एजुकेशन

किस एक्ट से भारत को मिला था 1 लाख का पहला शिक्षा बजट, जिसने खोले भारतीयों के लिए एजुकेशन के द्वार

India First Education Budget: 200 सालों के राज में अंग्रेजों ने कई कड़े कानूनों के साथ बहुत कुछ दिया है। लेकिन अंग्रेजों द्वारा लागू किए गए एक एक्ट के माध्यम से भारत को उसका पहला शिक्षा बजट मिला, जिसे शिक्षा की नींव रखी गई। आइए आपको प्रतियोगी परीक्षा में पूछे जाने वाले इस महत्वपूर्ण एक्ट के बारे में बताएं।

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किस एक्ट से भारत को मिला था पहला शिक्षा बजट (Photo- Canva)

India First Education Budget: 1 फरवरी 2026 को केंद्रीय बजट 2026 27 पेश किया गया। इस दौरान वित्त मंत्री सीतारमण ने शिक्षा बजट में 8.27% की वृद्धि कर इसे 1.39 लाख करोड़ रुपये कर दिया। लेकिन इस बीच आपने कभी सोचा कि भारत को उसका पहला शिक्षा बजट कैसे मिला था। बता दें कि एक एक्ट के माध्यम से भारत को उसका पहला शिक्षा बजट मिला था। भारत में अंग्रेजों ने 200 सालों तक राज किया है। उस दौरान अंग्रेजों ने समय समय पर भारत में कई महत्वपूर्ण और बदलाव किए और कई कड़े कानून भी लागू किए। जिससे एक तरह भारतीयों के हितों को नुकसान हुआ और उनके अधिकार उनसे छीने गए लेकिन इस बीच शिक्षा की नींव भी रखी गई और यह केवल एक एक्ट के माध्यम से हुआ। आइए आज आपको उस एक्ट के बारे में बताएं, जिससे देश को मिला था उसका पहला शिक्षा बजट।

किस एक्ट से मिला था देश को पहला शिक्षा बजट

अंग्रेजों ने भारत पर 200 साल के राज में देश में कई कड़े कानून लागू किए थे। उन्हीं कानूनों में से एक एक्ट था 'चार्टर एक्ट 1813'। जिससे भारत को पहला बजट मिला था। इस एक्ट ने न केवल भारत को उसका शिक्षा बजट दिया, बल्कि 20 साल से अंग्रेजों का शासन भी बढ़ा दिया, लेकिन विभिन्न नियमों के साथ, जिसमें व्यापार पर ईस्ट इंडिया कंपनी का एकाधिकार खत्म होना और उसकी शक्तियों को सीमित करना भी शामिल था।

चार्टर एक्ट 1813 से खुले व्यापारियों के लिए दरवाजे

इस एक्ट के माध्यम से भारत में व्यापार से कंपनी का एकाधिकार खत्म तो हुआ ही, साथ ही साथ इसने सभी व्यापारियों के लिए दरवाजे भी खोल दिए। इससे किसी एक पास व्यापार का अधिकार खत्म हो गया और सभी व्यापारियों को व्यापार करने का मौका मिला।

पहले शिक्षा बजट कितना था?

जैसा कि अभी आपको बताया कि चार्ट एक्ट 1913 के माध्यम से भारत को उसका पहला शिक्षा बजट मिला था। आइए अब आपको उसकी राशि के बारे में भी बताएं। पहले शिक्षा बजट में देश को 1 लाख रुपये की सालाना राशि तय की गई थी। इस राशि के भारत में शिक्षा की नींव रखी गई थी। लेकिन यह बात शिक्षा और उसके बजट पर भी खत्म नहीं हुई। इसे लेकर शिक्षा नीति को लेकर काफी विवाद हुआ, जिसे ओरिएंटलिस्ट एंगिलिस्टिक विवाद के नाम से जाना गया। इसमें कई लोग संस्कृत/फारसी शिक्षा के समर्थन में थे तो वहीं आंग्लवादी अंग्रेजी शिक्षा के समर्थक थे।

ईस्ट इंडिया कंपनी नहीं बल्कि ब्रिटिश क्राउन का संप्रभुता

चार्टर एक्ट 1813, वही एक्ट था, जिसके माध्यम से संप्रभुता ईस्ट इंडिया कंपनी की बजाए ब्रिटिश क्राउन के हाथ में रही। हालांकि भारत का क्षेत्र ईस्ट इंडिया कंपनी के पास ही था। लेकिन असली अधिकार केवल ब्रिटिश सरकार के पास था। यही वजह रही की ईस्ट इंडिया कंपनी एक मैनेजमेंट के तौर पर बनकर रह गई।

क्यों लागू किया गया था 'चार्टर एक्ट 1813'

इस सबके बीच एक महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि 'चार्टर एक्ट 1813' लागू क्यों किया गया था? बता दें कि इस समय यूरोप में नेपोलियन बोनापार्ट का दबदबा अधिक था और बर्लिन डिक्री के माध्यम से यूरोप में बिट्रिश व्यापार पर रोक लगा दी गई थी। इससे ब्रिटिश व्यापार को बहुत नुकसान हुआ। इसके बाद भारत में व्यापार की मांग उठी। इसके साथ ही ईसाई धर्म के प्रचार प्रसार को लेकर ईसाई मिशनरी की मांग दबाव में बदल गई और इस एक्ट को लागू किया गया।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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