देश

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- सिर्फ हटाना नहीं, ऑनलाइन आने से रोकने पर भी दें ध्यान

Child Pornography Row: केंद्र को दो हफ्ते में बताना होगा- 2024 के फैसले के निर्देश कैसे लागू होंगे, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऐसा कंटेंट पहुंचने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

Image

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो साभार: ANI)

Child Pornography Row: बच्चों के यौन शोषण और उससे जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को रोकथाम यानी 'प्रिवेंशन' पर भी फोकस करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ ऑनलाइन मौजूद ऐसे कंटेंट को हटाने या शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित रहने के बजाय यह भी देखना होगा कि ऐसा कंटेंट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाई ही न दे या वहां पहुंचने से पहले उसे रोका जा सके।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस की याचिका पर सुनवाई के दौरान इस मामले को 'बेहद गंभीर' बताया। याचिका में 23 सितंबर, 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दिए गए निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू करने की मांग की गई है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

दो साल बाद भी निर्देश लागू नहीं होने का दावा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले को करीब दो साल हो चुके हैं, लेकिन उसके निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि वह कार्रवाई की रिपोर्ट यानी एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करेगी। केंद्र ने यह भी बताया कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार की जा रही है। एसओपी तैयार होने के बाद उसे कोर्ट के सामने रखा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया आखिरी मौका

कोर्ट ने याद दिलाया कि उसके 14 अगस्त, 2026 के पिछले आदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और कानून एवं न्याय मंत्रालय को जवाब और रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कोर्ट के मुताबिक अब तक ऐसा जवाब रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया है।

बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों मंत्रालयों को एक आखिरी मौका दिया। केंद्र को अपनी रिपोर्ट में यह बताना होगा कि 23 सितंबर 2024 के फैसले के निर्देशों को किस तरह लागू किया जाएगा और ऐसे कंटेंट को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामने आने से रोकने के लिए क्या सावधानियां बरती जाएंगी।

अगली सुनवाई से पहले ड्राफ्ट एसओपी देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को यह भी निर्देश दिया कि चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉयटेशन एंड एब्यूज मटेरियल (CSEAM) से जुड़े मामलों से निपटने के लिए तैयार किए जा रहे ड्राफ्ट एसओपी की कॉपी अगली सुनवाई से कम से कम 4-5 दिन पहले याचिकाकर्ता को दी जाए। इससे याचिकाकर्ता को एसओपी पर अपने सुझाव और आपत्तियां कोर्ट के सामने रखने का मौका मिलेगा।

2024 के फैसले में क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने?

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के 23 सितंबर, 2024 के फैसले से जुड़ा है। उस फैसले में कोर्ट ने बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट के ऑनलाइन प्रसार को गंभीर अपराध और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा माना था।

मौजूदा याचिका जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस की ओर से उसके संस्थापक भुवन रिभु के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्र और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म 2024 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर रहे हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट का जोर सिर्फ ऐसे कंटेंट की पहचान और उसे हटाने पर नहीं, बल्कि 'रोकथाम' यानी ऐसा कंटेंट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंचे ही नहीं, इस दिशा में व्यवस्था तैयार करने पर है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

और पढ़ें
End of Article