Times Now Navbharat
live-tv
Premium

Mojtaba Khamenei के बाद किसके हाथ में होगी ईरान की कमान? टॉप नेताओं में किसका नाम सबसे आगे

मोजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर इजरायल के दावे के बाद अटकलें तेज हैं, जबकि ईरान ने उनका एक वीडियो जारी किया है। उनकी मौजूदा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अगर उनकी मौत होती है, तो अंतरिम नेतृत्व के बाद असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करेगी। आइए समझते हैं पूरी प्रक्रिया।

Image
Mojtaba Khamenei Health Update: मोजतबा के बाद ईरान में किसकी होगी ताजपोशी? सामने आए संभावित दावेदारों के नाम। AI IMAGE
Authored by: Piyush Kumar
Updated Aug 9, 2026, 12:56 IST
Follow on Google News

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की हालत कैसी है? क्या वह स्वस्थ हैं या उनकी स्थिति गंभीर है? इन सवालों की चर्चा इसलिए तेज हो गई है, क्योंकि हाल ही में इजरायल की ओर से उनकी सेहत को लेकर बड़ा दावा किया गया है।

इजराइली मीडिया ने दावा किया है कि मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) की हालत नाजुक है और “दुनिया को किसी भी वक्त उनकी मौत की खबर मिल सकती है।” दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले में मोजतबा के पिता और ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया। हालांकि, इसके बाद से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।

इजरायल के इस दावे के बाद ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज ने मोजतबा खामेनेई का एक वीडियो जारी किया। हालांकि, वीडियो कब का है, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। वीडियो में मोजतबा धार्मिक शिक्षा देते हुए नजर आ रहे हैं।

ईरानी मीडिया ने मोजतबा खामेनेई की तस्वीर जारी की।

ईरानी मीडिया ने मोजतबा खामेनेई की तस्वीर जारी की।

यानी दोनों देशों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन मोजतबा खामेनेई की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी वजह से मोजतबा खामेनेई की मृत्यु हो जाती है, तो ईरान की सत्ता किसके हाथ में जाएगी? इसका जवाब किसी एक व्यक्ति के नाम में नहीं, बल्कि ईरान के बेहद जटिल संवैधानिक और धार्मिक सत्ता तंत्र में छिपा है।

ईरान में असली ताकत किसके पास होती है?

ईरान में राष्ट्रपति देश का सबसे शक्तिशाली संवैधानिक पद नहीं है। वहां सुप्रीम लीडर के पास राष्ट्रपति से कहीं ज्यादा रणनीतिक, सैन्य और सुरक्षा संबंधी अधिकार होते हैं। सुप्रीम लीडर देश की व्यापक राष्ट्रीय नीतियों की दिशा तय करता है, सशस्त्र बलों का सर्वोच्च कमांडर होता है और ईरान की सुरक्षा व्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभाता है। इसी वजह से सुप्रीम लीडर की कुर्सी खाली होना केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि पूरे सत्ता तंत्र के लिए बेहद बड़ा घटनाक्रम होता है।

मौजूदा सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई मार्च 2026 में अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह इस पद पर पहुंचे थे। ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स यानी मजलिस-ए-खुबरगान ने उन्हें देश का तीसरा सुप्रीम लीडर चुना था।

अगर मोजतबा की मौत होती है तो सबसे पहले क्या होगा?

ऐसी स्थिति में ईरान सीधे राष्ट्रपति के हाथ में नहीं चला जाएगा। ईरानी संविधान के अनुच्छेद 111 के तहत सुप्रीम लीडर की मृत्यु, बर्खास्तगी या नेतृत्व करने में असमर्थता की स्थिति में एक अंतरिम व्यवस्था बनाई जा सकती है।

मार्च 2026 में अली खामेनेई की मृत्यु के बाद इसी व्यवस्था को सक्रिय किया गया था। उस समय तीन सदस्यीय अंतरिम नेतृत्व परिषद बनाई गई थी। इसमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, न्यायपालिका प्रमुख गोलाम-हुसैन मोहसिनी-एजेई और वरिष्ठ धर्मगुरु अलीरेजा अराफी शामिल थे। यानी अगर मोजतबा खामेनेई की अचानक मृत्यु होती है, तो सत्ता में तत्काल शून्य पैदा होना जरूरी नहीं है। एक अंतरिम नेतृत्व व्यवस्था देश के सर्वोच्च नेता की शक्तियों को संभाल सकती है, जब तक कि नया सुप्रीम लीडर चुन नहीं लिया जाता।

मोजतबा खामेनेई की हालत बेहद नाजुक: इजरायल का दावा

मोजतबा खामेनेई की हालत बेहद नाजुक: इजरायल का दावा

नया सुप्रीम लीडर कौन चुनेगा?

यहीं से ईरान की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स यानी मजलिस-ए-खुबरगान की भूमिका शुरू होती है। यह वरिष्ठ इस्लामी धर्मगुरुओं की संस्था है और संवैधानिक रूप से सुप्रीम लीडर को चुनने की जिम्मेदारी इसी के पास है। ईरानी संविधान के अनुच्छेद 107 के अनुसार, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स योग्य इस्लामी न्यायविदों में से उस व्यक्ति का चयन करती है, जिसे धार्मिक ज्ञान, राजनीतिक-सामाजिक समझ और नेतृत्व क्षमता के लिहाज से उपयुक्त माना जाए।

इसका मतलब साफ है कि मोजतबा की जगह उनका बेटा, भाई या कोई पसंदीदा नेता अपने आप सुप्रीम लीडर नहीं बन सकता। उम्मीदवार को संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरना होगा और अंतिम फैसला असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स करेगी।

क्या मोजतबा के परिवार का कोई सदस्य अगला नेता बन सकता है?

सैद्धांतिक रूप से कोई भी योग्य धर्मगुरु उम्मीदवार बन सकता है। लेकिन सिर्फ इसलिए कि वह खामेनेई परिवार से है, उसे सुप्रीम लीडर का पद नहीं मिल जाएगा। मोजतबा का सुप्रीम लीडर बनना पहले ही इसलिए असाधारण था, क्योंकि उन्होंने अपने पिता अली खामेनेई के बाद सीधे वही पद संभाला। इससे ईरानी इस्लामी गणराज्य में सत्ता के वंशानुगत होने को लेकर बहस भी तेज हुई।

मोजतबा को लंबे समय से ईरान के सत्ता गलियारों और खासकर सुरक्षा प्रतिष्ठान के प्रभावशाली हलकों से नजदीकी रखने वाला व्यक्ति माना जाता रहा है। उनके चयन से ईरान के कट्टरपंथी सत्ता तंत्र की पकड़ मजबूत हुई थी। हालांकि, उनकी मृत्यु की स्थिति में उसी तरह का दूसरा उत्तराधिकार तय होना जरूरी नहीं है।

जानें ईरान के सर्वोच्च नेता की शक्तियां क्या-क्या है। AI IMAGE

जानें ईरान के सर्वोच्च नेता की शक्तियां क्या-क्या है। AI IMAGE

कौन-कौन हो सकते हैं संभावित दावेदार?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मोजतबा की मृत्यु की स्थिति में अभी कोई आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित नहीं है। मार्च 2026 में अली खामेनेई के उत्तराधिकारी के लिए जिन नामों पर चर्चा हुई थी, उनमें वरिष्ठ धर्मगुरु अलीरेजा अराफी और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली नेता अली लारीजानी जैसे नाम शामिल थे। उस समय मोजतबा का नाम भी प्रमुख दावेदारों में था और अंततः उन्हें चुना गया। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। इसलिए इन नामों को “अगला सुप्रीम लीडर तय” मानना जल्दबाजी होगी।

संभावित उत्तराधिकारी के नाम

1. अलीरेजा अराफी

अलीरेजा अराफी वरिष्ठ शिया धर्मगुरु हैं और मार्च 2026 की अंतरिम नेतृत्व व्यवस्था में भी उन्हें शामिल किया गया था।

यही वजह है कि अगर अचानक सुप्रीम लीडर का पद खाली होता है, तो उनका नाम फिर से चर्चा में आ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ही करेगी।

2. अली लारीजानी

अली लारीजानी ईरान के बेहद अनुभवी राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। वह संसद के पूर्व स्पीकर रह चुके हैं और सत्ता तंत्र के भीतर उनकी लंबी राजनीतिक भूमिका रही है। हालांकि सुप्रीम लीडर बनने के लिए सिर्फ राजनीतिक अनुभव पर्याप्त नहीं है। धार्मिक योग्यता भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उनका नाम संभावित शक्ति समीकरण में महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन इसे सीधी दावेदारी मानना जल्दबाजी होगी।

3. सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़ा कोई कट्टरपंथी चेहरा

ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी IRGC का प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण है। मोजतबा के चयन के दौरान भी IRGC और कट्टरपंथी सत्ता प्रतिष्ठान के प्रभाव की चर्चा हुई थी। Reuters के विश्लेषण में उनके चयन को ईरान की हार्डलाइन सत्ता संरचना के मजबूत होने से जोड़ा गया था। इसलिए अगर भविष्य में नेतृत्व का संकट आता है, तो सिर्फ धार्मिक योग्यता ही नहीं, बल्कि IRGC और दूसरे शक्तिशाली संस्थानों की सहमति भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

क्या ईरान में फिर से तीन सदस्यीय नेतृत्व परिषद बन सकती है?

हां, यह सबसे महत्वपूर्ण अंतरिम विकल्पों में से एक है। अनुच्छेद 111 के तहत सुप्रीम लीडर की मृत्यु या पद संभालने में असमर्थता जैसी स्थिति में संविधान अंतरिम नेतृत्व व्यवस्था का प्रावधान करता है। मार्च 2026 में अली खामेनेई की मृत्यु के बाद तीन सदस्यीय परिषद का गठन इसका ताजा उदाहरण है।

इसलिए मोजतबा की मृत्यु की स्थिति में भी तत्काल किसी एक व्यक्ति को उसी क्षण सुप्रीम लीडर घोषित करना जरूरी नहीं होगा। पहले अंतरिम व्यवस्था सत्ता संभाल सकती है और उसके बाद असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए नेता के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। हालांकि, मोजतबा का उत्ताराधिकारी चुनने का काम इतना भी आसान नहीं होगा।

दरअसल, मोजतबा सिर्फ एक धार्मिक पदाधिकारी नहीं हैं। उनके पीछे खामेनेई परिवार की राजनीतिक विरासत, IRGC, धार्मिक प्रतिष्ठान और सत्ता के दूसरे शक्तिशाली संस्थानों का जटिल नेटवर्क है। ऐसे में उनके बाद उत्तराधिकारी का चयन सिर्फ धार्मिक प्रक्रिया नहीं होगा, बल्कि इसके पीछे बड़ा राजनीतिक और रणनीतिक शक्ति संतुलन भी काम करेगा।

मोजतबा की मौत से ईरान की विदेश नीति पर क्या असर पड़ेगा?

ईरान का सुप्रीम लीडर देश की सुरक्षा और विदेश नीति की व्यापक दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन का असर सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। खासकर अमेरिका, इजरायल, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, IRGC और क्षेत्रीय मिलिशिया नेटवर्क को लेकर ईरान की नीति पर पूरी दुनिया की नजर होगी।

अगर नया नेता कट्टरपंथी धड़े से आता है, तो मौजूदा टकराव वाली नीति जारी रह सकती है। वहीं, अगर अपेक्षाकृत व्यावहारिक चेहरा आगे आता है, तो अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बातचीत की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सिर्फ नेता बदलते ही ईरान की विदेश नीति पूरी तरह बदल जाएगी। ईरान की सत्ता संरचना कई संस्थानों पर आधारित है और इसमें IRGC की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

क्या ईरान में सत्ता संघर्ष हो सकता है?

गौरतलब है कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मोजतबा के बाद उत्तराधिकारी चुनना सामान्य परिस्थितियों में भी संवेदनशील प्रक्रिया होगी। लेकिन युद्ध, बाहरी दबाव और सुरक्षा संकट के बीच यह प्रक्रिया और कठिन हो सकती है।

असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के भीतर धार्मिक और राजनीतिक सहमति बनानी होगी। दूसरी तरफ, IRGC यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर सकता है कि नया सुप्रीम लीडर उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं के खिलाफ न जाए। यानी पर्दे के पीछे एक बड़ा शक्ति संतुलन देखने को मिल सकता है।

क्या राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सुप्रीम लीडर बन सकते हैं?

यह सबसे आम, लेकिन सबसे भ्रामक सवालों में से एक है। राष्ट्रपति होना अपने आप सुप्रीम लीडर बनने की योग्यता नहीं देता। ईरान में राष्ट्रपति और सुप्रीम लीडर दो अलग-अलग संस्थागत भूमिकाएं हैं। सुप्रीम लीडर के लिए धार्मिक और नेतृत्व संबंधी संवैधानिक योग्यताएं जरूरी हैं। पेजेशकियन अंतरिम व्यवस्था में भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वही स्थायी सुप्रीम लीडर बनेंगे।

क्या खामेनेई युग खत्म होगा?

अगर मोजतबा की जगह कोई ऐसा नेता आता है, जो उनके पिता अली खामेनेई और खुद मोजतबा की हार्डलाइन नीतियों को जारी रखता है, तो चेहरे का बदलाव होगा, लेकिन सत्ता की मूल दिशा में बहुत बड़ा बदलाव जरूरी नहीं है।

दूसरी तरफ, अगर कोई अपेक्षाकृत अलग धड़े का नेता चुना जाता है, तो ईरान की विदेश नीति और घरेलू सत्ता समीकरण में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि मोजतबा की संभावित मृत्यु महज ईरान की घरेलू राजनीति का मामला नहीं होगी। यह अमेरिका, इजरायल, खाड़ी देशों, रूस, चीन और पूरे पश्चिम एशिया के लिए रणनीतिक महत्व का घटनाक्रम होगा।

End of Article