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Gandhi Jayanti Kavita: वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे... गांधी जयंती पर कविताएं

Gandhi Jayanti Kavita in Hindi : गांधी जी की रचनाओं में सत्य, अहिंसा, प्रेम, सेवा और करुणा जैसे भाव साफ झलकते हैं। इसके साथ ही उनका मानना था कि कविता केवल शब्दों का खेल नहीं होता बल्कि आत्मा की आवाज होती है, जो इंसान को अंदर से बदलकर रख देती है। गांधी जयंती के मौके पर चलिये जानते हैं गांधी जी की कविताओंं और उनपर मशहूर कवियों द्वारा लिखी कुछ पंक्तियों के बारे में...

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Gandhi Jayanti (iStock)

Gandhi Jayanti Poem: महात्मा गांधी को देशवासी आमतौर पर स्वतंत्रता संग्राम के नेता, राष्ट्रपिता और सत्य-अहिंसा के पुजारी के रूप में जानते हैं मगर बेहद कम ही लोगों को उनके साहित्य और कविता के प्रति झुकाव के बारे में मालूम है। महात्मा गांधी अहिंसा के पुजारी थे और हिंसा से सख्त खिलाफ थे। ऐसे में उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों और आदर्शों को केवल भाषण या फिर आंदलनों के जरिये ही नहीं बल्कि कविताओं के जरिये भी व्यक्त किया। उनकी कविताओं में सादगी, मानवीय मूल्यों और आत्मिक शांति का काफी गहरा संदेश मिलता है। ऐसे में महात्मा गांधी युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं।

गांधी जी का जीवन जितना अनुशासित और सादा था, उनकी कविताएं भी उतनी ही सरल और दिल को छू लेने वाली हैं। वे अकसर अपने भजन और कविताओं के जरिये लोगों को प्रेरित किया करते थे। गांधी जी की रचनाओं में सत्य, अहिंसा, प्रेम, सेवा और करुणा जैसे भाव साफ झलकते हैं। इसके साथ ही उनका मानना था कि कविता केवल शब्दों का खेल नहीं होता बल्कि आत्मा की आवाज होती है, जो इंसान को अंदर से बदलकर रख देती है। चलिये बात करतें हैं गांधी जी की कुछ मशहूर कविताओं के बारे में...

वैष्णव जन

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ पराई जाणे रे

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ पराई जाणे रे

पर दुख्खे उपकार करे तोए मन अभिमान ना आणे रे

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ पराई जाणे रे

सकळ लोक मान सहुने वंदे नींदा न करे केनी रे

वाच काछ मन निश्चळ राखे धन धन जननी तेनी रे

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ पराई जाणे रे

जनवरी

प्रात:काल का समय, रोजमर्रा की जिंदगी,

उलझी अंगुलियां-दिमाग, स्वत: चलते,

मस्तिष्क पर थोड़ा जोर डाला, कुछ याद आया,

खींचकर पर्स से, चेकबुक बाहर निकाली।

छात्रों के लिए आसानी से याद होने वाली कुछ कविताएं-

सच का दीपक

सत्य और अहिंसा के पथ पर

चलना हमें सिखाया।

झूठ और हिंसा छोड़कर,

सच का दीप जलाया।

गांधी जी

खादी वाले कपड़े पहनकर

बना दिया इतिहास।

गांधी जी के आदर्शों से,

भारत हुआ खास।

राष्ट्रपिता

राष्ट्रपिता कहलाए गांधी,

सादगी जिनकी पहचान।

हमें सिखाया प्रेम और सेवा,

सच्चाई का दिया विधान।

यहां गांधीजी पर प्रसिद्ध कवियों ने कुछ कविताएं लिखी हैं-

केदारनाथ अग्रवाल

दुख से दूर पहुंचकर गांधी

सुख से मौन खड़े हो

मरते-खपते इंसानों के

इस भारत में तुम्ही बड़े हो।

हरिवंशराय बच्चन

एक दिन इतिहास पूछेगा

कि तुमने जन्म गांधी को दिया था

जिस समय अधिकार, शोषण, स्वार्थ

हो निर्लज्ज, हो निशंक, हो निर्द्वन्द

सद्द-जगे, संभले राष्ट्र में घुन से लगे

जर्जर उसे करते रहे थे,

तुम कहां थे, और तुमने क्या किया था

Kusum Bhatt
कुसुम भट्टauthor

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बतौर एजुकेशन जर्नलिस्ट कार्यरत कुसुम भट्ट शिक्षा जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं। मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद वह पिछले 5 सालों से एजुकेशन बीट को मजबूती से संभाल रही हैं। कुसुम को खबरों को सबसे पहले ब्रेक करने, विषय की गहराई में जाकर स्टोरी तैयार करने और युवाओं को उनके करियर से जुड़ी सटीक जानकारी देने में विशेष दक्षता प्राप्त है। कुसुम की लेखन शैली संक्षिप्त, शोध आधारित और प्रभावशाली है। वे एग्जाम टिप्स, करियर गाइडेंस, सरकारी नौकरी से जुड़ी खबरें, बोर्ड रिजल्ट और सक्सेस स्टोरीज़ जैसे विषयों पर सटीक और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करने के लिए जानी जाती हैं। कुसुम अबतक पांच हजार से अधिक बाइलाइन रिपोर्ट पब्लिश कर चुकी हैं। उन्हें ब्लॉगिंग, वेब स्टोरीज और ट्रेंडिंग एजुकेशनल टॉपिक्स पर काम करने का खास शौक है। उनका मानना है कि – "शिक्षा सिर्फ करियर का माध्यम नहीं, बल्कि सोच और समाज दोनों को बदलने की शक्ति रखती है।"

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