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लैब में तैयार हो रहे 'मास्टर जी', क्या खत्म हो जाएगी इंसानी शिक्षकों की जरूरत? ऐसी दिखेंगी फ्यूचर क्लासेज!

Kota Lab Teachers: कोटा में एक एआई लैब में हाईटेक एआई टीचर्स (AI Teachers) बनकर तैयार हो रहे हैं, जो बच्चों को पढ़ाएंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या शिक्षकों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा? शिक्षा के क्षेत्र में आने वाले समय में और भी बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में ये जान लेना भी जरूरी है कि ये टीचर्स किस तरह से बच्चों को पढ़ाएंगे या फिर शिक्षा के क्षेत्र में इन्हें शामिल करने का उद्देश्य है क्या? इस लेख में जानें इन एआई टीचर्स से जुड़ी हर जानकारी...

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AI Teachers (iStock)

Will AI Replace Teachers: AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस... रोजमर्रा की जिंदगी में इस शब्द से दो-चार तो आप होते ही होंगे। हों भी कैसे ना, काफी हद तक इस AI ने हर किसी की लाइफ को कंट्रोल जो कर लिया है। जबसे एआई आया है, हमारी इसपर निर्भरता बढ़ती ही जा रही है, जो कि एक तरह से गलत भी नहीं है। क्योंकि AI ने काम करने के तरीकों को काफी हद तक आसान कर दिया है। टेक्निकल हो या फिर मेडिकल, हर फील्ड में एआई अपने चमत्कार दिखा रहा है मगर अब ये शिक्षा के क्षेत्र में भी बखूबी इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां बात पढ़ाई-लिखाई में एआई की मदद की नहीं हो रही बल्कि ऐसे रोबोट्स की हो रही है, जो बच्चों को बाकायदा पढ़ाएंगे। जी हां! शायद ये सुनने में बात हैरानी भरी हो, मगर सच है।

शिक्षा में जिस एआई क्रांति की हम बात कर रहे हैं वो हो रही है कोटा में। भारत की कोचिंग सिटी कहे जाने वाले कोटा में एडवांस एआई लैब और आरएंडडी सेंटर में एआई की मदद से ऐसे टीचर्स तैयार हो रहे हैं, जो छात्रों को पढ़ाएंगे। ये शिक्षा के क्षेत्र में एआई की अब तक की सबसे बड़ी क्रांति है और इस क्रांति को आगे बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये भी लगाए जा रहे हैं।

AI Teachers in KOTA

कोटा में बन रहे एआई टीचर्स (फोटो क्रेडिट/आईस्टॉक)

क्या है इन AI टीचर्स की खासियत?

ये सब हो रहा है बच्चों को एडवांस बनाने के लिए। उन्हें स्मार्ट और आत्मविश्वासी बनाने के लिए। ये टीचर्स तुरंत छात्रों की कमजोरियों और ताकत का पता लगा सकेंगे।

ये बच्चों को हर लेवल पर स्मार्ट बनाएंगे।

मशीन लर्निंग और एआई की मदद से बच्चों की सोचने समझने की ताकत बढ़ाई जाएगी।

बच्चों की सोचने समझने की पकड़ के हिसाब से ही लर्निंग कंटेंट बनाए जाएंगे।

लाइव डाउट सॉल्विंग और टेस्ट एनालिसिस किया जाएगा।

ये टीचर्स 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे। बिना किसी तरह की छुट्टी के।

AI

एआई टीचर्स की हैं खासियत (फोटो क्रेडिट/आईस्टॉक)

ये बात सच है कि हर बच्चे की सीखने और समझने की क्षमता अलग-अलग होती है। ऐसे में एआई शिक्षा के क्षेत्र में जो चमत्कार करने जा रहा है, उसकी मदद से ये एआई टीचर्स बच्चों को उनकी समझ बूझ के हिसाब से ही पढ़ाएंगे। आमतौर पर एक शिक्षक के पास एक क्लास में बहुत सारे बच्चे होते हैं और ऐसे में हर बच्चे पर बारीकी से ध्यान देना शिक्षकों के लिए इतना आसान भी नहीं होता। मगर एआई की मदद से जो टीचर्स तैयार किए जा सकते हैं, वो वाकई कमाल के होंगे और इससे बच्चे बेहतर ही कर पाएंगे।

क्या खतरे में टीचर्स का फ्यूचर?

बच्चों को पढ़ाने के अलावा आमतौर पर टीचर्स के पास ग्रेडिंग, असेंबलिंग और टाइम टेबल बनाने जैसे काम भी होते हैं, जिनमें उनका अच्छा खासा समय चला जाता है और वे बच्चों को पढ़ाने के मामले में उतना प्रोडक्टिव नहीं हो पाते ना ही उतना वक्त देते हैं। नतीजतन बच्चे की परफॉर्मेंस खराब होती चली जाती है। मगर जिन एआई टीचर्स की हम बात कर रहे हैं, वे इन सब कामों को चुटकी में निपटा देंगे। मगर अब बड़ा सवाल ये उठता है कि क्या इन एआई टीचर्स के आने से शिक्षकों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा? क्या भविष्य में शिक्षकों की जरूरत ही नहीं होगी? क्या टीचर्स की वेकेंसी निकलेंगी ही नहीं? तो इन सबका जवाब है ऐसा है नहीं।

AI Teachers

शिक्षा में क्रांति लाएंगे एआई टीचर्स (फोटो क्रेडिट/आईस्टॉक)

नहीं मतलब ऐसा कुछ नहीं होने वाला। भविष्य में एआई शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी क्रांति तो कर रहा है और साथ ही बच्चों के फ्यूचर के लिए भी बेहद जरूरी है। इससे न केवल बच्चे एडवांस बनेंगे बल्कि नौकरियों की तलाश में भी उन्हें दिक्कत नहीं होगी क्योंकि आज के समय में हर सेक्टर में एआई की हाई डिमांड है। अगर शिक्षा के क्षेत्र में एआई कमाल दिखा रहा है तो इसका ये मतलब कतई नहीं है कि शिक्षकों की नौकरी ही खतरे में पड़ जाएगी। हां ये बात और है कि इसके अपने आप में ढेरों चैलेंजेस भी हैं।

AI in KOTA

एआई से पढ़ाई के तरीकों में होगा बदलाव (फोटो क्रेडिट/आईस्टॉक)

सबसे पहला चैलेंज तो ये कि एआई बच्चों को एडवांस बनाएगा लेकिन अगर इस टीचिंग में ह्यूमन टच कम होगा तो बच्चों का इंसानी कनेक्शन खत्म भी हो सकता है। हर चीज में एआई जगह बनाएगा तो बच्चों की डिपेंडेंसी टीचर्स पर काफी कम हो जाएगी और बच्चे एआई से ही चीजें सीखेंगे जो कि पूरी तरह से ठीक नहीं है। एक इंसानी शिक्षक बच्चों को सिखाता है कि कैसे समाज में रहना है कैसे प्रेरणा सीखनी है। बातचीत के लहजे से लेकर दयाभाव तक... सब एक इंसान ही दूसरे इंसान को सिखा सकता है। एआई की मदद से बेशक बच्चे एडवांस होंगे मगर पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए इंसानी शिक्षकों का होना भी बेहद जरूरी है।

ऐसे में एआई शिक्षा के क्षेत्र में कई सारी चीजों को आसान बनाएगा लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि ये शिक्षकों को ही रीप्लेस कर देगा। हां ये बात सच है कि एआई की मदद से कई सारी चीजें शिक्षकों के लिए भी आसान हो जाएंगी और उनका बोझ काफी हद तक हल्का हो जाएगा जिससे वे स्टूडेंट्स पर अच्छी तरह से ध्यान दे सकें। एआई कभी भी शिक्षकों को रीप्लेस नहीं कर सकता। आने वाले समय में एआई के बढ़ते प्रभाव के साथ-साथ शिक्षकों को भी ट्रेन्ड किया जाएगा ताकि वे अच्छी तरह से छात्रों को एआई सिखा सकें और पढ़ाने करने के तरीके को आसान बना सकें।

Kusum Bhatt
कुसुम भट्टauthor

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बतौर एजुकेशन जर्नलिस्ट कार्यरत कुसुम भट्ट शिक्षा जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं। मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद वह पिछले 5 सालों से एजुकेशन बीट को मजबूती से संभाल रही हैं। कुसुम को खबरों को सबसे पहले ब्रेक करने, विषय की गहराई में जाकर स्टोरी तैयार करने और युवाओं को उनके करियर से जुड़ी सटीक जानकारी देने में विशेष दक्षता प्राप्त है। कुसुम की लेखन शैली संक्षिप्त, शोध आधारित और प्रभावशाली है। वे एग्जाम टिप्स, करियर गाइडेंस, सरकारी नौकरी से जुड़ी खबरें, बोर्ड रिजल्ट और सक्सेस स्टोरीज़ जैसे विषयों पर सटीक और भरोसेमंद कंटेंट तैयार करने के लिए जानी जाती हैं। कुसुम अबतक पांच हजार से अधिक बाइलाइन रिपोर्ट पब्लिश कर चुकी हैं। उन्हें ब्लॉगिंग, वेब स्टोरीज और ट्रेंडिंग एजुकेशनल टॉपिक्स पर काम करने का खास शौक है। उनका मानना है कि – "शिक्षा सिर्फ करियर का माध्यम नहीं, बल्कि सोच और समाज दोनों को बदलने की शक्ति रखती है।"

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