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History: चांद पर पहला कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग की पूरी कहानी, एक पायलट कैसे बना ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्री

जब भी इंसान के चांद की बात होती है, तो नील आर्मस्ट्रांग का भी जिक्र आता है। 20 जुलाई 1969 को उन्होंने चांद की सतह पर कदम रखकर इतिहास रच दिया। लेकिन आर्मस्ट्रांग की कहानी सिर्फ चांद तक पहुंचने की कहानी नहीं है। इसके पीछे एक ऐसे लड़के की मेहनत, उड़ान के प्रति जुनून और मुश्किल परिस्थितियों में सही फैसला लेने की क्षमता थी, जिसने आगे चलकर दुनिया के सबसे चर्चित अंतरिक्ष यात्रियों में जगह बनाई।

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चांद पर पहला कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग की पूरी कहानी (Image - ChatGPT)

जब भी इंसान के चांद की बात होती है, तो नील आर्मस्ट्रांग का भी जिक्र आता है। 20 जुलाई 1969 को उन्होंने चांद की सतह पर कदम रखकर इतिहास रच दिया। लेकिन आर्मस्ट्रांग की कहानी सिर्फ चांद तक पहुंचने की कहानी नहीं है। इसके पीछे एक ऐसे लड़के की मेहनत, उड़ान के प्रति जुनून और मुश्किल परिस्थितियों में सही फैसला लेने की क्षमता थी, जिसने आगे चलकर दुनिया के सबसे चर्चित अंतरिक्ष यात्रियों में जगह बनाई।

क्यों है चर्चा में

चांद पर सबसे पहले पैर रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग ने 24 अगस्‍त 2012 को इस दुनिया को अलविदा कहा था। पढ़ें उनके बारे में कुछ अनसुनी कहानी

नील आर्मस्ट्रांग का जन्म 5 अगस्त 1930 को अमेरिका के ओहायो राज्य के वैपाकोनेटा में हुआ था। हवाई जहाज और उड़ान में उनकी दिलचस्पी बहुत छोटी उम्र में ही पैदा हो गई थी। जब वह करीब दो साल के थे, तब उनके पिता उन्हें एयर रेस देखने ले गए थे। छह साल की उम्र में उन्होंने पहली बार हवाई जहाज में सफर किया। दिलचस्प बात यह है कि आर्मस्ट्रांग ने कार चलाने का लाइसेंस लेने से पहले ही पायलट का लाइसेंस हासिल कर लिया था। 16 साल की उम्र में उनके पास स्टूडेंट पायलट लाइसेंस था। उड़ान के प्रति यही जुनून आगे चलकर उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत बना।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ नौसेना में बने पायलट

आर्मस्ट्रांग ने Purdue University से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें अमेरिकी नौसेना में सेवा देने का मौका मिला। कोरियाई युद्ध के दौरान उन्होंने 78 लड़ाकू मिशनों में हिस्सा लिया। नौसेना से लौटने के बाद उनका करियर सिर्फ पायलट तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने इंजीनियर और टेस्ट पायलट के रूप में भी काम किया। उन्होंने X-15 जैसे बेहद तेज और प्रयोगात्मक विमान उड़ाए। इस दौरान उन्हें ऊंचाई और गति से प्यार हो गया।

आर्मस्ट्रांग ने अपने करियर में 200 से ज्यादा अलग-अलग तरह के विमान उड़ाए। इनमें जेट, रॉकेट, हेलिकॉप्टर और ग्लाइडर तक शामिल थे। X-15 की उड़ानों ने उन्हें ऐसी परिस्थितियों में काम करने का अनुभव दिया, जो बाद में अंतरिक्ष मिशन में बेहद काम आया।

Apollo 11: वह मिशन जिसने इतिहास बदल दिया

16 जुलाई 1969 को Apollo 11 मिशन लॉन्च हुआ। इसमें नील आर्मस्ट्रांग के साथ माइकल कॉलिन्स और बज एल्ड्रिन भी थे। लेकिन यान से सबसे पहले चांद पर उतरने वाले नील आर्मस्ट्रांग थे, और वही इस मिशन के कमांडर भी थे।

चांद पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति

20 जुलाई 1969 को Apollo 11 का लूनर मॉड्यूल चांद की सतह पर उतरा। इसके बाद आर्मस्ट्रांग चांद पर कदम रखने वाले पहले इंसान बने। उनके बाद बज एल्ड्रिन ने भी चांद की सतह पर कदम रखा, जबकि माइकल कॉलिन्स चांद की कक्षा में कमांड मॉड्यूल के साथ मौजूद रहे। आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन ने चांद की सतह पर करीब ढाई घंटे बिताए। इस दौरान उन्होंने तस्वीरें लीं, वैज्ञानिक प्रयोग किए और चांद की सतह से नमूने लिए।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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