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Exclusive Interview: UPSC की तैयारी में किताबों से ज्यादा जरूरी है ये चीज, ADG हरिनारायण चारी मिश्र ने बताया सफलता गुरु मंत्र

Power Corridor: मध्य प्रदेश पुलिस में एडीजी (ADG) हरिनारायण चारी मिश्र ने टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के खास कार्यक्रम 'पावर कॉरिडोर' के साथ बातचीत में यूपीएससी की तैयारी, पुलिस सेवा की चुनौतियों, हिंदी माध्यम, असफलता से निपटने और खाकी के प्रति अपने नजरिए को साझा किया।

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MP ADG Hari Narayanchari Mishra Interview: यहां देखें मध्य प्रदेश के एडीजी हरि नारायणचारी मिश्रा की सफलता की कहानी
Reported by: डॉ रमा सोलंकीEdited by: आदित्य सिंह
Updated Sep 13, 2026, 13:09 IST
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Power Corridor: सफलता केवल प्रतिभा या किताबी ज्ञान से हासिल नहीं होती, बल्कि उसके पीछे लगातार प्रयास, धैर्य और मुश्किल परिस्थितियों में डटे रहने की क्षमता भी जरूरी होती है। यही सोच मध्य प्रदेश पुलिस के एडीजी हरिनारायणचारी मिश्र के व्यक्तित्व और पुलिस सेवा के सफर में भी दिखाई देती है। बिहार में जन्म, उत्तर प्रदेश में शिक्षा और मध्य प्रदेश को कर्मभूमि बनाने वाले हरिनारायण चारी मिश्र ने यूपीएससी सिविल सर्विसेज की तैयारी से लेकर आईपीएस अधिकारी बनने और फिर एडीजी के पद तक पहुंचने के सफर में कई चुनौतियों का सामना किया। हाल ही में मध्य प्रदेश पुलिस में एडीजी (ADG) हरिनारायण चारी मिश्र ने टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के खास कार्यक्रम 'पावर कॉरिडोर' के साथ बातचीत में यूपीएससी की तैयारी, पुलिस सेवा की चुनौतियों, हिंदी माध्यम, असफलता से निपटने और खाकी के प्रति अपने नजरिए को साझा किया।

आसपास का माहौल बना प्रेरणा का आधार

उन्होंने बताया कि सिविल सर्विसेज की तैयारी में आसपास का माहौल व्यक्ति की सोच और लक्ष्य को प्रभावित करता है। हमारे भी इर्द-गिर्द कुछ ऐसे अधिकारी थे, कुछ जानने वाले लोग थे, हमारे पेरेंट्स थे जिन्होंने लगातार सिविल सर्विस के लिए प्रेरित किया। ग्रामीण परिवेश में रहते हुए भी उनके भीतर यह विश्वास मजबूत होता गया कि मेहनत और निरंतर प्रयास के जरिए लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

उनका कहना है कि शुरुआत में युवाओं को किसी अधिकारी की छवि और उसके प्रभाव से प्रेरणा मिल सकती है, लेकिन जब वे सेवा में आते हैं तो उन्हें इसकी वास्तविक जिम्मेदारी का एहसास होता है। समाज के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर कितनी राहत दे सकते हैं, एक परेशान व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं। इस तरह के कार्य का जो वातावरण है वो सिर्फ सिविल सर्विसेज में सभव है और अगर सही ढंग से किया जाए तो आसपास के परिवेश को सकारात्मक बनाने के लिए यह बड़ा ही उचित मंच है।

पुलिस के लिए सख्ती और संवेदनशीलता दोनों जरूरी

पुलिस सेवा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों की भूमिका समाज में बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि उनके अधिकार सीधे व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े होते हैं। इसलिए इन अधिकारों का इस्तेमाल पूरी समझदारी और विवेक के साथ किया जाना चाहिए।

उनके अनुसार अपराधियों के प्रति पुलिस को बेहद सख्त होना चाहिए, लेकिन जो आम नागरिक या पीड़ित व्यक्ति मदद की उम्मीद लेकर थाने या पुलिस अधिकारी के पास पहुंचता है, उसके प्रति व्यवहार बेहद संवेदनशील और समानुभूतिपूर्ण यानी फूल से भी कोमल होना चाहिए। पुलिस अधिकारी को खुद को पीड़ित व्यक्ति की जगह रखकर उसकी परेशानी समझने की कोशिश करनी चाहिए।

UPSC की तैयारी केवल किताबों तक सीमित नहीं

हरिनारायण चारी मिश्र ने यूपीएससी की तैयारी को लेकर केवल किताबी ज्ञान हासिल करने की प्रक्रिया मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान उम्मीदवार मानसिक उतार-चढ़ाव, असफलता और कई तरह के संघर्ष से गुजरता है। यही अनुभव धीरे-धीरे उसके व्यक्तित्व को परिपक्व यानी मजबूत बनाते हैं। जो अभ्यर्थी उतार चढ़ाव आने के बाद भी नहीं टूटते, लगातार अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगे रहते हैं और धैर्य नहीं खोते तो ये चीजें हमारे व्यक्तित्व को मजबूत करती हैं।

'गिव अप’ नहीं करने का मंत्र

उनके मुताबिक जब हम तैयारी करते हैं तो सिर्फ ज्ञान का अर्जन नहीं कर रहे होते, बल्कि अपने व्यक्तित्व को गढ़ रहे होते हैं। संघर्ष के दौरान जो मजबूती मिलती है, वह हमेशा काम आती है। हो सकता है कि फिजिक्स की कोई थ्योरी या कोपरनिकस का नियम आगे सीधे काम न आए, लेकिन संघर्ष के दौरान सीखी गई बातें जीवन की आगे की यात्रा में हमेशा साथ चलती हैं।

जीवन में मुश्किल परिस्थितियों से निकलने के लिए उनका सबसे बड़ा मंत्र धैर्य बनाए रखना है। उन्होंने अपने स्कूल के दिनों की एक प्रेरक पंक्ति ''वह पथ क्या, पथिक कुशलता क्या, जिस पथ पर बिखरे शूल न हों, नाविक की धैर्य परीक्षा क्या, जब धाराएं प्रतिकूल न हों''.... का उल्लेख करते हुए कहा कि बचपन में जब हमने यह पढ़ा और शिक्षकों से पूछा, तो उन्होंने समझाया कि जीवन में जब आप संघर्ष और कठिन दौर से गुजरते हैं, तभी आप सही मायने में गढ़े जाते हैं और अगली चुनौती के लिए तैयार होते हैं। प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए भी यह उतना ही सच है और करियर में आने के बाद भी। धैर्य और भावनात्मक स्थायित्व (Emotional Stability) बहुत जरूरी है। अगर कोई छोटी सफलता मिले तो अचानक उछलना नहीं चाहिए, और थोड़ी असफलता मिले तो अवसाद के सागर में नहीं डूबना चाहिए। जीवन में भावनात्मक धैर्य पढ़ाई और करियर दोनों जगह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हिंदी माध्यम से की UPSC की तैयारी

यूपीएससी की तैयारी हिंदी मीडियम के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने हिंदी माध्यम से पढ़ाई की और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में भी उनकी पढ़ाई का माध्यम हिंदी रहा। यूपीएससी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को उन्होंने सलाह दी कि उन्हें उसी भाषा में परीक्षा देनी चाहिए, जिसमें वे अपने विचारों को सबसे अच्छी तरह व्यक्त कर सकें। मैं हिंदी में अधिक सहज था इसलिए मैंने हिंदी का चयन किया।

हिंदी के सामने खड़ी चुनौतियों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में आज भी आम जनता की भाषा हिंदी या क्षेत्रीय भाषाएं हैं। हमने एक धारणा बना ली है जैसे विज्ञान/तकनीक की भाषा अंग्रेजी है, प्रेम की भाषा उर्दू है, राजनीति की भाषा हिंदी है। लेकिन भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है। जैसे-जैसे भारत एक बड़ी आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है, दुनिया भर में हिंदी की स्वीकार्यता और पहचान बढ़ रही है। आज यूरोप और अमेरिका में लोग इसे सीख रहे हैं। भाषा को लेकर मुझे हमेशा गर्व की अनुभूति रही है।

यूपीएससी की तैयारी करने वालों के लिए खास टिप्स

  • समाचार पत्र: समाचार पत्रों का नियमित अध्ययन करें। यह आसपास के परिवेश से अवगत कराने के साथ तार्किक बौद्धिक क्षमता विकसित करता है।
  • अध्ययन सामग्री: अब ऑनलाइन और ऑफलाइन हिंदी में प्रचुर सामग्री उपलब्ध है। आप गांव में बैठकर भी तैयारी कर सकते हैं।
  • निरंतरता और एकाग्रता: इसमें कंसिस्टेंसी और फोकस बहुत जरूरी है।
  • बदलाव के अनुरूप ढलना: अगर पैटर्न में थोड़ा बदलाव आता है तो अपनी इच्छाशक्ति से खुद को अगली प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रखें।

यहां आप आईपीएस हरि नारायण चारी मिश्र का पूरा इंटरव्यू सुन सकते हैं।

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