Central Board of Secondary Education यानी CBSE ने 2026 की 12वीं बोर्ड परीक्षा में पहली बार बड़े स्तर पर On Screen Marking (OSM) सिस्टम लागू किया। इस तकनीक के जरिए छात्रों की कॉपियां कंप्यूटर स्क्रीन पर ऑनलाइन चेक की गईं। बोर्ड का कहना है कि इस सिस्टम से मूल्यांकन ज्यादा पारदर्शी, तेज और सटीक होता है। CBSE के अनुसार इस बार कुल 98,66,222 उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन की गईं। हालांकि रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने OSM को लेकर सवाल उठाए। खासतौर पर मैथ्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री में कम नंबर आने की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद बोर्ड ने पूरी प्रक्रिया की जानकारी साझा की है।
क्या है OSM सिस्टम?
On Screen Marking यानी OSM में छात्रों की कॉपियों को स्कैन करके डिजिटल रूप में शिक्षकों को भेजा जाता है। शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर बैठकर कॉपियां चेक करते हैं।
CBSE का कहना है कि इस सिस्टम से:
- टोटलिंग और नंबर जोड़ने की गलतियां खत्म होती हैं
- हर सवाल की जांच सुनिश्चित होती है
- मार्किंग स्कीम के अनुसार समान तरीके से नंबर दिए जाते हैं
- रिजल्ट जल्दी तैयार होता है
- पूरी प्रक्रिया ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनती है
- यह तकनीक भारत और विदेश की कई यूनिवर्सिटी और एजेंसियां पहले से इस्तेमाल कर रही हैं
CBSE ने कैसे लागू किया OSM?
CBSE ने बताया कि OSM पहली बार 2014 में शुरू किया गया था, लेकिन उस समय स्कैनिंग में दिक्कतें आने के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया गया। अब 2026 में बोर्ड ने नई तकनीक और बेहतर स्कैनिंग सिस्टम के साथ इसे दोबारा लागू किया। इस बार कॉपियों को बिना फाड़े स्कैन किया गया साथ ही स्कैनिंग की गुणवत्ता की कई स्तर पर जांच हुई है। साथ ही शिक्षकों को पहले से ट्रेनिंग दी गई। चेकिंग के लिए स्कूलों में उपलब्ध कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया।
CBSE के मुताबिक
परीक्षा केंद्रों से कॉपियां आने के बाद सबसे पहले छात्रों की पहचान छिपाई गई और फिर कॉपियां स्कैन की गईं। स्कैनिंग की गुणवत्ता खराब होने पर दोबारा स्कैन किया गया। कॉपियां अलग-अलग क्षेत्रों में भेजी गईं ताकि गोपनीयता बनी रहे और फिर शिक्षकों ने ऑनलाइन कॉपियां चेक कीं। बाद में Assistant Head Examiner और Head Examiner ने दोबारा जांच की।
शिक्षकों को दी गई ट्रेनिंग
CBSE ने बताया कि 20 और 21 जनवरी 2026 को 5 स्कूलों में ड्राई रन किया गया, जिसमें 100 शिक्षकों ने इसमें हिस्सा लिया
13 फरवरी को सभी शिक्षकों के लिए वेबिनार आयोजित हुआ। 15 फरवरी से शिक्षकों को पुराने साल की कॉपियों पर प्रैक्टिस कराई गई और 7 मार्च 2026 से वास्तविक मूल्यांकन शुरू हुआ। बोर्ड के अनुसार वेबिनार और उसकी रिकॉर्डिंग को 4 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा।
शुरुआत में आईं कई दिक्कतें
CBSE ने माना कि शुरुआत में कुछ तकनीकी समस्याएं आईं। इनमें स्कूलों में लॉगिन और IP व्हाइटलिस्टिंग की परेशानी से लेकर सिस्टम ओवरलोड जैसी समस्या शामिल थी। शिक्षकों के गलत डेटा के कारण लॉगिन फेल होना और अलग-अलग सेट की मार्किंग स्कीम जोड़ने में समय लगना था। इसके अलावा 68,018 कॉपियां खराब स्कैनिंग की वजह से दोबारा स्कैन करनी पड़ीं।
13 हजार से ज्यादा कॉपियां आखिर में मैन्युअली चेक हुईं। बोर्ड ने बताया कि करीब 13,583 कॉपियों की स्कैनिंग बार-बार खराब आ रही थी। रिजल्ट में देरी और छात्रों की चिंता को देखते हुए इन कॉपियों को आखिर में मैन्युअली चेक कराया गया और उनके नंबर सिस्टम में अपलोड किए गए।
रिजल्ट में क्यों आई गिरावट ?
CBSE के अनुसार 2026 में पास प्रतिशत और औसत अंक में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषकर फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स और अकाउंटेंसी में A1 और A2 ग्रेड की कट-ऑफ 1 से 3 अंक तक नीचे गई है। बोर्ड का कहना है कि OSM में शिक्षक मार्किंग स्कीम के अनुसार सख्ती से नंबर दे रहे थे। अगर छात्र ने शॉर्टकट या अलग तरीका इस्तेमाल किया और वह मार्किंग स्कीम में नहीं था, तो नंबर कम मिल सकते हैं।
छात्रों ने क्या शिकायतें कीं ?
रिजल्ट के बाद छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाए कि स्कैनिंग खराब होने से उत्तर साफ नहीं दिखे। स्टेप-बाय-स्टेप मार्किंग के कारण नंबर कटे और अलग तरीके से हल लिखने वाले छात्रों को कम नंबर मिले। JEE Main में 95 पर्सेंटाइल लाने वाले छात्रों के बोर्ड में कम अंक आए और इन शिकायतों के बाद CBSE ने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया शुरू की है।
अब छात्र क्या कर सकते हैं ?
CBSE ने छात्रों को अपनी कॉपी देखने का मौका दिया है।अब छात्र पहले अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका की कॉपी मांगेंगे और
फिर छात्र खुद जांच सकेंगे कि कॉपी सही चेक हुई या नहीं। छात्र मार्किंग स्कीम से तुलना कर सकेंगे और अगर कोई गलती दिखती है तो CBSE को जानकारी दे सकेंगे। इसके बाद विषय विशेषज्ञों की समिति मामले की जांच करेगी और फिर सही पाए जाने पर बोर्ड फैसला लेकर छात्र को जानकारी देगा। CBSE का कहना है कि वह छात्रों की चिंता को समझता है और हर शिकायत की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
