School on Wheels in Bihar: बिहार में सड़कों, चौराहों और ट्रैफिक सिग्नलों पर जीवन बिताने या आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा एक बेहद ही सराहनीय कदम उठाया गया है। अब शिक्षा पाने के लिए इन बेसहारा बच्चों को स्कूल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि खुद स्कूल उनके पास पहुंचेगा। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार के दिशा-निर्देशों पर बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार ने राज्य में 'स्कूल ऑन व्हील्स' योजना की शुरुआत करने का निर्णय लिया है।
इस अनूठी पहल (Mobile Classroom) का मुख्य उद्देश्य 6 से 14 वर्ष के ड्रॉपआउट और वंचित बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना है। शुरुआत में इसे राज्य के 5 प्रमुख जिलों—पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया और दरभंगा में लागू किया जा रहा है, जहां पुरानी और बेकार पड़ी सरकारी बसों को आधुनिक सुविधाओं से लैस चलती-फिरती कक्षाओं में बदला जा रहा है।
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आधुनिक सुविधाओं और वाई-फाई से लैस होंगी बसें
इन विशेष बसों के अंदर बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतरीन माहौल दिया जाएगा। अगर इस पहल की सुविधाओं की बात करें तो यहां स्मार्ट क्लास के साथ वाई-फाई आदि सुविधाएं शामिल है। विस्तार में इसकी जानकारी इस प्रकार है -
| स्मार्ट क्लासरूम | प्रत्येक बस में ब्लैक बोर्ड, राइटिंग बोर्ड के साथ-साथ हाई-स्पीड वाई-फाई, डिजिटल स्मार्ट स्क्रीन और एलईडी टीवी जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी। |
| शिक्षकों की तैनाती | हर बस में 15 से 20 बच्चों के बैठने की क्षमता होगी, जिन्हें पढ़ाने के लिए दो सरकारी शिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा। |
| मुफ्त अध्ययन सामग्री | बच्चों को नि:शुल्क यूनिफॉर्म, जूते, किताबें, ड्राइंग किट और खेलकूद के खिलौने भी दिए जाएंगे। |
पौष्टिक मिड-डे मील और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था
सामान्य सरकारी स्कूलों की तर्ज पर इन चलती-फिरती कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को रोजाना न्यूट्रिशियस 'मिड-डे मील' यानी दोपहर का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों की सेहत का ख्याल रखने के लिए समय-समय पर नियमित स्वास्थ्य जांच भी की जाएगी। बच्चों को सुरक्षित बस तक लाने और पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके घर तक वापस छोड़ने की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
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कक्षाओं का समय और प्रवेश प्रक्रिया
यह योजना मुख्य रूप से उन बच्चों के लिए है जिनके पास पढ़ाई का कोई साधन नहीं है। बच्चों का दाखिला उनके माता-पिता या अभिभावकों की सहमति से किया जाएगा, ताकि बाद में उन्हें औपचारिक रूप से नियमित सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिलाया जा सके।
सुबह 9:30 बजे बच्चों को पिक-अप किया जाएगा।
सुबह 10:00 से दोपहर 1:00 बजे बस में नियमित कक्षाएं चलेंगी।
दोपहर 1:30 बजे बच्चों को भोजन कराने के बाद सुरक्षित उनके घर या स्थान पर छोड़ दिया जाएगा।
यह योजना शिक्षा विभाग, विधिक सेवा प्राधिकार, नगर निगम और जिला प्रशासन के संयुक्त सहयोग से चलाई जा रही है। महाराष्ट्र, गुजरात, केरल, असम और मणिपुर जैसे राज्यों के बाद अब बिहार में भी यह मॉडल जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को संवारने में मील का पत्थर साबित होगा।
