First Chief Minister Of Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला (First Chief Minister Of UP) राज्य है। 2,43,286 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला यह भारत का चौथा सबसे बड़ा और सर्वाधिक जनंख्या वाला राज्य है। इसकी राजधानी लखनऊ है, जबकि न्यायिक राजधानी प्रयागराज है। देश की राजनीति में भी इस राज्य की अहम भूमिका रही है। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री कौन थे। अक्सर जनरल नॉलेज के ऐसे सवाल प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछ लिए जाते हैं और लोग कंफ्यूज हो जाते हैं।
अगर आप भी नहीं जानते हैं कि यूपी के पहले चीफ मिनिस्टर कौन थे तो यहां जान लीजिए। यहां आप जान सकते हैं कि स्वतंत्रता के बाद उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री कौन थे, 1950 में यूपी के मुख्यमंत्री कौन थे यह भी जान सकते हैं।

यूपी के पहले मुख्यमंत्री
First Chief Minister Of UP:यूपी के पहले मुख्यमंत्री कौन थे
बता दें उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री वर्ष 1950 में गोविंद बल्लभ पंत बने थे। इनका कार्यकल 4 वर्षों तक यानी 27 दिसंबर 1954 तक रहा। इसके बाद 28 दिसंबर 1954 को डॉ. संपूर्णानंद दूसरे मुख्यमंत्री बने। इनका कार्यकाल 6 दिसंबर 1960 तक रहा। इसके बाद 7 दिसंबर 1960 चंद्र भानू गुप्त ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और 1 अक्टूबर 1963 तक इस पद पर बने रहे।
फिर 2 अक्टूबर 1963 को सुचेता कृपलानी मुख्यमंत्री बने और 13 मार्च 1967 तक इस पद पर काबिज रहे। इसके बाद 14 मार्च 1967 से 2 अप्रैल 1967 चंद्र भानू गुप्त दोबारा मुख्यमंत्री बने।
UP First CM Name: स्वतंत्रता के बाद उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री कौन थे
स्वतंत्रता के बाद उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत बने थे। बता दें उन्होंने जमींदारी प्रथा के उन्मूलन जैसे ऐतिहासिक कृषि सुधार किए, जिससे लाखों किसानों को राहत मिली और भूमि सुधारों का रास्ता खुला। मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल उत्तर प्रदेश के विकास की नींव रखने वाला माना जाता है। उन्होंने प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने, शिक्षा का विस्तार करने और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया। किसानों और आम लोगों के हितों को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। वह हिंदी भाषा के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने प्रशासनिक कार्यों में भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी, को बढ़ावा देने का प्रयास किया।
यूपी में देने के बाद उन्हें केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। वे भारत के गृह मंत्री भी बने और राष्ट्रीय एकता तथा प्रशासनिक सुधारों में अहम योगदान दिया।
