केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 10वीं और 12वीं के नतीजों के बाद शुरू हुई रिवैल्यूएशन प्रक्रिया अभी भी सवालों के घेरे में बनी हुई है। सर्वर डाउन, पेमेंट फेल्ड, ओवर अमाउंड डिडक्शन और धुंधली कॉपी से परेशान लगातार सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इस बीच सीबीएसई रिवैल्युएशन प्रक्रिया में आ रही तकनीकी दिक्कतों पर केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों और अभिभावकों की परेशानियों को गंभीरता से लेते हुए देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT मद्रास के टेक्निकल एक्सपर्ट की टीम को मोर्चा संभालने के निर्देश दिए हैं। यह कदम सीबीएसई के ऑनलाइन पोर्टल पर आ रहे सर्वर क्रैश, लॉगिन एरर और पेमेंट फेल होने जैसी लगातार मिल रही शिकायतों के बाद उठाया गया है।
IIT Madras के प्रोफेसर और एक्सपर्ट्स करेंगे मामले की जांच
शिक्षा मंत्रालय के निर्देशानुसार, आईआईटी मद्रास के सीनियर प्रोफेसरों और सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की एक हाई-टेक टीम सीबीएसई के तकनीकी दस्ते के साथ मिलकर काम करेगी। यह टीम इस साल रिवैल्यूएशन पोर्टल की शुरुआत के बाद से आई सभी तकनीकी गड़बड़ियों के मुख्य कारणों का पता लगाएगी और उन्हें हमेशा के लिए ठीक करेगी।
पूरे आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर की होगी ओवरहालिंग
स्पेशलिस्ट की यह टीम सीबीएसई के पूरे ऑनलाइन सिस्टम को गहराई से जांचेगी। इसमें मुख्य रूप से पोर्टल की विभिन्न चीजों पर ध्यान दिया जाएगा, जो इस प्रकार है
1. वेबसाइट की स्टेबिलिटी - जो भारी ट्रैफिक होने पर भी वेबसाइट क्रैश न हो।
2. सर्वर की कार्यक्षमता - एक साथ लाखों छात्रों के लॉगिन करने पर सर्वर धीमा न पड़े।
3. मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर - भविष्य में ऐसी दिक्कत न आए, इसके लिए पूरे डिजिटल ढांचे को अपग्रेड किया जाएगा।
लॉगिन और पेमेंट गेटवे सुधरेगा
छात्रों को सबसे ज्यादा परेशानी कॉपियों की स्कैन कॉपी मंगाने के लिए फीस जमा करने और लॉगिन ऑथेंटिकेशन में आ रही थी। आईआईटी मद्रास की टीम यूजर एक्सेस सिस्टम और पेमेंट गेटवे को पूरी तरह सुरक्षित और तेज बनाएगी, ताकि फीस कटने के बाद छात्रों का पेमेंट स्टेटस तुरंत 'कन्फर्म' दिखाई दे।
शिक्षा मंत्री ने कहा 'छात्रों के हित सर्वोपरि'
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि सरकार के लिए विद्यार्थियों का हित और उनका भविष्य सबसे ऊपर है। उन्होंने सीबीएसई को कड़े लहजे में निर्देश दिए हैं कि प्राथमिकता के आधार पर सभी सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाएं। पूरी व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, प्रभावी और छात्र-हितैषी बनाया जाए ताकि किसी भी बच्चे का समय बर्बाद न हो।
