First Board Exam in India : क्या आप जानते हैं कि जिस तरह से आज बोर्ड एग्जाम होते हैं, वैसे पहले नहीं हुआ करते थे। जब छात्रों को स्कूलों में पढ़ाया जाता था तो इसके लिए कोई तय सेंट्रलाइजड टेस्ट नहीं होते थे। माना जाता है कि अंग्रेजों ने एजुकेशन को स्टैंडर्ड बनाने और हायर एजुकेशन और नौकरियों के लिए स्टूडेंट्स को चुनने का एक सिस्टम लाने के लिए बोर्ड एग्जाम शुरू किए थे। 'बोर्ड एग्जाम' का कॉन्सेप्ट कुछ दशक पुराना नहीं है, बल्कि ये असल में ब्रिटिश कॉलोनियल पीरियड से जुड़ा है, जब फॉर्मल एजुकेशन सिस्टम और एग्जाम शुरू हुए थे। मगर क्या आपको पता है कि भारत में सबसे पहले बोर्ड एग्जाम कब हुए थे ?
कुछ छात्रों की पहुंच से क्यों बाहर थे एग्जाम ?
दिलचस्प बात तो ये है कि उस समय एजुकेशन एक तरह से सिर्फ अमीर लोगों तक ही सीमित थी। साथ ही पहला एग्जाम इंग्लिश में था, भले ही उस समय भारतीय लोग ये भाषा अच्छे से नहीं बोलते थे। इससे स्टूडेंट्स के लिए एग्जाम बहुत मुश्किल हो गया, और कुछ स्टूडेंट्स के लिए तो यह पहुंच से भी बाहर हो गया जिन्हें इंग्लिश भाषा की ट्रेनिंग नहीं मिली थी।
कब कराए गए थे पहले बोर्ड एग्जाम ? First Board Exam in India
'बोर्ड एग्जाम' का कॉन्सेप्ट कुछ दशक पुराना नहीं है, बल्कि ये असल में ब्रिटिश कॉलोनियल पीरियड से जुड़ा है, जब फॉर्मल एजुकेशन सिस्टम और एग्जाम शुरू हुए थे। माना जाता है कि 1858 में कलकत्ता यूनिवर्सिटी ने पहला मैट्रिक (क्लास 10) बोर्ड एग्जाम कराया था। कलकत्ता यूनिवर्सिटी, बॉम्बे यूनिवर्सिटी और मद्रास यूनिवर्सिटी जैसी यूनिवर्सिटी 2857 में बनीं, और पहला फॉर्मल बोर्ड एग्जाम एक साल बाद (1858) कराया गया।
ऑफिशियली कब शुरू हुई बोर्ड परीक्षा ?
इसके बाद साल 1930 का समय आया, जब पहली बार हाई स्कूल और इंटर लेवल पर आर्ट्स और साइंस सब्जेक्ट्स की बोर्ड परीक्षा हुई । इसे भारत में पहली बार ऑफिशियली बोर्ड परीक्षा की शुरुआत माना जाता है। ये कुछ इसी तरह से हुई, जैसे आज की बोर्ड परीक्षाएं करवाई जाती हैं।
भारत का सबसे पहला एजुकेशन बोर्ड कौन सा ?
क्या आप जानते हैं कि भारत का सबसे पहला एजुकेशन बोर्ड उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड था। इस बोर्ड की स्थापना साल1921 में हुई थी। तब शिक्षा को व्यवस्थित करने के लिए एक समान बनाने की जरूरत महसूस हुई तो एक आधिकारिक बोर्ड का गठन किया गया।
