मध्य प्रदेश के बैतूल की एक बेटी ने ऐसा चौंकाने वाला कदम उठाया है, जिसकी चर्चा हर ओर है। बैतुल की प्रखर जज का एग्जाम पास कर चुकी थी, लेकिन नौकरी ज्वाइन करने से पहले साध्वी बन गई। प्रखर का कहना है कि बचपन से ही उन्हें आध्यात्म में रूचि थी, लेकिन माता-पिता के सपने के कारण वो पढ़ाई करती रही।
जज बनने का सपना पूरा, फिर चुना महावीर का रास्ता
प्रखर दीदी ने बताया कि उनके माता-पिता की इच्छा थी कि वह जज की परीक्षा पास करें। उन्होंने यह सपना पूरा किया, लेकिन बचपन से ही उनके मन में वैराग्य की भावना थी। उनका कहना है कि जज या वकील बनकर वह समाज की उतनी सेवा नहीं कर पातीं, जितनी भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलकर कर सकती हैं।
उनके मुताबिक, सांसारिक जीवन में रहते हुए समाज के लिए काम करने के कई रास्ते हैं, लेकिन उन्होंने आध्यात्मिक जीवन और संयम को अपना लक्ष्य बनाया है। जज की परीक्षा पास करने के बाद दीक्षा लेने का उनका निर्णय इसी सोच का परिणाम है।
विंटेज कारें, शाही बग्घियां और उदयपुर का बैंड बना आकर्षण
बैतुल की सड़कों पर रविवार को भक्ति, उत्साह और वैराग्य का अनूठा संगम देखने को मिला। यहां जैनेश्वरी दीक्षा लेने जा रहीं ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी समेत पांच दीक्षार्थी बहनों के सम्मान में भव्य बिनौली चल समारोह निकाला गया। इस आयोजन में विंटेज कारों का काफिला, आकर्षक शाही बग्घियां और राजस्थान के उदयपुर से आई बैंड पार्टी आकर्षण का केंद्र रही। बड़ी संख्या में जैन समाज के लोगों और श्रद्धालुओं ने पांचों दीक्षार्थी बहनों का फूल-मालाओं और जयकारों के साथ स्वागत किया।शहर के अलग-अलग स्थानों पर लोगों ने पुष्पमालाओं और जयकारों के साथ बहनों का अभिनंदन किया।
'हर बेटी की अंतिम विदाई का समय'
सहारनपुर की बाल ब्रह्मचारिणी रंगोली दीदी ने इस आयोजन को दीक्षार्थी बहनों के जीवन का भावुक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि अभी सभी बहनों ने रंगीन वस्त्र पहने हैं, लेकिन दीक्षा के बाद वे सफेद वस्त्र धारण कर लेंगी। उन्होंने इसे हर बेटी की अंतिम विदाई का समय बताया।
रंगोली दीदी के मुताबिक, बैतूल की प्रखर दीदी के परिवार ने उन्हें भव्य विदाई दी है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक समारोह नहीं, बल्कि सांसारिक जीवन से विरक्ति लेकर आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने के संकल्प का अवसर भी है।
जैन दादावाड़ी में पूरी हुई गोदभराई की रस्म
भव्य बिनौली चल समारोह शहर के जैन दादावाड़ी पहुंचकर संपन्न हुआ। यहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की गोदभराई की पारंपरिक रस्म पूरी की गई। इस दौरान परिवार के सदस्यों और समाज के लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।
पांचों बहनें 22 नवंबर को जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करेंगी। इससे पहले बैतूल में आयोजित इस भव्य समारोह के जरिए उनके परिवार और जैन समाज ने उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी।
