नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाओं के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। लेकिन एजेंसी को पूरी तरह बदल देना सही रास्ता नहीं है। पूर्व UGC चेयरमैन मामिडाला जगदेश कुमार ने कहा है कि NTA को अंदर से ज्यादा मजबूत बनाने की जरूरत है। पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसे सिर्फ पेपर लीक के नजरिए से नहीं, बल्कि पूरे एग्जाम सिस्टम की सुरक्षा के तौर पर देखना चाहिए। NTA हर साल एक करोड़ से ज्यादा छात्रों के लिए परीक्षा कराता है। इतने बड़े स्तर पर सुरक्षा सिर्फ एक चीज पर निर्भर नहीं करती। इसमें सब्जेक्ट एक्सपर्ट, डिजिटल सिस्टम, प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट, सेंटर, इनविजिलेटर और कई सर्विस प्रोवाइडर शामिल होते हैं।
केंद्र सरकार ने NEET-UG पेपर लीक के बाद NTA को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस मामले में छात्रों ने बड़ा विरोध किया था और बाद में UGC-NET में भी गड़बड़ी सामने आई थी। सरकार ने इसके बाद नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में हाई लेवल कमेटी बनाई और नकल रोकने के लिए नया कानून भी संसद में पास किया गया।
राधाकृष्णन कमेटी ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया की जांच की थी। कमेटी ने बेहतर SOP, डेटा सुरक्षा और राज्यों के साथ बेहतर तालमेल की सिफारिश की थी। जगदेश कुमार के मुताबिक सरकार और NTA ने इनमें से कई सुझावों पर काम शुरू कर दिया है। जुलाई में सरकार ने बताया था कि 46 में से 35 बड़े एक्शन पॉइंट लागू हो चुके हैं।
क्या NTA पर काम का बोझ ज्यादा है?
इस सवाल पर उन्होंने कहा कि काम बहुत बड़ा जरूर है, लेकिन सिर्फ एग्जाम की संख्या देखकर ये कहना ठीक नहीं कि एजेंसी पर बोझ है। असली चुनौती हर परीक्षा के पीछे की जटिलता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग एजेंसियों को एग्जाम बांटने से समस्या हल नहीं होगी। एक ही नेशनल टेस्टिंग बॉडी होने से सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और रिजल्ट का एक जैसा स्टैंडर्ड बना रहता है। कई एजेंसियां बनेंगी तो खर्च बढ़ेगा और सुरक्षा में असमानता आएगी।
उनके मुताबिक हर चरण की ट्रेसेबिलिटी जरूरी है। क्वेश्चन बनना, ट्रांसलेशन, रिव्यू, स्टोरेज, प्रिंटिंग और सेंटर तक पहुंचने तक हर हैंडओवर का रिकॉर्ड होना चाहिए। NTA के पास पहले से अनुभव, टेक्नोलॉजी और सेंटर का बड़ा नेटवर्क है। इसे खत्म करने की जगह सुधारना बेहतर है। उन्होंने तीन कामों को तुरंत प्राथमिकता देने की बात कही। पहला, पूरी परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाना। दूसरा, टेस्ट डिजाइन, साइबर सिक्योरिटी और लॉजिस्टिक्स के लिए परमानेंट एक्सपर्ट टीम तैयार करना। तीसरा, सेंटरों पर CCTV, बायोमेट्रिक, बिजली और ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं पक्की करना।
