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पांचवी की किताब 1035 रुपये की, महंगे सिलेबस पर सोशल मीडिया पर बहस

Lucknow school news: माइक्रोब्लॉगिंग साइट ‘X’ पर एक बार फिर शिक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। जहां स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूलने का मुद्दा अभी तक अनसुलझा है, वहीं अब अभिभावकों को बढ़ी हुई कीमतों पर किताबें खरीदने का एक और आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। इसी का एक उदाहरण सामने आया, जिसमें एक प्राइवेट स्कूल की एक किताब 1000 रुपये से ज्यादा की बेची जा रही है।

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पांचवी की किताब 1035 रुपये की, महंगे सिलेबस पर सोशल मीडिया पर बहस

Lucknow school news: माइक्रोब्लॉगिंग साइट ‘X’ पर एक बार फिर शिक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। जहां स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूलने का मुद्दा अभी तक अनसुलझा है, वहीं अब अभिभावकों को बढ़ी हुई कीमतों पर किताबें खरीदने का एक और आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। इसी का एक उदाहरण सामने आया, जिसमें एक प्राइवेट स्कूल की एक किताब 1000 रुपये से ज्यादा की बेची जा रही है। ये एक किताब की कीमत है, इसमें कोई शक नहीं जो मध्यम वर्ग और कम आय वाले परिवार से आते हैं और कैसे तैसे अपने बच्चे का एडमिशन प्राइवेट स्कूल में कराते हैं, उनके लिए इस तरह की किताब का खर्च उठाना बड़े आर्थिक बोझ से कम नहीं।

माइक्रोब्लॉगिंग साइट ‘X’ पर एक अभिभावक दावा कर रहा है कि लखनऊ में एक प्राइवेट स्कूल की कक्षा 5 की अंग्रेजी की एक किताब की कीमत 1,035 रुपये है। जाहिर है इस खबर से बड़ी संख्या में अभिभावक नाराज हो गए हैं, क्योंकि ये लखनऊ के सबसे बड़े स्कूल में से एक है।

इस खबर के बाद से नियामक संस्था (Regulatory Body) स्थापित करने की तत्काल आवश्यकता पर ऑनलाइन चर्चा भी छेड़ दी है।

पूरे सेट की कीमत 8,000 रुपये

जानकारी के अनुसार, यह किताब बर्लिंगटन सीरीज की है। रिपोर्टों के मुताबिक, किताबों के पूरे सेट की कीमत 8,000 रुपये से भी ज्यादा है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि महंगी किताब बेचने वाला ये काई इकलौता स्कूल नहीं है। ज्यादातर प्रतिष्ठित निजी संस्थानों में यह एक आम बात बन गई है।

अभिभावकों की मांग क्या है?

अभिभावक लगातार अधिकारियों को टैग कर रहे हैं और इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। "हर निजी और सरकारी स्कूल में संबंधित भाषा में NCERT की किताबें लागू की जानी चाहिए। निजी स्कूल ज्यादा कीमत पर किताबें बेचते हैं।"

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निजी स्कूलों का निजी प्रकाशकों के साथ कॉन्ट्रैक्ट होता है। उन्हें अपने प्रकाशकों की किताबें लागू करने के लिए पैसे मिलते हैं। NCERT की किताबें 50-100 रुपये में मिल जाती हैं, लेकिन उनसे स्कूलों को कोई मुनाफा नहीं होता। निजी प्रकाशकों की किताबों की कीमत 500-1000 रुपये होती है, जिससे स्कूलों को भारी मुनाफा होता है।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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