CBSE Class 12th Marking Scheme: सीबीएसई 12वीं के छात्रों को अपने रिजल्ट का इंतजार है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार अप्रैल में ही CBSE 12वीं का रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा। हालांकि अप्रैल महीने में अब कम ही दिन बचे हैं। छात्र आधिकारिक वेबसाइट्स cbse.gov.in और
इस बार सीबीएसई की कॉपियां नए मार्किंग सिस्टम के तहत चेक की जा रही हैं। उत्तर पुस्तिकाओं की जांच डिजिटल रूप से होने से, बोर्ड का लक्ष्य इस प्रक्रिया को तेज, ज्यादा सटीक और मानवीय गलतियों से मुक्त बनाना है। चलिये जानते हैं कि ये काम कैसे करता है।
ये कैसे काम करता है?
ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के तहत, छात्र अपनी परीक्षाएं कागज पर ही लिखते हैं। फिर उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया जाता है, बजाय इसके कि उन्हें फिजिकल तरीके से शिक्षकों को दिया जाए। शिक्षक अपने क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके लॉग इन करते हैं और अपने-अपने स्कूलों से ऑनलाइन आंसर्स चेक करते हैं।
कैसे काउंट होंगे 12वीं के नंबर्स ?
परीक्षक उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई कॉपियों का मूल्यांकन करते समय सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अंक देते हैं। ये प्रणाली गलतियों की संभावना को कम करती है, विशेष रूप से अंकों के कुल योग में, और मूल्यांकन में एकरूपता में सुधार करती है।
इस डिजिटल प्रक्रिया ने मूल्यांकन की समय-सीमा को भी लगभग 12 दिनों से घटाकर लगभग 9 दिन करने में मदद की है, जिससे परिणामों की प्रक्रिया तेजी से हो पाती है। हालाँकि, मार्किंग स्कीम, वेटेज और उत्तर मूल्यांकन के मानदंड अपरिवर्तित रहते हैं।
छात्रों के लिए मार्किंग स्कीम से क्या हुए बदलाव ?
- तेज परिणाम: मूल्यांकन प्रक्रिया पहले की तुलना में तेज़ी से पूरी होने की संभावना है।
- डिजिटल मार्किंग से गणना की गलतियों की संभावना कम हो जाती है।
- चूँकि उत्तरों की जाँच स्क्रीन पर की जाती है, इसलिए साफ और सुंदर लिखावट ज्यादा जरूरी हो जाती है।
शिक्षकों के लिए क्या बदलाव आए हैं?
शिक्षक अब केंद्रीय मार्किंग केंद्रों की यात्रा किए बिना अपने ही स्कूलों से उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर सकते हैं, जिससे नियमित शिक्षण कार्य में बाधा कम होती है। इस प्रणाली में मूल्यांकन भुगतान जैसे विवरणों को प्रबंधित करने के लिए एक प्रोफ़ाइल अनुभाग भी शामिल है।
क्या अब भी होगी रीचेकिंग की जरूरत ?
CBSE ने संकेत दिया है कि परिणाम के बाद रीचेकिंग की जरूरत में काफी कमी आ सकती है, क्योंकि डिजिटल मूल्यांकन से कुल योग और गणना की गलतियों की संभावना कम हो जाती है। ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली CBSE की मूल्यांकन प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव लाती है, जिससे यह तेज, ज्यादा कुशल और ज्यादा विश्वसनीय बन जाती है। हालाँकि छात्र परीक्षाएं कागज पर ही लिखते हैं, लेकिन साफ प्रस्तुति पर ज्यादा ध्यान देने से डिजिटल प्रारूप में सटीक मूल्यांकन सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
