आज के समय में रिटायरमेंट (Retirement) का मतलब केवल नौकरी से छुट्टी लेना नहीं रह गया है। आपको यह समझने की जरूरत है कि यह जीवन का एक लंबा दौर होता है, जिसमें नियमित आय बंद हो जाती है और खर्चों के लिए पूरी तरह अपनी बचत पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में अगर रिटायरमेंट (Retirement Planning Mistakes) से जुड़ी कुछ गलतियां कर दी जाएं तो वर्षों की मेहनत से जोड़ी गई पूंजी भी जल्दी खत्म हो सकती है।
जानकारों की मानें तो रिटायरमेंट से पहले और उसके बाद के शुरुआती पांच साल सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसी दौरान लिया गया कोई गलत वित्तीय फैसला, जैसे बाजार में गिरावट के समय घबराकर निवेश निकाल लेना या महंगाई का सही अनुमान न लगाना, भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
रिटायरमेंट फंड का सही अनुमान लगाना जरूरी
रिटायरमेंट प्लानिंग की शुरुआत यह समझने से होती है कि भविष्य में आपको कितने पैसों की जरूरत होगी। कई लोग यह मान लेते हैं कि आज जितने खर्च हैं, रिटायरमेंट के समय भी उतने ही रहेंगे। जबकि महंगाई लगातार बढ़ती रहती है।
उदाहरण के लिए अगर आज आपके परिवार का मासिक खर्च 1 लाख रुपये है और रिटायरमेंट में अभी 20 साल बाकी हैं, तो औसत महंगाई दर के हिसाब से यही खर्च बढ़कर लगभग 3.2 लाख रुपये प्रति माह हो सकता है।
यही वजह है कि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स रूल ऑफ 30 अपनाने की सलाह देते हैं। इसके अनुसार, रिटायरमेंट के समय जितना सालाना खर्च होने का अनुमान हो, उसे 30 से गुणा कर आवश्यक रिटायरमेंट फंड का अनुमान लगाया जा सकता है। अगर रिटायरमेंट के बाद सालाना 40 लाख रुपये की जरूरत होगी तो करीब 12 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार करना पड़ सकता है।
निवेश को अलग-अलग हिस्सों में बांटें
रिटायरमेंट के लिए केवल पैसा जमा करना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से निवेश करना भी जरूरी है। कई लोग पूरी रकम शेयर बाजार में रखते हैं, जबकि कुछ पूरी पूंजी फिक्स्ड डिपॉजिट में डाल देते हैं। दोनों ही तरीके जोखिम भरे हो सकते हैं। विशेषज्ञ इसके लिए बकेट स्ट्रैटेजी अपनाने की सलाह देते हैं।
पहला बकेट अगले 1 से 5 वर्षों के खर्च के लिए होना चाहिए। इसमें फिक्स्ड डिपॉजिट, लिक्विड फंड या शॉर्ट-टर्म बॉन्ड जैसे सुरक्षित निवेश रखे जा सकते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर बाजार में गिरावट के दौरान निवेश बेचने की नौबत न आए।
दूसरा बकेट 6 से 15 वर्षों की जरूरतों के लिए बनाया जाता है। इसमें कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड और अच्छी क्वालिटी के डेट निवेश शामिल किए जा सकते हैं, जो समय के साथ पहले बकेट को दोबारा भरने में मदद करते हैं।
तीसरा बकेट 15 साल या उससे अधिक अवधि के लिए होता है। इसमें इक्विटी इंडेक्स फंड जैसे ग्रोथ निवेश रखे जाते हैं, जिससे लंबी अवधि में महंगाई को मात देने में मदद मिलती है।
मेडिकल खर्चों के लिए अलग तैयारी करें
रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा खर्च इलाज पर आ सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं की महंगाई अक्सर 10 प्रतिशत या उससे अधिक रहती है। इसलिए अस्पताल के खर्च रिटायरमेंट फंड से निकालने के बजाय अलग से पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस और सुपर टॉप-अप पॉलिसी लेना बेहतर माना जाता है। इससे आपकी रिटायरमेंट बचत सुरक्षित रहती है।
रिटायरमेंट के करीब पहुंचकर न करें ये गलतियां
अगर 50 वर्ष की उम्र के आसपास यह महसूस हो कि रिटायरमेंट फंड लक्ष्य से काफी पीछे है, तो घबराकर ज्यादा जोखिम वाले निवेश में पैसा लगाना सही फैसला नहीं होगा। ऐसी स्थिति में बचत बढ़ाना, गैर-जरूरी खर्च कम करना या जरूरत पड़ने पर रिटायरमेंट कुछ साल आगे बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
