CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूलों को प्रति सेक्शन छात्रों की संख्या 40 करने के लिए तीन साल का अल्टीमेटम दिया है। दरअसल, साल 2019 में ही बोर्ड ने इस संबंध में दिशानिर्देश जारी किया था। हालांकि, कोविड के समय बोर्ड ने नियमों में रियायत देते हुए सीधे एडमिशन के मामलों में स्कूलों को 45 छात्र प्रति सेक्शन दाखिला देने की रियायत दी थी। तब से लेकर आज तक यह नियम नहीं माना गया लेकिन सीबीएसई ने एक बार फिर से इसे लेकर सख्ती दिखाई है।
SARAS पोर्टल पर करें अप्लाई
सीबीएसई ने अपने परिपत्र में स्कूलों से छात्रों को समायोजित करने के लिए एसएआरएएस पोर्टल पर आवेदन करने के लिए भी कहा है। इसे सुविधाजनक बनाने के लिए बोर्ड ने सेक्शन बढ़ोतरी के लिए आवेदन करने की समय सीमा 31 अगस्त तक बढ़ा दी है।
स्कूलों ने जताई आपत्ति
देश के कई इलाकों के स्कूल सीबीएसई द्वारा तय की गई सीमा का विरोध कर रहे हैं। स्कूलों के अनुसार, छात्रों की संख्या सीमित करने से वित्तीय संकट पैदा होगा और इसके परिणामस्वरूप ट्यूशन फीस में भी वृद्धि होगी। साथ ही छात्रों को एकोमडेट करने के लिए कक्षाओं के निर्माण, शिक्षकों की नियुक्ति और अन्य बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी। थोड़े से छात्रों के लिए यह इंतजाम स्कूल पर आर्थिक बोझ बढ़ाएगा।
कुलभूषण शर्मा ने रखा स्कूलों का पक्ष
नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स एलायंस (NISA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने स्कूलों का पक्ष रखते हुई सीबीएसई अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक को एक पत्र भी लिखा है। हालांकि, सीबीएसई ने इन निर्देशों के खिलाफ किसी भी अनुरोध को स्वीकार करने से मना कर दिया है।
अटेंडेस को लेकर गाइडलाइंस
सीबीएसई ने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए हाल ही में गाइडलाइन जारी किया है। जिसके मुताबिक, बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों का 75 प्रतिशत अटेडेंस होना अनिवार्य है। साथ ही बोर्ड परीक्षा के लिए विषयों में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर भी विजिट कर सकते हैं।
