Mahaparinirvan Diwas 2025 Speech, Essay: महापरिनिर्वाण दिवस पर भाषण और निबंध, जानें बाबा साहब की पुण्यतिथि पर क्यों मनाया जाता है महापरिनिर्वाण दिवस
- Authored by: आदित्य सिंह
- Updated Dec 6, 2025, 08:06 AM IST
Mahaparinirvan Diwas 2025 Speech, Essay In Hindi, BR Ambedkar Jivan Parichay: हर साल बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। लंबी बीमारी के चलते 6 दिसंबर 1956 को भीमराव अंबेडकर का निधन हो गया था। आज बाबा साहब की 70वीं पुण्यतिथि है। ऐसे में यहां हम आपके लिए महापरिनिर्वाण दिवस पर भाषण और निबंध लेकर आए हैं।
Mahaparinirvan Diwas 2025 Speech, Essay In Hindi: महापरिनिर्वाण दिवस पर भाषण और निबंध
Mahaparinirvan Diwas 2025 Speech, Essay In Hindi, BR Ambedkar Jivan Parichay: हर साल बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में 6 दिसंबर को महापरिनिर्वाण दिवस (Mahaparinirvan Diwas Speech In Hindi) मनाया जाता है। भारत के महान समाज सुधारक, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की आज 70वीं (Mahaparinirvan Diwas Essay In Hindi) पुण्यतिथि है। लंबी बीमारी के बाद 6 दिसंबर 1956 को उनका निधन हो गया था। इससे कुछ समय पहले अक्टूबर 1956 में उन्होंने लाखों अनुयायियों के साथ नागपुर में बौद्ध धर्म स्वीकार किया था। उन्होंने लोगों को शांति, करुणा और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। ऐसे में उनकी पुण्यतिथि को देशभर में महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। महापरिनिर्वाण शब्द बौद्ध परंपरा से जुड़ा है, जिसका अर्थ आत्मा का अंतिम और पूर्ण शांति की अवस्था में प्रवेश। इसलिए यह दिन उनके जीवन के आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों पहलुओं को दर्शाता है।
बाबा साहब भगवान बुद्ध की तरह काफी सदाचारी थे। बचपन से ही उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा, उन्होंने अपने पूरा जीवन जातिवाद को खत्म करने और गरीब, दलित, पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। कहा जाता है कि वह अपने महान व सदाचारी जीवन की वजह से निर्वाण प्राप्त कर चुके थे। यही कारण है कि हर साल उनकी पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। यहां हम आपके लिए महापरिनिर्वाण दिवस पर भाषण व निबंध लेकर आए हैं। इस तरह आप अपने स्कूल, कॉलेज या अन्य शैक्षणिक संस्थानों व सरकारी कार्यालयों में भाषण दे सकते हैं और निबंध लिख सकते हैं।
Mahaparinirvan Diwas Jivan Parichay: भीमराव अंबेडकर की जीवनी
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में एक सैन्य छावनी में हुआ। वे अपने माता-पिता, रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई, की 14वीं और अंतिम संतान थे। उनके पिता भारतीय सेना में सूबेदार थे और कबीर पंथ के अनुयायी थे। अंबेडकर का परिवार महार जाति से था, जिसे उस समय अछूत माना जाता था। कहा जाता है कि बाबा साहब का असली नाम भिवा रामजी सकपाल था। बाद में उनके शिक्षक कृष्णा केशव अंबेडकर ने उनके उपनाम को आंबडवेकर से बदलकर अंबेडकर कर दिया।
Mahaparinirvan Diwas Speech, Essay In Hindi: महापरिनिर्वाण दिवस पर भाषण और निबंध
आदरणीय प्रधानाचार्य जी, उप प्रधानाचार्य जी, शिक्षकगण व मेरे प्रिय साथियों आज हम सभी महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर एकत्रित हुए हैं। 1956 में यही वह दिन था भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने इस दिन को अलविदा कह दिया था। आज यानी 6 दिसंबर को उनकी 70वीं पुण्यतिथि है। बाबा साहेब भारतीय समाज के ऐसे महानायक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन समानता, न्याय और मानवाधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। साथ ही उन्होंने सामाजिक भेदभाव का सामना करते हुए भी अपने ज्ञान, शिक्षा, मेहनत और दृढ़ इच्छा शक्ति से यह साबित कर दिया कि शिक्षा दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है।
वह भारतीय संविधान सभी के संविधान सभा की मसौदा समिति के अध्यक्ष, प्रथम कानून मंत्री, और भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार रहे। ऐसे में आज के दिन हमें ना केवल बाबा साहब को श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए बल्कि उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। कहा जाता है कि बाबा साहब की दुनिया में सबसे ज्यादा प्रतिमाएं हैं। उनकी पढ़ाई लिखाई की बात की जाए तो उन्हें 64 विषयों में मास्टरी हासिल की थी। साथ ही उन्हें 9 भाषाएं आती थीं। उनके पास कुल 32 डिग्रियां थीं। इसके अलावा उन्होंने 1 सालों तक दुनिया के सभी धर्मों के बारे में बारीकी से पढ़ाई की।