UP Teacher Recruitment: उत्तर प्रदेश की 72,825 ट्रेनी शिक्षक भर्ती से जुड़ा वर्षों पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अहम फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने वर्ष 2014-15 में जारी अंतरिम आदेशों का पालन नहीं होने का आरोप लगाकर दायर की गई सैकड़ों अवमानना याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं को वर्ष 2024 से 2026 के बीच दाखिल किया गया था। इस फैसले से भर्ती के 6,170 पदों पर नियुक्ति की मांग कर रहे, 32 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को निराशा हाथ लगी है।
2014 में दाखिल की गई थी सिविल अपील
सुप्रीम कोर्ट में इस भर्ती से संबंधित सिविल अपीलें वर्ष 2014 में दाखिल की गई थीं। उस समय अदालत ने अंतरिम आदेश जारी कर राज्य सरकार को ट्रेनी शिक्षकों के पदों को भरने के निर्देश दिए थे। बाद में इन आदेशों में बदलाव भी किया गया। इस भर्ती प्रक्रिया के दौरान जिन अभ्यर्थियों का नाम टीईटी से संबंधित गड़बड़ियों में नहीं था और जिन्होंने निर्धारित अंकों की शर्त पूरी की थी, उन्हें नियुक्ति दी गई थी।
जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतिम फैसले में कहा था कि अंतरिम आदेश के तहत नौकरी पाने वाले 66,655 शिक्षकों की नियुक्ति बरकरार रहेगी और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। इसके बाद राज्य सरकार ने 2018 में आदेश जारी कर भर्ती प्रक्रिया बंद कर दी थी। साथ ही बचे हुए रिक्त पदों को नए विज्ञापन के जरिए भरने की अनुमति भी दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि भर्ती में कुछ ऐसे लोगों को भी नौकरी मिल गई, जो योग्य नहीं थे। वहीं, पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति नहीं मिल सकी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी आपत्तियां मामले की अंतिम सुनवाई से पहले ही उठाई जानी चाहिए थीं। इस मामले में दायर समीक्षा याचिकाएं भी पहले ही खारिज हो चुकी हैं।
पुराने आदेश के आधार पर अवमानना कार्रवाई नहीं की जा सकती
कोर्ट ने साफ किया कि एक बार अंतिम फैसला आने के बाद पुराने अंतरिम आदेश अलग से लागू नहीं रहते। इसलिए उन पुराने आदेशों के आधार पर अवमानना की कार्रवाई नहीं की जा सकती। इसी वजह से अदालत ने सभी संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया। साथ ही इस मामले से जुड़ी लंबित अंतरिम अर्जियों का भी निपटारा कर दिया गया। हालांकि, अंतिम फैसले से जुड़े कुछ अन्य अवमानना मामलों को नवंबर 2026 में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। इस तरह 72,825 शिक्षक भर्ती से जुड़े पुराने विवाद में आगे की कानूनी कार्रवाई का दायरा काफी सीमित हो गया है।
