देश में फोटो वाले Voter ID card की शुरुआत कब से हुई? जानें किसने दिया था ये आइडिया

आज जब भी हमें कहीं फोटो आईडी प्रूफ देने की आवश्यकता पड़ती है तो जेब से रंगीन फोटो वाला वोटर आईडी कार्ड निकलता है। यह देखने में से आम सी बात है, लेकिन क्या आपने इस वोटर आईडी को देखते हुए कभी ये सोचा कि देश के करोड़ों लोगों को फोटो वाले वोटर आईडी कार्ड देने की शुरुआत कब हुई। बता दें कि वोटर आईडी कार्ड पर शुरू से फोटो नहीं थी। ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि वोटर आईडी पर फोटो को आइडिया कहां से आया?

Authored by: वर्षा कुशवाहाUpdated Jun 19 2026, 13:50 IST
देश के करोड़ों नागरिकों की पहचान बने वोटर आईडी कार्ड का एक दौर वह भी था जब बिना किसी फोटो पहचान पत्र के ही चुनाव होते थे, जिससे फर्जी वोटिंग का खतरा हमेशा बना रहता था। इस चुनौती को खत्म करने और भारतीय लोकतंत्र को एक पारदर्शी रूप देने के लिए ही वोटर आईडी कार्ड पर फोटो की शुरुआत की गई। आइए बिना फोटो वाले वोटर आईडी से फोटो वाले वोटर आईडी कार्ड के सफर के बारे में जानें। Image Credit : Canva01 / 08

देश के करोड़ों नागरिकों की पहचान बने वोटर आईडी कार्ड का एक दौर वह भी था जब बिना किसी फोटो पहचान पत्र के ही चुनाव होते थे, जिससे फर्जी वोटिंग का खतरा हमेशा बना रहता था। इस चुनौती को खत्म करने और भारतीय लोकतंत्र को एक पारदर्शी रूप देने के लिए ही वोटर आईडी कार्ड पर फोटो की शुरुआत की गई। आइए बिना फोटो वाले वोटर आईडी से फोटो वाले वोटर आईडी कार्ड के सफर के बारे में जानें।

किसने दिया फोटो वाले वोटर आईडी का आइडिया?​Image Credit : Canva02 / 08

किसने दिया फोटो वाले वोटर आईडी का आइडिया?​

​भारत में फोटो वाले आईडी कार्ड की शुरुआत का पूरा श्रेय 10वीं मुख्य चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषन (T. N. Seshan) को जाता है। उन्होंने साल 1990 में पद संभाला और चुनाव प्रणाली को सुधारने का बीड़ा उठाया। टी. एन. शेषन ने ही पहली बार फर्जी वोटिंग रोकने के लिए फोटो वाले वोटर आईडी कार्ड का आइडिया दिया था।​

कब हुई फोटो वोटर आईडी कार्ड की शुरुआतImage Credit : Canva03 / 08

कब हुई फोटो वोटर आईडी कार्ड की शुरुआत

​टी. एन. शेषन के कड़े प्रयासों के बाद देश में आधिकारिक तौर पर फोटो वाले वोटर आईडी कार्ड की शुरुआत साल 1993 में की गई। शुरुआती समय में इस योजना का पुरजोर विरोध किया गया और इसे खर्चीला बताया गया, लेकिन शेषन के दृढ़ फैसले ने पूरे देश में इसे लागू किया।​

पहला फोटो वोटर आईडी कार्ड कैसा दिखता था?​Image Credit : Canva04 / 08

पहला फोटो वोटर आईडी कार्ड कैसा दिखता था?​

​1993 में जब पहली बार फोटो वाले वोटर आईडी कार्ड बनाया गया, तो वह आज के आधुनिक PVC कार्ड के जैसा बिल्कुल नहीं था। शुरुआती समय में वोटर आईडी कार्ड काले और सफेद रंग का होता था, जिसमें धुंधली सी फोटो और डिटेल्स शामिल थी। इसपर प्लास्टिक लेमिनेशन किया जाता था ताकि यह फटे या गले न और सुरक्षित रहे।​

क्या थी इसे लेकर चुनौतियां?Image Credit : Canva05 / 08

क्या थी इसे लेकर चुनौतियां?

​फोटो वाले वोटर आईडी कार्ड बनाने के लिए सबसे बड़ी चुनौती फोटो हुआ करती थी। जी हां, 90 के दशक में देश की एक बड़ी आबादी के पास अपनी कोई फोटो नहीं थी। ऐसे में चुनाव आयोग के लिए करोड़ों लोगों की तस्वीरें खींचना, उनका रिकॉर्ड बनाना और कार्ड प्रिंट करना एक बेहद जटिल और खर्चीला काम था। कई राजनीतिक दलों ने यह दावा भी किया था कि यह कभी सफल नहीं हो पाएगा।​

टी. एन. शेषन ने  अपना था सख्त रुखImage Credit : Canva06 / 08

टी. एन. शेषन ने अपना था सख्त रुख

​जब सरकारों ने बजट और संसाधनों का बहाना बनाया तो टी. एन. शेषन ने बिना झुके साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि मतदाताओं को फोटो वाले पहचान पत्र उपलब्ध नहीं कराया गया तो वे देश के किसी भी राज्य का चुनाव आयोजित नहीं कराएंगे।​

कैसे बदला वोटर आईडी कार्ड का आधुनिक स्वरूप?Image Credit : Canva07 / 08

कैसे बदला वोटर आईडी कार्ड का आधुनिक स्वरूप?

​समय बदलने के साथ तकनीकों में आए बदलाव के वोटर आईडी कार्ड का रूप भी बदल गया। पहले ब्लैक एंड व्हाइट फोटो हुआ करती थी अब कार्ड पर रंगीन फोटो देखने को मिलती है। पुराने समय के कागज वाले लेमिनेटेड कार्ड की जगह अब हाई-टेक डिजिटल पीवीसी कार्ड ने ले ली है।​

भारतीय लोकतंत्र के लिए मिल का पत्थर साबित हुआ फैसला​Image Credit : Canva08 / 08

भारतीय लोकतंत्र के लिए मिल का पत्थर साबित हुआ फैसला​

​टी. एन. शेषन फोटो वाले वोटर आईडी कार्ड वाले इस फैसले ने भारतीय चुनाव प्रणाली की पूरी तस्वीर ही बदल दी। इसने 'फर्जी मतदान' और 'बूथ कैप्चरिंग' जैसी गंभीर समस्याओं पर काफी हद तक लगाम लगा दी। आज फोटो वाले यह कार्ड न केवल वोट देने के लिए, बल्कि देश के हर नागरिक के लिए एक वैध पहचान पत्र बन चुके हैं।​

End of Photo Gallery
Subscribe to our daily Newsletter!