नई दिल्ली: यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग यानी यूजीसी की ओर से विश्वविद्यालयों यानी यूनिवर्सिटी से छात्रों को स्थानीय भाषाओं में परीक्षा लिखने की अनुमति देने को कहा है, भले ही पाठ्यक्रम अंग्रेजी माध्यम में हो। आयोग के अध्यक्ष जगदीश कुमार ने यह जानकारी दी है। आयोग का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थान पाठ्य पुस्तकें तैयार करने और मातृभाषा / स्थानीय भाषाओं में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आयोग ने जोर देकर कहा कि इन प्रयासों को मजबूत करना और 'मातृभाषा/स्थानीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों को लिखने और अन्य भाषाओं से मानक पुस्तकों के अनुवाद सहित शिक्षण में उनके उपयोग को प्रोत्साहित करने जैसी पहल को बढ़ावा देना' जरूरी हो जाता है।
यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग ने कहा, 'आयोग अनुरोध करता है कि आपके विश्वविद्यालय में छात्रों को परीक्षाओं में स्थानीय भाषाओं में उत्तर लिखने की अनुमति दी जाए, भले ही पाठ्यक्रम अंग्रेजी माध्यम में हो, और स्थानीय भाषाओं में मूल लेखन के अनुवाद को बढ़ावा दिया जाए। यूनिवर्सिटी में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में स्थानीय भाषा का उपयोग किया जाएगा।'
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों से स्थानीय भाषाओं में पढ़ाने के लिए संदर्भित किताबों की लिस्ट, स्थानीय भाषाओं में समझने और पढ़ाने वाले संकायों की उपलब्धता, यदि छात्र स्थानीय भाषाओं में उत्तर लिख सकते हैं तो इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक कार्य योजना के बारे में जानकारी मांगी है। बीते कुछ समय से शिक्षा जगत में हिंदी और अन्य स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने को लेकर कई सारे स्टेप उठाए जा रहे हैं और इसी क्रम में अब यूजीसी ने भी एक कदम उठाया है।
