69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब अभ्यर्थियों की नजरें अगले बड़े फैसले पर टिकी हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि इस मामले को अब और लंबे समय तक टाला नहीं जा सकता। यानी वर्षों से न्याय और नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अब निर्णायक दौर शुरू हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजरिया की पीठ ने संकेत दिया है कि अब इस मामले का व्यापक रूप से निपटारा किया जाना है। कोर्ट ने 8, 9 और 10 सितंबर को लगातार सुनवाई करने की बात कही है। ऐसे में सितंबर का महीना 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद अब अभ्यर्थियों की नजरें अगले बड़े फैसले पर टिकी हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि इस मामले को अब और लंबे समय तक टाला नहीं जा सकता। यानी वर्षों से न्याय और नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अब निर्णायक दौर शुरू हो गया है।
उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद लंबे समय से अदालत में चल रहा है। मामला मुख्य रूप से भर्ती में आरक्षण लागू करने में कथित अनियमितताओं और उससे प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार की सुनवाई में कहा कि अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर जल्द फैसला होना चाहिए और मामले को लगातार आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। अब सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 69 हजार शिक्षक भर्ती का अंतिम समाधान कब और किस तरीके से होगा?
क्या है मामला
दरअसल, इस भर्ती को लेकर विवाद के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लंबे समय से असमंजस में हैं। कौन अपनी नौकरी पर बना रहेगा, किसे नियुक्ति मिलेगी और आरक्षण से जुड़े विवाद का समाधान किस तरह होगा—इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी बाकी है। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार भी सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रख चुकी है। हाल ही में सरकार ने हलफनामा दाखिल करते हुए कहा था कि मौजूदा शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रखने के विकल्प पर भी विचार किया गया है।
अब आगे क्या
फिलहाल इतना जरूर साफ है कि अदालत अब मामले को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने के पक्ष में नहीं है। सितंबर में होने वाली लगातार सुनवाई के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ हो सकती है। यानी 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के लिए अब तारीख पर तारीख नहीं, बल्कि फैसले की उम्मीद बढ़ गई है।
