फ्लोट' शब्द की, तो यहां फ्लोट का अर्थ 'तैरना' से नहीं है, बल्कि 'आगे बढ़ने' से है। काउंसलिंग में इसका मतलब यह है कि आप मिली हुई सीट को अपने पास सुरक्षित (Hold) रखते हुए, अगले राउंड में इससे बेहतर कॉलेज की तलाश करना चाहते हैं। मान लीजिए चॉइस फिलिंग के दौरान आपने 10 कॉलेज भरे थे और आपको 5वें नंबर का कॉलेज अलॉट हुआ है। आप इस कॉलेज से पूरी तरह खुश नहीं हैं और चाहते हैं कि अगले राउंड में आपको 1 से 4 नंबर वाले बेहतर कॉलेजों में सीट मिले, तब आपको 'Float' का विकल्प चुनना चाहिए। इस विकल्प को चुनने पर आपकी मौजूदा सीट तब तक सुरक्षित रहेगी, जब तक कि आपको अगले राउंड में इससे बेहतर कॉलेज नहीं मिल जाता। अगर अगले राउंड में कोई नया कॉलेज अलॉट हो जाता है, तो पुरानी सीट अपने आप निरस्त हो जाएगी। लेकिन अगर अगले राउंड में कोई नया कॉलेज नहीं मिलता, तो आपकी पुरानी सीट वैसी की वैसी ही सुरक्षित रहेगी।
'स्लाइड' का तीसरा विकल्प
बता दें कि कुछ काउंसलिंग प्रक्रिया जैसे JoSAA या अन्य बड़ी काउंसलिंग में छात्रों को फ्रिज और फ्लोट के अलावा 'Slide' का विकल्प भी मिलता है। इसका मतलब यह होता है कि आप आवंटित किए गए कॉलेज से तो संतुष्ट हैं, लेकिन उसी कॉलेज के भीतर किसी बेहतर कोर्स या ब्रांच में अपग्रेड होना चाहते हैं। इसमें आपका कॉलेज नहीं बदलता, केवल कोर्स अपग्रेड होने का मौका रहता है।
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चॉइस फिलिंग के दौरान फैसला लेने में कैसे होगी आसानी?
चॉइस फिलिंग के दौरान अक्सर देखा गया है कि छात्र कंफ्यूजन में रहते हैं। ऐसे में आपको चॉइस फिलिंग करते समय हमेशा अपने सबसे पसंदीदा कॉलेज और कोर्स को सबसे ऊपर रखना है। ऐसा में अगर आपको 'फ्लोट' विकल्प चुनना पड़े, तो सिस्टम हमेशा ऊपर वाले विकल्पों को ही चेक करेगा। लेकिन छात्रों को इस बात का ध्यान भी देना होगा कि अगर सीट अलॉट हो गई है और उन्होंने समय रहते 'फ्रिज' या 'फ्लोट' में से कोई भी विकल्प नहीं चुना, तो ऐसे में उन्हें काउंसलिंग प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाएगा।
इसके साथ ही आपको बता दें कि 'Float' विकल्प के चुनाव के बाद सीट को सुरक्षित रखने के लिए 'सीट एक्सेप्टेंस फीस' (Seat Acceptance Fee) ऑनलाइन जमा करनी पड़ सकती है, अन्यथा आपकी वह सीट भी हाथ से निकल जाएगी। इसलिए इन जरूरी बातों को ध्यान में रखते हुए सही विकल्प का चुनाव करें।
