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Loco Pilot: रेल ड्राइवर का काम क्या होता है? ड्यूटी, जिम्मेदारी और शिफ्ट की पूरी जानकारी

Loco Pilot Work Duty Resposibility working hour: भारतीय रेलवे में रेल ड्राइवर को लोको पायलट नाम से जाना जाता है। यात्रियों और माल को सुरक्षित और समय पर मंजिल तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर होती है।

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रेल ड्राइवर का काम क्या होता है? ड्यूटी, जिम्मेदारी और शिफ्ट की पूरी जानकारी (Image - chatgpt)

Loco Pilot Kya Hota Hai Work Duty Resposibility working hour: भारतीय रेलवे में रेल ड्राइवर को लोको पायलट नाम से जाना जाता है। यात्रियों और माल को सुरक्षित और समय पर मंजिल तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर होती है। अगर आप सोच रहे हैं कि रेल ड्राइवर का काम क्या होता है? रेल ड्राइवर की ड्यूटी में क्या होता है? रेल ड्राइवर की जिम्मेदारी क्या होती है? या रेल ड्राइवर की नौकरी कितने घंटे की होती है, तो चलिए आसान भाषा में समझते हैं।

1. रेल ड्राइवर का काम क्या होता है?

रेल ड्राइवर का मुख्य काम इंजन को सही तरीके से चलाना होता है। लेकिन ये किसी कार में स्टीयरिंग घुमाने जैसा नहीं है। ड्राइवर को ट्रेन को निर्धारित स्पीड पर चलाना, सिग्नल देखना, ब्रेक लगाना, और किसी भी इमरजेंसी में तुरंत फैसला लेना होता है।

एक ट्रेन में आमतौर पर 2 ड्राइवर होते हैं:

  • लोको पायलट
  • असिस्टेंट लोको पायलट

लोको पायलट ट्रेन चलाते हैं जबकि असिस्टेंट लोको पायलट मशीन की निगरानी करता है और जरूरत पड़ने पर मदद करता है।

Loco Pilot

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2. रेल ड्राइवर की ड्यूटी में क्या होता है?

ड्यूटी शुरू करने से पहले और दौरान ड्राइवर को कई काम करने होते हैं:

  • ड्यूटी से पहले: इंजन की जांच करना, लॉगबुक भरना, ब्रेक और सिग्नल सिस्टम चेक करना।
  • ड्यूटी के दौरान: सिग्नल और स्पीड लिमिट का पालन करना, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम से संपर्क में रहना, ट्रैक पर कोई रुकावट दिखे तो तुरंत ब्रेक लगाना।
  • ड्यूटी के बाद: इंजन की रिपोर्ट देना, अगर कोई तकनीकी दिक्कत हुई हो तो उसे नोट करना।
साथ ही मौसम खराब हो, कोहरा हो, या रात का समय हो, तब भी ड्राइवर को पूरा अलर्ट रहना पड़ता है।

3. रेल ड्राइवर की जिम्मेदारी क्या होती है?

रेल ड्राइवर की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यात्रियों और ट्रेन की सुरक्षा करना है। हजारों यात्रियों की जान उनके फैसले पर निर्भर करती है। इसके अलावा समय पर ट्रेन चलाकर शेड्यूल मेंटेन करना। इंजन और कोच में कोई तकनीकी दिक्कत दिखे तो तुरंत रिपोर्ट करना। रेलवे के नियमों और सेफ्टी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना भी इनकी जिम्मेदारी है। एक छोटी सी गलती भी बड़ा हादसा बन सकती है, इसलिए ये काम हाई अलर्ट और फोकस मांगता है।

4. रेल ड्राइवर की नौकरी कितने घंटे की होती है?

रेलवे में शिफ्ट सिस्टम चलता है। आमतौर पर एक ड्राइवर की ड्यूटी 8 से 10 घंटे की हो सकती है। लंबी दूरी की ट्रेनों में ड्राइवर बदलने के लिए बीच में क्रू चेंज पॉइंट होते हैं। ड्यूटी के बाद आराम के लिए रनिंग रूम में आराम की व्यवस्था होती है। हफ्ते में एक साप्ताहिक आराम भी मिलता है, लेकिन त्योहारों और भीड़ के समय शिफ्ट बढ़ सकती है। रात, दिन, संडे, हॉलिडे - ट्रेन कभी नहीं रुकती, इसलिए ड्राइवर की ड्यूटी भी रोटेशन में चलती है।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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