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नदियों के रौद्र रूप से असम बेहाल, बाढ़ से कई जिलों में त्राहिमाम; PM ने CM हिमंत को दिया हरसंभव मदद का भरोसा

असम में बाढ़ की स्थिति में सुधार के बीच पीएम मोदी ने मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से फोन पर बात की। केंद्र सरकार ने राहत कार्यों के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।

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असम में बाढ़ से जनजीवन प्रभावित (फोटो-AI)

गुवाहाटी : पूर्वोत्तर में इन दिनों बादलों का कहर जारी है। अधिकांश हिस्सों पर भारी बारिश से नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी जारी है। कई हिस्से बाढ़ से ग्रसित हैं, जिससे लाखों लोग प्रभावित हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को असम सरकार को राज्य में बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। राज्य में अधिकतर हिस्सों में बारिश कम होने के बाद बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के राहत शिविरों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं, भोजन, पेयजल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है और प्रशासन दिन के दौरान लगभग सभी प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में सफल रहा। उन्होंने ’एक्स’ पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें फोन करके राज्य में बाढ़ की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली।शर्मा ने कहा कि उन्होंने (मोदी ने) तबाही की स्थिति, जारी राहत कार्यों और जमीन पर आ रही चुनौतियों के बारे में जानकारी मांगी। मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को राज्य सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों और प्रत्येक प्रभावित परिवार तक पहुंचने के प्रयासों की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जान-माल के नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए असम के लोगों को आश्वासन दिया कि इस आपदा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास तथा पुनर्निर्माण कार्यों में हरसंभव सहायता देगी।शर्मा ने कहा कि कठिन समय में मिले प्रधानमंत्री के समर्थन और आश्वासन के लिए असम के लोग उनके आभारी हैं। राज्य में अब तक बाढ़ से 62 लोगों की मौत हो चुकी है और नौ जिलों में 7.05 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। सोनोवाल ने दिन के समय शिवसागर जिले के कुछ राहत शिविरों का दौरा किया, विस्थापित परिवारों से बातचीत की और अधिकारियों को सतर्क रहने तथा यह सुनिश्चित करने को कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को जरूरी सुविधाएं मिलने में कोई परेशानी न हो।

उन्होंने राहत शिविरों में मौजूद लोगों से कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। सोनोवाल ने कहा कि भारत सरकार इस कठिन समय में असम के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है। हम हर जीवन की सुरक्षा और जरूरतमंद परिवारों तक राहत, स्वास्थ्य सेवा, भोजन और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

जीवन फिर से पटरी पर लाने में मदद करेंगे

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं लोगों की सहनशीलता की परीक्षा लेती हैं, लेकिन साथ ही एकता और करुणा की भावना को भी सामने लाती हैं। मंत्री ने कहा कि सरकारों, स्वयंसेवी संगठनों व नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हम इस कठिन दौर से बाहर निकलेंगे और प्रत्येक प्रभावित परिवार को सम्मान के साथ अपना जीवन फिर से पटरी पर लाने में मदद करेंगे।इससे पहले सोनोवाल ने डिब्रूगढ़ से असम ओलंपिक संघ के बाढ़ राहत अभियान को रवाना किया, जो चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट जिलों के प्रभावित परिवारों के लिए है।

मुख्यमंत्री ने शाम को मंत्रिमंडल की एक बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ऊपरी असम के जिलों में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र की एक टीम राज्य पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि आज (शनिवार को) बाढ़ की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है। हम शिवसागर और चराइदेव जिलों के हर गांव और इलाके तक पहुंचने में सफल रहे हैं। शर्मा ने बताया कि जहां प्रशासन पहले नहीं पहुंच सका था, वहां राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हवाई मार्ग का इस्तेमाल किया जा रहा है और सेना की मदद ली जा रही है।

इस साल बाढ़ में अब तक 62 लोगों की मौत

उन्होंने कहा कि चिकित्सा और स्वास्थ्य शिविरों में तेजी आई है और उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति और बेहतर होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस साल बाढ़ में अब तक 62 लोगों की मौत हुई है। तीन कैबिनेट मंत्री-बिमल बोरा, केशब महंत और सुशांत बरगोहेन-चराइदेव और शिवसागर जिलों में रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि प्रशासन अब भी कम से कम 80,000 बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने में सफल नहीं हो पाया है। शर्मा ने कहा, "हम लोगों से नए कपड़े दान करने की भी अपील करते हैं, पुराने कपड़े नहीं। इसके अलावा, शैक्षणिक सामग्री भी दी जा सकती है, क्योंकि बाढ़ के पानी ने पढ़ाई से जुड़ी सभी सामग्री नष्ट कर दी है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अगस्त तक अपना नुकसान आकलन पूरा करने का लक्ष्य रख रही है, ताकि जल्द से जल्द पुनर्वास कार्य शुरू किया जा सके। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, पिछले 24 घंटे में बाढ़ के कारण 14 और लोगों की मौत हुई।

दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, होजाई, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग, नगांव और शिवसागर जिलों में 7,05,100 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बृहस्पतिवार की तुलना में स्थिति में मामूली सुधार हुआ है, जब 11 जिलों में 7.21 लाख से अधिक लोग प्रभावित थे। एएसडीएमए ने बताया कि करीब 856 गांव अब भी जलमग्न हैं और राज्य में 56,606.78 हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है।

बाढ़ के पानी से विभिन्न जिलों में तटबंध, सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। प्राधिकरण के अनुसार, सात जिलों में प्रशासन 363 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र चला रहा है, जहां वर्तमान में 1,15,205 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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