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लाखों किलो वजन वाले बादल कैसे उड़ते हैं, ये गिरते क्यों नहीं? जानिए विज्ञान

How Clouds Float in sky in Hindi: क्या आपके भी मन में बादल देखकर यह सवाल आता है कि इतने विशाल होने के बावजूद ये उड़ते कैसे हैं? इनमें लाखों लीटर पानी होता है, तो ये गिरते क्यों नहीं

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बादल हवा में कैसे उड़ते हैं (Image - chatGPT)

How Clouds Float in sky in hindi: आसमान में तैरते सफेद बादल देखने में बेहद हल्के लगते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि एक बड़े बादल में मौजूद पानी की बूंदों का कुल वजन लाखों किलोग्राम तक हो सकता है? यह सुनकर सबसे पहला सवाल यही आता है कि ये उड़ते कैसे हैं और जमीन पर गिरते क्यों नहीं हैं। बता दें, इसका जवाब बादलों की बनावट, पानी की बेहद छोटी बूंदों और हवा की गति में छिपा है। सबसे पहले, समझते हैं बादल कैसे बनते हैं?

जब सूरज की गर्मी से समुद्र, नदियों, झीलों और जमीन का पानी गर्म होता है तो वह हिस्सा वाष्प बनकर ऊपर उठता है। वातावरण में ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान कम होता जाता है। जब यह जलवाष्प ऊपर बढ़ती हे, तो ऊपर ठंडा तापमान होने की वजह से जलवाष्प भी ठंडी हो जाती है। इसके बाद ऊपर हवा में मौजूद धूल, नमक और दूसरे बेहद छोटे कणों के आसपास जमा होकर सूक्ष्म पानी की बूंदें या बर्फ के क्रिस्टल बनाने लगती है। इन्हीं असंख्य छोटी बूंदों और बर्फ के कणों का समूह हमें बादल के रूप में दिखाई देता है।

इतना वजन होने के बाद भी बादल गिरते क्यों नहीं?

यहां सबसे महत्वपूर्ण भूमिका बादल में मौजूद पानी की बूंदों के आकार और हवा की गति की होती है। बादल की बूंदें बेहद छोटी होती हैं। उनका आकार इतना कम होता है कि उनका गिरने का वेग भी बहुत धीमा होता है।

इसके अलावा बादल वातावरण के जिस स्तर पर बनता है, वहां हवा लगातार ऊपर और अलग-अलग दिशाओं में चलती है। ये हवा की धाराएं छोटी बूंदों को ऊपर या आसपास बनाए रखने में मदद करती हैं। आसान भाषा में कहें तो बादल किसी ठोस वस्तु की तरह एक जगह रखी हुई भारी चीज नहीं है। वह लगातार बदलता हुआ पानी और बर्फ के सूक्ष्म कणों का समूह है।

बारिश कब होती है?

हां, बिल्कुल। जब बादल की छोटी-छोटी बूंदें आपस में टकराकर बड़ी होने लगती हैं, तो उनका वजन बढ़ जाता है। एक समय ऐसा आता है जब हवा की धाराएं उन्हें ऊपर नहीं रोक पातीं। तब वे बारिश की बूंदों के रूप में नीचे गिरने लगती हैं।

यानी बारिश वास्तव में उसी प्रक्रिया का परिणाम है जिसमें बादल की सूक्ष्म बूंदें मिलकर इतनी बड़ी हो जाती हैं कि उनका गिरना शुरू हो जाता है।

बादल का वजन लाखों किलो कैसे हो सकता है?

एक बड़े बादल का आकार कई वर्ग किलोमीटर तक हो सकता है। उसमें पानी बहुत छोटी-छोटी बूंदों के रूप में फैला होता है। हर बूंद अलग-अलग देखने पर बेहद हल्की होती है, लेकिन जब ऐसी अरबों-खरबों बूंदें एक साथ मौजूद हों तो कुल पानी का वजन बहुत ज्यादा हो सकता है। यही वजह है कि बादल का "वजन" सुनकर हमें जो भारीपन महसूस होता है, वह एक जगह जमा पानी का वजन नहीं है। पानी बेहद छोटे कणों में बड़े क्षेत्र में फैला रहता है और बादल के भीतर हवा भी मौजूद होती है।

फिर बादल आसमान में तैरता कैसे दिखाई देता है?

दरअसल बादल किसी गुब्बारे की तरह आसमान में तैर नहीं रहा होता। गुरुत्वाकर्षण लगातार पानी की बूंदों को नीचे खींचता है। लेकिन बूंदों का आकार बहुत छोटा होने के कारण वे धीरे-धीरे नीचे आती हैं और हवा की हलचल उन्हें लगातार इधर-उधर करती रहती है।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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