Suraj Saini Motivational Success Story: कड़ी मेहनत व संघर्ष के दम पर व्यक्ति बड़े से बड़े मुकाम को हासिल कर सकता है...यह लाइन राजस्थान के बूंदी जिले के 19 वर्षीय सूरज सैनी पर सटीक (Suraj Saini Success Story) बैठती है। गुजर बसर के लिए वर्षों से रंगाई पुताई का काम करने वाले सूरज ने नीट में 99.16 पर्सेंटाइल हासिल किए, जिससे उनके मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने और डॉक्टर बनने की राह (Suraj Saini Success Story In Hindi) खुल गई।
कापरेन कस्बे के रहने वाले सूरज ने नीट में 583 अंकों के साथ अखिल भारतीय स्तर पर 16,569वीं और अन्य पिछला वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में 7,800वीं रैंक हासिल की, जिससे उन्हें किसी प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज में आसानी से एडमिशन मिल सकेगा।
सूरज के लिए आसान नहीं था ये सफर
कोटा स्थित एलन करियर इंस्टिट्यूट के छात्र सूरज के लिए यह उपलब्धि सिर्फ एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्षों से भरे बचपन से निकलकर नए जीवन की ओर बढ़ाया गया एक बड़ा कदम है। आर्थिक तंगी और माता पिता के अलगाव जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने यह मुकाम हासिल किया। सूरज की कहानी कठिन संघर्ष, अटूट हौसले और बेहतर जीवन हासिल करने के अथक प्रयासों की मिसाल है। सूरज अपनी मां घीसी बाई और छोटी बहन गरिमा के साथ रहता है। घीसी बाई खेतिहर मजदूर हैं, जबकि गरिमा को आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। सूरज के पिता परिवार से अलग रहते हैं।
सरकारी स्कूल से की कक्षा 8वीं तक की पढ़ाई
सूरज ने कक्षा आठ तक की पढ़ाई कापरेन के एक सरकारी स्कूल से की। माता-पिता के अलगाव के बाद वह अपनी मां और बहन के साथ तालेड़ा क्षेत्र के अलकोदिया गांव स्थित अपने ननिहाल में रहने लगा। वहीं, उसने स्थानीय स्कूल में कक्षा नौ में दाखिला लिया और मन लगाकर पढ़ाई की।
उसने कक्षा 10 में 87 फीसदी और कक्षा 12 में 85 फीसदी अंक हासिल किए। जोधपुर के स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद पर कार्यरत अपनी मौसी से प्रेरित होकर उसने जीव विज्ञान विषय चुना और डॉक्टर बनने का सपना देखा।
स्कूल के बाद करते थे पेंटर का काम
हालांकि यह सूरज के लिए आसान नहीं था। परिवार के लिए रोजमर्रा के खर्च पूरे करना लगातार एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। विपरीत परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय सूरज ने जिम्मेदारी उठाई और अपने मामा के मार्गदर्शन में रंगाई पुताई का काम सीखा। वह छुट्टियों के दिन और स्कूल के बाद के समय में पुताई का काम करता था, ताकि घर का खर्च चलाने में मां की मदद कर सके।
सूरज के मुताबिक, बचपन में अपनी मां को दिनभर खेतों में पसीना बहाता देख उसे डॉक्टर बनने के लिए कड़ी मेहनत करने की प्ररेणा मिली।
आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते बहन को पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी
उसने कहा, मैं अपने परिवार को गरीबी और मुश्किल हालात से बाहर निकालना चाहता था। हमारी आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण मेरी बहन को पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी, लेकिन अब मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि वह अपनी शिक्षा दोबारा शुरू करे। सूरज ने कहा, मेरी मां ने खेतों में मजदूरी करके और मुझे पुताई के काम से मिलने वाले पैसे बचाए। कुछ साल पहले हमने अलकोदिया गांव में दो कमरों और बरामदे वाला खुद का घर बनाया। मैंने पूरे घर की पुताई खुद की।
सूरज के अनुसार, कोटा के एलन करियर इंस्टिट्यूट और एलएन माहेश्वरी परमार्थ ट्रस्ट के शिक्षा संबल कार्यक्रम के बिना वह इस परीक्षा में इतनी बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाता।
इनपुट- भाषा
