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CUET UG Result: सीयूईटी रिजल्ट के बाद नॉर्मलाइजेशन पर फिर उठे सवाल, छात्रों के 40 से 50 नंबर तक घटे

CUET UG Result 2026: सीयूईटी यूजी रिजल्ट के बाद नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई छात्रों ने एनटीए को शिकायत भेजी है कि उनके 40 से 50 अंक कम हो गए हैं। सोशल मीडिया पर भी इस बात का जमकर विरोध किया जा रहा है।

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CUET UG Result 2026 (Photo - AI)

CUET UG Result 2026: सीयूईटी यूजी (CUET UG 2026) का रिजल्ट जारी होने के बाद से एक बार फिर 'नॉर्मलाइजेशन' की प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रोविजनल और फाइनल आंसर-की के आधार पर अपने स्कोर का हिसाब लगाने वाले छात्र अपने अंतिम परिणाम देखकर दंग रह गए हैं। एनटीए की इस नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया से बड़ी संख्या में प्रभावित छात्रों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को अपनी शिकायतें भेजी हैं, वहीं सोशल मीडिया पर भी इस प्रक्रिया के खिलाफ लगातार आवाज उठाई जा रही है। छात्रों द्वारा कई सवाल किए जा रहे हैं, क्योंकि इस बार नॉर्मलाइजेशन के चलते सीयूईटी यूजी परीक्षा में शामिल हुए छात्रों के नंबरों में भारी गिरावट देखी गई है, जिससे उनके मनपसंद कॉलेज में एडमिशन के सपने को एक बड़ा झटका लगा है। आंसर की में अच्छे अंकों का हिसाब लगाने के बाद पसंदीदा संस्थान में जागी प्रवेश के सपने को रिजल्ट में प्राप्त फाइनल अंक ने तोड़ दिया है।

40-50 नंबर कम होने का छात्रों ने किया दावा

बता दें कि सीयूईटी यूजी रिजल्ट आने से पहले प्रोविजनल और फाइनल आंसर-की के जरिए छात्र अपने 'रॉ मार्क्स' (Raw Marks) का सटीक अंदाजा लगा लेते हैं। लेकिन अंतिम परिणाम आने के बाद कई छात्रों का दावा है कि उनके 40 से 50 मार्क्स कम हो गए हैं, जबकि कुछ मामलों में गिरावट इससे भी कहीं अधिक है। अंकों में आई इतनी भारी कमी को देखते हुए छात्रों की मांग है कि एनटीए को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कौन सा पेपर कितना मुश्किल या आसान था और किस आधार पर एक शिफ्ट के नंबर घटाए गए और दूसरी शिफ्ट के बढ़ाए गए।

क्या है नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया?

चूंकि कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी CUET परीक्षा का आयोजन कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में कई दिनों और अलग-अलग शिफ्टों में किया जाता है, इसलिए हर शिफ्ट के प्रश्न पत्र का कठिनाई स्तर भी अलग हो सकता है। इसलिए इन सभी शिफ्ट के पेपर के स्तर को एक समान बनाने के लिए एनटीए 'एक्वि परसेंटाइल मेथड' (Equi percentile Method) का इस्तेमाल करता है। इस प्रक्रिया के तहत रॉ मार्क्स और पर्सेंटाइल का गणितीय विश्लेषण कर नॉर्मलाइज्ड स्कोर' निकाला जाता है। यह स्कोर आपके मूल रॉ मार्क्स से थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है। इसी नॉर्मलाइज्ड मार्क्स के आधार पर यूनिवर्सिटी अपनी मेरिट लिस्ट तैयार करता है और छात्रों को एडमिशन दिया जाता है।

नॉर्मलाइजेशन पर क्या है NTA का पक्ष

एनटीए के सूत्रों का कहना है कि सभी शिफ्टों के छात्रों को बराबरी पर लाने के लिए नॉर्मलाइजेशन एक वैज्ञानिक (Scientific) तरीका है। इस प्रक्रिया में एक तरह से आधे अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ते हैं और आधे के कम हो जाते हैं। एनटीए ने आगे तर्क दिया कि यदि कोई शिफ्ट कठिन थी, तो वहां छात्रों के नंबर बढ़ा दिए जाते हैं, और यदि कोई शिफ्ट आसान थी, तो परसेंटाइल को बराबर करने के लिए उनके अंक थोड़े कम कर दिए जाते हैं।

नॉर्मलाइजेशन के मौजूदा फॉर्मूले पर छात्रों ने उठाए बड़े सवाल

नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया के चलते जिन छात्रों के 40 से 50 या उससे अधिक अंक कम हुए हैं उन्होंने इस प्रक्रिया पर कई पड़े सवाल उठाए हैं। जो इस प्रकार है -

- छात्रों ने कहा कि बड़े शहरों में एक शिफ्ट में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या छोटे शहरों की तुलना में बहुत अधिक होती है। ऐसे में दोनों जगहों की शिफ्टों के लिए एक जैसा फॉर्मूला कैसे सही हो सकता है?

- छात्रों ने दूसरा सवाल यह उठाया कि एनटीए को यह डेटा सार्वजनिक करना चाहिए कि किस शिफ्ट में कुल कितने कैंडिडेट बैठे और वे किस राज्य से ताल्लुक रखते थे।

- एजेंसी को यह साफ तौर पर बताना चाहिए कि किस शिफ्ट में कितने प्रतिशत तक नंबर बढ़ाए या घटाए गए हैं। ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

बिना नॉर्मलाइजेशन के रिजल्ट जारी करने की राय

कई एक्सपर्ट ने भी इस मामले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि एनटीए को सीयूईटी यूजी के अंक बिना नॉर्मलाइजेशन के जारी करने चाहिए, क्योंकि जब प्रश्न पत्र बनाने वाले विशेषज्ञ तय सिलेबस के आधार पर ही पेपर सेट करते हैं, तो इस नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया की क्या जरूरत है? उन्होंने सवाल किए कि क्या इसके सिस्टम में कोई खामी है? सभी छात्रों के इवैल्यूएशन के लिए पेपर-सेटर की यह जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वे सभी शिफ्टों के प्रश्न पत्रों का स्तर एक समान रखें। ताकि नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया की जरूरत ही न पड़े।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि आंसर की अनुसार एक छात्र का स्कोर 810 बनता है, लेकिन एनटीए की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया के बाद अंक 700 तक आ जाते हैं तो यह ऐसे में छात्र क्या करे। 100 अंक का सीधा घाटा छात्रों के लिए बहुत चिंताजनक है। सवाल किए जा रहे हैं कि पेपर आसान था तो इसका नुकसान छात्रों को क्यों उठाना पड़ रहा है। कहीं न कहीं यह प्रक्रिया होनहार छात्रों के साथ एक अन्याय है।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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