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कारगिल योद्धा के बेटे ने रचा इतिहास: IIM की सीट छोड़ चुनी देश की सेवा, Indian Navy में बने अधिकारी

Ritesh Kumar Singh Success Story: IIM की सीट छोड़कर बिहार के रितेश कुमार सिंह ने भारतीय नौसेना को चुना। कारगिल योद्धा पिता से मिली देशभक्ति की प्रेरणा लेकर, वे कड़ी ट्रेनिंग पूरी कर नौसेना में सब-लेफ्टिनेंट ऑफिसर बन गए हैं।

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कारगिल योद्धा के बेटे ने रचा इतिहास

Rites Kumar Singh Success Story: कहते हैं कि सपनों की उड़ान एक इंसान तभी भर सकता है, जब उसके हौसले बुलंद हो और अगर यह हौसला देशभक्ति के रंग में रंगा हो तो दुनिया की कोई भी चकाचौंध आपके रास्ते की बाधा नहीं बन सकती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बिहार के रोहतास जिले के रहने वाले रितेश कुमार सिंह ने, जिन्होंने IIM की सीट छोड़ देशभक्ति का रास्ता चुना। जी हां रितेश ने कॉर्पोरेट जगत के करोड़ों रुपये के चमचमाते करियर और देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIM को छोड़कर भारतीय नौसेना (Indian Navy) ज्वाइन की। रितेश केरल के एझिमाला स्थित इंडियन नेवल एकेडमी में आयोजित पासिंग आउट परेड के बाद भारतीय नौसेना में सब-लेफ्टिनेंट के पद पर ऑफिसर बन गए हैं। आइए उनके बारे में विस्तार के जानते हैं।

विरासत में मिली देशभक्ति

रितेश को देशभक्ति का जज्बा विरासत में मिला है। जी हां, उनके पिता धीरेंद्र कुमार सिंह भारतीय सेना के एक जांबाज सिपाही रहे हैं, जिन्होंने साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर लड़ाई लड़ी थी। बचपन से ही घर में सेना के अनुशासन, वर्दी के सम्मान और देश के लिए मर-मिटने की कहानियों सुनते हुए बड़े हुए रितेश ने के मन में पिता की इसी वीरगाथा ने देशभक्ति और देश की सेवा करने का बीज बोया।

IIM का बुलावे को ठुकराया

रितेश न केवल खेल-कूद और शारीरिक गतिविधियों में आगे रहे, बल्कि पढ़ाई के मामले में भी वे हमेशा अव्वल थे। अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया। उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने मैनेजमेंट के क्षेत्र में सबसे कठिन परीक्षा पास कर IIM में अपना स्थान पक्का किया। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है बात यह थी अन्य छात्रों की तरह रितेश ने आईआईएम से एमबीए कर बड़ी कंपनियों में लाखों-करोड़ों के पैकेज प्राप्त करने का सपना नहीं देखा।

दिल की सुनी पुकार

IIM में दाखिले का मौका मिलने के बाद भी रितेश के दिल में देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने का सपना हिलोरें ले रहा था। जब एक तरफ कॉर्पोरेट की आलीशान जिंदगी थी और दूसरी तरफ देश सेवा का कठिन मार्ग, तो रितेश ने बिना किसी झिझक के भारतीय नौसेना की कमिशंड ऑफिसर की परीक्षा (INET/CDS) को प्राथमिकता दी। उन्होंने IIM की सीट को छोड़ दिया और नौसेना की कठिन चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पास करके ट्रेनिंग के लिए नेवल एकेडमी पहुंचे। रितेश का मानना था कि आत्मसंतुष्टि और देश की सेवा का जो गौरव सफेद वर्दी पहनने में है, वह किसी भी कॉर्पोरेट दफ्तर में नहीं मिल सकता।

पासिंग आउट परेड में छलके खुशी के आंसू

केरल के एझिमाला में आयोजित हुई नेवल एकेडमी में जब पासिंग आउट परेड हुई, तो रितेश के कंधों पर सब-लेफ्टिनेंट के स्टार चमके, तो वहां मौजूद उनके कारगिल योद्धा पिता और पूरे परिवार की आंखें खुशी से नम हो गई। एक सैनिक पिता के लिए इससे बड़े गर्व की बात क्या होगी कि उनका बेटा भी अब देश की रक्षा के लिए अधिकारी बन चुका है।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहा author

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्... और देखें

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