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क्या है AI Washing? कैसी होती है पहचान, यूपीएससी में आते हैं ऐसे सवाल

What is AI Washing: डिजिटल के इस दौर में जहां एआई की होड़ इतनी अधिक है, एक नया ट्रेंड सुनने में आ रहा है जो है AI Washing। यह क्या है और यह यूपीएसई में क्यों पूछा जा सकता है।

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what is AI Washing

What is AI Washing: आज के डिजिटल दौर में ऐसा कोई स्थान नहीं है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का नाम न सुनने को मिले। टेक कंपनियों से लेकर आम स्टार्टअप्स तक, हर कोई खुद को एआई से जुड़ा दिखाने की होड़ में लगा है। इसी होड़ के बीच एक नया शब्द तेजी से उभरा है - 'एआई वॉशिंग' (AI Washing)। यह शब्द भी एआई से ही जुड़ा है, लेकिन यह न केवल बिजनेस जगत के लिए चिंता का विषय है, बल्कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए भी एक बेहद महत्वपूर्ण टॉपिक बन चुका है। इस तरह के सवाल अक्सर यूपीएससी इंटरव्यू में उम्मीदवारों की दिक्कतें बढ़ाते हैं।

क्या है एआई वॉशिंग?

आसान भाषा में समझे तो 'एआई वॉशिंग' एक तरह का भ्रामक प्रमोशन या यूं कहें कि मार्केटिंग हथकंडा है। जब कोई कंपनी अपनी किसी साधारण तकनीक, सॉफ्टवेयर या सर्विस को बढ़ा-चढ़ाकर 'एआई-पावर्ड' (AI-Powered) या 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित' बताती है, लेकिन असलियत में उसमें एआई का नाममात्र इस्तेमाल भी नहीं होता, तो इसे 'एआई वॉशिंग' कहा जाता है। यह ठीक वैसे ही है जैसे कंपनियां खुद को पर्यावरण के अनुकूल दिखाने के लिए 'ग्रीन वॉशिंग' का सहारा लेती हैं।

क्यों किया जाता है AI Washing का इस्तेमाल?

आजकल इनवेस्टर और ग्राहक दोनों ही एआई तकनीक की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। किसी समान पर अगर आपको AI लिखा नजर आ रहा है तो आपको लगता है कि यह बेहतर होगा, या इसमें क्वालिटी अच्छी होगी। कंपनियों को लगता है कि अगर वे अपने प्रोडक्ट के साथ 'AI' का टैग जोड़ देंगी, तो उनकी ब्रांड वैल्यू रातों-रात बढ़ जाएगी और ऐसा करने से कंपनियों को भारी-भरकम फंडिंग मिलने की संभावना बढ़ जाती है और उनके शेयर की कीमतें भी आसमान छूने लगती हैं। इसी शॉर्टकट के चक्कर में कंपनियां एआई वॉशिंग का सहारा लेती हैं।

कैसे होती है एआई वॉशिंग की पहचान?

एआई वॉशिंग क्या है, यह जानने के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि एआई वॉशिंग की पहचान कैसे की जाए। अगर आप भी किसी प्रोडक्ट या सर्विस को परखना चाहते हैं कि वह सच में एआई है या सिर्फ दिखावा तो इन पॉइंट पर ध्यान देना जरूरी है।

- यदि कोई कंपनी यह बताने में नाकाम रहती है कि उनका एआई मॉडल कैसे काम करता है या कौन सा एल्गोरिदम इस्तेमाल हो रहा है, तो समझ लें कि यह केवल दिखावा है।

- साधारण 'इफ-एल्स' कोडिंग या एक्सेल शीट के बेसिक फॉर्मूलों को एआई बताकर बेचना एआई वॉशिंग का सबसे बड़ा उदाहरण है।

- असली एआई को काम करने के लिए भारी डेटा और ट्रेनिंग की जरूरत होती है। अगर कंपनी के पास डेटा का कोई ठोस आधार नहीं है, तो वह असली एआई नहीं हो सकता।

बाजार पर इसका असर

एआई वॉशिंग के कारण बाजार में एक गलत होड़ शुरू हो जाती है। एआई के नाम पर आम ग्राहक धोखा खाकर सिंपल टेक्नोलॉजी के लिए अच्छी मोटी रकम दे देते हैं। वहीं दूसरी तरफ, ग्राहक के साथ निवेशक भी इसका शिकार होते हैं, क्योंकि वह उन कंपनियों में अपना पैसा लगा देते हैं जो अंदर से खोखली होती हैं। इससे वास्तविक एआई पर काम कर रहे स्टार्टअप्स को नुकसान पहुंचता है।

UPSC के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह टॉपिक?

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में हमेशा से ही करंट अफेयर्स और उभरती हुई टेक्नोलॉजी के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर सवाल पूछे जाते हैं। मुख्य परीक्षा (Mains) के सामान्य अध्ययन पेपर-3 में 'विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी' खंड के तहत 'एआई वॉशिंग' पर सीधा सवाल बन सकता है। यही कारण है कि यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए इस तरह के कॉन्सेप्ट क्लियर होना जरूरी है। इतना ही नहीं, इस टॉपिक का एनालिटिकल नजरिया देखना जरूरी है।

यूपीएससी में आ सकते हैं इस प्रकार के सवाल

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को इस टॉपिक पर वैसे तो कई सवाल पूछे जा सकते हैं। इसलिए उनका इनके बारे में जानना जरूरी है। छात्र उदाहरण के लिए नीचे दिए गए दो प्रश्न देख सकते हैं।

"आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में 'एआई वॉशिंग' से आप क्या समझते हैं? यह तकनीक के नैतिक उपयोग और कॉर्पोरेट जगत की विश्वसनीयता को कैसे प्रभावित करता है?"

"क्या आपको लगता है कि एआई वॉशिंग को रोकने के लिए मौजूदा उपभोक्ता संरक्षण कानून काफी हैं? देश में तकनीकी विनियामक ढांचे को मजबूत करने के उपाय सुझाइए।"

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहा author

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्... और देखें

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