Grasse of the East: उत्तर प्रदेश, देश का चौथा सबसे बड़ा राज्य है और सबसे अधिक जिलों वाला राज्य भी है। यूपी के सभी जिलों की अपनी एक अलग पहचान और विशेषता है। किसी को लेदर सिटी, नवाबों की सिटी तो किसी संगम सिटी, खेल नगरी और शिव की नगरी के नाम से जाना जाता है। इसी में एक जिला ऐसा भी है, जिसे पूर्व का ग्रास (Grasse of the East) कहा जाता है। लेकिन इस नाम के पीछे क्या वजह है। क्यों इसे पूर्व का ग्रास कहा जाता है। इसे यह नाम कैसे मिला आइए विस्तार से जानें।
यूपी के किस जिले को कहा जाता है पूर्व का ग्रास
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले को पूर्व का ग्रास यानी Grasse of The East कहा जाता है। इसके पीछे क्या वजह है यह जानना जरूरी है। क्या यह नाम इसे ऐतिहासिक कारणों से मिला है या फिर भौगोलिक कारणों से आइए विस्तार में जानते हैं।
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क्यों कहा जाता है पूर्व का ग्रास
यूपी के कन्नौज को पूर्व का ग्रास कहने जाने की सबसे बड़ी वजह फ्रांस का एक शहर है। जी हां, आपने सही पड़ा कन्नौज को यह अनोखा नाम फ्रांस के एक प्रसिद्ध शहर के कारण मिला है। बता दें कि फ्रांस में एक शहर है, जिसका नाम ग्रास है। जैसे कन्नौज भारत की इत्र राजधानी है, उसी प्रकार के ग्रास दुनिया की इत्र राजधानी के तौर पर जानी जाती है। यहां सालों से फूलों से प्राकृतिक रूप से इत्र तैयार किया जा रहा है। ठीक उसी प्रकार के यूपी के कन्नौज में पारंपरिक रूप से फूलों से इत्र बनाया जाता है। यही कारण है कि यूपी के कन्नौज को पूर्व का ग्रास कहा जाता है।
कन्नौज में इत्र की शुरुआत कब हुई थी?
कन्नौज में इत्र के उद्योग बढ़ावा मुगल काल के दौरान मिला। उस दौरान मुगल साम्राज्ञी नूरजहां को गुलाब का इत्र बहुत अधिक पसंद था। यही कारण था उनके शासनकाल के दौरान कन्नौज में गुलाब के फूलो का इत्र बनाना शुरू किया था। फिर समय के साथ यहां विभिन्न प्रकार के फूलों के इत्र की शुरुआत हुई।
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आज भी क्यों कन्नौज का इत्र प्रसिद्ध है?
आज भी कन्नौज के इत्र (Kannauj itra) को देश और विश्व में पसंद किया जाता है। क्योंकि आज भी कन्नौज में पारंपरिक तरीके से इत्र का निर्माण किया जाता है। जहां दुनिया में हजारों ब्रांड आधुनिक तरीकों से इत्र बना रहे हैं, वहां कन्नौज अपनी प्राचीन शैली पर इत्र का निर्माण कर रहा है। यही कारण है कि कन्नौज के इत्र को आज भी पसंद किया जाता है। इतना ही नहीं, मार्केट में मिलने वाले इत्र और परफ्यूम में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कन्नौज में बनने वाला इस पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके से और बिना अल्कोहल के बनाया जाता है। दरअसल, यह ऑयल बेस्ड इत्र होता है।
कन्नौज के इत्र को मिला GI टैग
कन्नौज का इत्र इतना बेहतरीन है कि इसे GI Tag मिला है। इसके साथ ही यूपी सरकार के 'एक जिला-एक उत्पाद' योजना के तहत कन्नौज के इत्र उद्योग वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
कन्नौज का पुराना नाम
यूपी के कन्नौज में इत्र का व्यापार आज का नहीं है। यह सदियों पुराना है। कन्नौज के इतिहास पर बात करें तो पहले इसे कान्यकुब्ज के नाम से जाना जाता था। उसके बाद 7वीं शताब्दी में हर्षवर्धन की राजधानी रही थी, तब इसे महोदय नगर कहा जाता था।
