UP Police Constable Paper Leak: उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में हुए पेपर लीक को लेकर योगी सरकार लगातार एक्शन में नजर आ रही है। मंगलवार को इस मामले पर एक बार फिर बड़ा फैसला लेते हुए योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की। योगी सरकार ने यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस भर्ती बोर्ड की डीजी रेणुका मिश्रा को यूपी सरकार ने हटा दिया है। इससे पहले, शासन ने आरओ-एआरओ की प्रारंभिक परीक्षा निरस्त करने के बाद यूपी लोकसेवा आयोग (UPPSC) के परीक्षा नियंत्रक अजय कुमार तिवारी को पद से हटा दिया था। उन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध किया गया है।
DG राजीव कृष्णा मिला चार्ज
पुलिस भर्ती बोर्ड की डीजी रेणुका मिश्रा को प्रतीक्षारत करने के बाद DG राजीव कृष्णा को निदेशक सतर्कता अधिष्ठान के साथ DG भर्ती बोर्ड का अतिरक्त चार्ज सौंपा गया है। राजीव कृष्ण वर्ष 1991 बैच के आइपीएस अधिकारी हैं। वह यूपी की राजधानी लखनऊ के रहने वाले हैं। उनका जन्म 20 जून 1969 को हुआ था। उन्होंने बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग इन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन की पढ़ाई की। यूपीएससी की ओर से 1991 में उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा पास की।
बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते 17 व 18 फरवरी को आयोजित पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा-2023 को निरस्त करते हुए अगले 06 माह के भीतर पूरी शुचिता के साथ दोबारा परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की मेहनत से खिलवाड़ और परीक्षा की शुचिता से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे अराजक तत्वों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी तय है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गृह विभाग ने परीक्षा निरस्त करने का आदेश भी जारी कर दिया है।
दोबारा आयोजित होगी पुलिस भर्ती परीक्षा
जारी आदेश के मुताबिक दिनांक 17 व 18 फरवरी, 2024 को सम्पन्न हुई पुलिस भर्ती परीक्षा के संबंध में प्राप्त तथ्यों एवं सूचनाओं के परीक्षण के आधार पर शासन द्वारा सम्यक् विचारोपरान्त शुचिता एवं पारदर्शिता के उच्चतम मानकों के दृष्टिगत इस परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। शासन ने भर्ती बोर्ड को यह निर्देश दिए है कि जिस भी स्तर पर लापरवाही बरती गई है उनके विरूद्ध एफआईआर दर्ज कराकर अग्रिम वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। शासन ने प्रकरण की जांच एसटीएफ से कराये जाने का निर्णय लिया है, दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों अथवा संस्थाओं के विरूद्ध कठोरतम कार्यवाही किये जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। शासन ने छः माह के अन्दर पूर्ण शुचिता के साथ पुनः परीक्षा आयोजित करने तथा उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की सेवा से अभ्यर्थियों को निःशुल्क सुविधा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।
