घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले एजेंसी ने 6.6 प्रतिशत की ग्रोथ का अनुमान लगाया था। क्रिसिल ने यह बदलाव अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति और वित्त वर्ष की पहली छमाही में बेहतर वृद्धि की उम्मीद को देखते हुए किया है।
पहली छमाही में तेज रह सकती है ग्रोथ
PTI/भाषा के मुताबिक क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डी.के. जोशी ने कहा कि वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। इसके आधार पर एजेंसी को अप्रैल से सितंबर के बीच आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बने रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है। पहली छमाही में वृद्धि की रफ्तार तेज रह सकती है, जबकि दूसरी छमाही में इसके कुछ धीमे होने की संभावना है।
कच्चे तेल की कीमत भी अहम
क्रिसिल ने अपने अनुमान में वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत 87 से 93 डॉलर प्रति बैरल मानी है। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2025-26 में औसत कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी। कच्चे तेल की कीमत भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा होने से आयात बिल और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
मानसून पर भी रहेगी नजर
क्रिसिल के अनुसार मानसून भी आर्थिक वृद्धि के लिए अहम रहेगा। फिलहाल मानसून दीर्घकालिक औसत से 12 प्रतिशत कम है। इसका असर सर्दियों में होने वाली रबी फसल पर पड़ सकता है। जलाशयों में पानी का स्तर और मिट्टी में नमी की स्थिति रबी फसल के उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। कृषि उत्पादन में कमी का असर ग्रामीण मांग और आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है।
मार्च 2027 तक 93.5 रुपये हो सकता है डॉलर
रुपये को लेकर क्रिसिल का अनुमान है कि भारतीय मुद्रा मार्च 2027 तक 93.5 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकती है। डी.के. जोशी ने कहा कि रुपये में पहले भी गिरावट के बाद मजबूती के दौर देखे गए हैं।
RBI की ब्याज दरों पर भी नजर
क्रिसिल को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर और दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में 0.25-0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, एजेंसी के मुताबिक इससे निजी क्षेत्र के पूंजी निवेश पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
इसकी वजह यह है कि कंपनियों के पास पर्याप्त नकदी है और उनकी देनदारियां पहले की तुलना में कम हुई हैं। क्रिसिल ने यह भी कहा कि RBI सिस्टम में अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग उपाय जारी रख सकता है।
AI के दौर में स्किल डेवलपमेंट जरूरी
डी.के. जोशी ने आर्थिक वृद्धि को मजबूत बनाए रखने के लिए कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कुछ मौजूदा कामों को ऑटोमेट कर सकता है, लेकिन पिछली तकनीकी क्रांतियों की तरह इससे नए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
