Highest Dam in Asia: जब भी दुनिया या एशिया के बड़े और विशालकाय बांधों (Dams) की बात आती है, तो हमारे मन में आधुनिक इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नजारा सामने आता है। ये बांध न सिर्फ लाखों लोगों की प्यास बुझाते हैं और बिजली पैदा करते हैं, बल्कि बाढ़ नियंत्रण में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। बता दें किएशिया में कुल 30,000 से अधिक बांध है, जिसमें से अकेले भारत में बांधों की संख्या ही 5 हजार से अधिक है। लाखों-करोड़ो लोगो की प्यास बुझाने वाले इन बांधों के बारे में सुनते और देखते हुए आपने कभी सोचा की एशिया का सबसे ऊंचा बांध कहां है। आइए आज आपको इस सवाल का जवाब बताएं -
बांधों की संख्या में भारत का तीसरा स्थान
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, भारत में लगभग 5,200 से अधिक बड़े बांध बने हुए हैं। इसमें 5,000 से ज्यादा बनकर तैयार हो चुके हैं और सैकड़ों निर्माणाधीन हैं। बांधों की संख्या के मामले में भारत, चीन और अमेरिका के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर है।
एशिया का सबसे ऊंचा बांध
एशिया का सबसे ऊंचे बांध का गौरव उत्तराखंड में स्थित टिहरी बांध (Tehri Dam) को प्राप्त है। यह बांध हिमालय की गोद में पवित्र भागीरथी नदी पर बनाया गया है, जो आगे चलकर गंगा नदी का रूप लेती है। अपनी विशालता और ऊंचाई के कारण यह न केवल एशिया का सबसे ऊंचा बांध है, बल्कि दुनिया के सबसे ऊंचे बांधों की टॉप 10 लिस्ट में शामिल है।कितनी है टिहरी बांध की हाइट?
यदि इस बांध की ऊंचाई की बात करें, तो टिहरी बांध की कुल ऊंचाई 260.5 मीटर, जो लगभग 855 फीट है। इसकी लंबाई लगभग 575 मीटर है। इस बांध की बनावट 'रॉक एंड अर्थ फिल' (Rock and Earth fill) तकनीक पर आधारित है, जिसका मतलब है कि इसे बनाने में भारी पत्थरों, कंक्रीट और मिट्टी का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया है।
कितनी है टिहरी बांध की बिजली उत्पादन क्षमता?
टिहरी बांध सिर्फ ऊंचाई के मामले में ही टॉप पर नहीं है, बल्कि यह भारत के सबसे बड़े हाइड्रोइलेक्ट्रिक (जल विद्युत) प्रोजेक्ट्स में से एक है। इस पूरे प्रोजेक्ट की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 2400 मेगावाट (MW) है। इसे तीन मुख्य हिस्सों में बांटा गया है, जिसमें पहला है टिहरी बांध और पनबिजली संयंत्र (1000 मेगावाट), दूसरा कोटेश्वर बांध (400 मेगावाट) और टिहरी पंप्ड स्टोरेज प्लांट (1000 मेगावाट)।
टिहरी बांध बुझाता है करोड़ों लोगों की प्यास
बिजली बनाने के साथ-साथ यह बांध एक बहुत बड़े जलाशय (Reservoir) का निर्माण करता है, जिसे स्वामी रामतीर्थ सागर के नाम से जाना जाता है। इस जलाशय में अरबों लीटर पानी जमा रहता है। यहां से उत्तर प्रदेश और देश की राजधानी दिल्ली को रोजाना करोड़ों लीटर पीने का साफ पानी भेजा जाता है।
